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Palamu Mirchaiya Fall: मॉनसून में मिरचैया जलप्रपात की खूबसूरती दोगुनी हो जाती है. यहां ऊंचाई से गिरता दूधिया पानी और चारों ओर फैली हरियाली पर्यटकों को काफी आकर्षित करती है. यह वॉटरफॉल लातेहार जिले में है और प्राकृतिक सुंदरता के बीच सुकून भरे पल बिताने का बेहतरीन ऑप्शन है.
पलामू. बरसात के बाद प्रकृति जब नए रंग-रूप में निखरती है, तो जंगल, पहाड़, नदी और झरने की खूबसूरती देखते ही बनती है. खासकर मानसून में जलप्रपातों का आकर्षण कई गुना बढ़ जाता है. ऊंचाई से गिरता दूधिया पानी, चारों ओर फैली हरियाली और ठंडी हवाओं के बीच नहाने का रोमांच पर्यटकों को अपनी ओर खींचता है. अगर आप भी बारिश के मौसम में प्राकृतिक खूबसूरती के बीच कुछ सुकून भरे पल बिताना चाहते हैं, तो लातेहार जिले का मिरचैया जलप्रपात बेहतर विकल्प हो सकता है.
दूर से ही पर्यटकों को आकर्षित करती है
बता दें कि पलामू जिला मुख्यालय मेदिनीनगर से करीब 60 किलोमीटर दूर बेतला-महुआडांड़ मार्ग पर स्थित मिरचैया जलप्रपात इन दिनों अपने आकर्षक रूप में है. करीब 100 फीट की ऊंचाई से गिरते झरने का पानी जब चट्टानों से टकराते हुए नीचे पहुंचता है, तो दूधिया रंग का मनोरम दृश्य दिखाई देता है. घने जंगल और पहाड़ियों के बीच झरने की कल-कल करती आवाज दूर से ही पर्यटकों को अपनी ओर आकर्षित करती है.
सुरक्षा के लिए गार्ड की तैनाती भी
जलप्रपात के करीब पहुंचते ही पानी की आवाज कौतूहल पैदा करती है. इसके बाद ऊंचाई से गिरते पानी का दृश्य मन मोह लेता है. नीचे बने प्राकृतिक जलकुंड में घुटने तक पानी रहता है, जहां पर्यटक ठंडे पानी में स्नान का आनंद लेते हैं. खुले आसमान, घने जंगल और ठंडे पानी के बीच स्नान करना लोगों को अलग तरह का रोमांच देता है. हालांकि, गहरे और खतरनाक स्थानों पर जाने से रोकने के लिए वन विभाग की ओर से गार्ड की तैनाती भी की गई है ताकि कोई खतरा न आए.
10 रुपये में मिलती है एंट्री
बता दें कि पर्यटकों की सुविधा के लिए जलप्रपात क्षेत्र को भी विकसित किया गया है. यहां एंट्री के लिए टिकट लगता है, जिसमें 10 रुपये में एंट्री मिलती है. यहां बैठने के लिए गजीबो और कुर्सियों की व्यवस्था की गई है. इसके बावजूद कई पर्यटक प्राकृतिक चट्टानों पर बैठकर भोजन और नाश्ते का आनंद लेते नजर आते हैं. छुट्टी के दिनों में मेदिनीनगर समेत आसपास के इलाकों से बड़ी संख्या में लोग यहां पहुंचते हैं.
ऐसे पड़ा नाम
आगे कहा कि मिरचैया जलप्रपात सिर्फ प्राकृतिक खूबसूरती के लिए ही नहीं, बल्कि अपने नाम और इतिहास को लेकर भी खास है. जलप्रपात पर तैनात गार्ड हरिनंद उरांव के अनुसार, कभी इस इलाके में ‘जैया मिर्च’ की बड़े पैमाने पर खेती होती थी. पहाड़ी क्षेत्र में पैदा होने वाली यह मिर्च आसपास के क्षेत्रों के साथ झारखंड, छत्तीसगढ़ और उत्तर प्रदेश तक प्रसिद्ध थी. इसी वजह से गांव का नाम मिरचैया पड़ा और बाद में जलप्रपात भी इसी नाम से प्रसिद्ध हो गया.
बता दें कि मानसून में झरने का पानी और हरियाली पर्यटकों को खासा आकर्षित करती है, जबकि अक्टूबर से मार्च तक यहां पर्यटकों की भीड़ और बढ़ जाती है. यही वजह है कि मिरचैया जलप्रपात प्राकृतिक सौंदर्य, रोमांच और सुकून – तीनों का संगम बनकर उभरता है. जहां आने के बाद आपको सुकून और शांति दोनों का आनंद मिलता है.
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Raina Shukla is an experienced journalist and content professional with nearly two decades of experience in print and digital media. She holds a Master’s degree in Mass Communication and Journalism from Bundelk…
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