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मानसून में नींबू के पौधे की करें ऐसी देखभाल! एक महीने बाद...


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मानसून में नींबू के पौधे की करें ऐसी देखभाल! एक महीने बाद फलों से लद जाएगी डाल

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अगर आपके घर या खेत में लगा नींबू का पौधा फल नहीं दे रहा है, तो जुलाई का महीना उसकी देखभाल के लिए सबसे उपयुक्त माना जाता है. देवघर के कृषि विशेषज्ञ अंबिका कुशवाहा के अनुसार, इस समय पौधे की सूखी और कमजोर शाखाओं की छंटाई करें, जड़ों के आसपास की मिट्टी को भुरभुरा करें और सड़ी हुई गोबर की खाद के साथ जरूरत के अनुसार डीएपी डालें. साथ ही खरपतवार भी हटा दें. बारिश के मौसम में यह देखभाल पौधे की नई बढ़वार को बढ़ावा देती है, जिससे कुछ ही समय में फूल आने लगते हैं और पौधा गुच्छों में नींबू देने लगता है.

देवघर – आज के समय में निम्बू हर घर की जरूरत बन चुका है. चाहे रसोई में सलाद बनाना हो, दाल का स्वाद बढ़ाना हो, शरबत तैयार करना हो या फिर किसी भी तरह की चटनी, निम्बू का इस्तेमाल लगभग हर दिन होता है. यही वजह है कि गांव हो या शहर, ज्यादातर लोग अपने घर के आंगन, किचन गार्डन या खेत की मेड़ पर निम्बू का पौधा जरूर लगाते हैं.

वहीं कई किसान इसकी व्यवसायिक खेती कर हर साल अच्छी कमाई भी कर रहे हैं, क्योंकि बाजार में सालभर निम्बू की मांग बनी रहती है. लेकिन कई बार ऐसा देखने को मिलता है कि पौधा कई साल पुराना हो जाता है, उसकी लंबाई भी बढ़ जाती है, पत्तियां भी खूब निकलती हैं, लेकिन फल नहीं आते. ऐसे में किसान और बागवानी करने वाले लोग परेशान हो जाते हैं कि आखिर गलती कहां हो रही है. कई लोग महंगी खाद और दवाइयों का इस्तेमाल भी करते हैं, लेकिन फिर भी पौधे में मनचाहा फलन नहीं हो पाता.

निम्बू के पौधे का रख रखाव के लिए मानसून महीना सबसे उत्तम 
फिलहाल जुलाई का महीना चल रहा है और मानसून की बारिश ने दस्तक दे दी है. कृषि विशेषज्ञ की मानें तो यही वह समय है जब निम्बू के पौधे की सही तरीके से देखभाल की जाए तो आने वाले महीनों में पौधा फलों से लद सकता है.बारिश के मौसम में मिट्टी में पर्याप्त नमी रहती है, जिससे पौधे की जड़ें तेजी से पोषक तत्वों को ग्रहण करती हैं और नई बढ़वार शुरू होती है.इसलिए जुलाई का महीना केवल पौधे को बढ़ाने का नहीं, बल्कि उसकी पूरी देखभाल करने का सबसे महत्वपूर्ण समय माना जाता है. अगर इस समय सही तकनीक अपनाई जाए तो लंबे समय से फल नहीं देने वाला पौधा भी फिर से फल देना शुरू कर सकता है.

क्या कहते है कृषि विशेषज्ञ
देवघर के कृषि विशेषज्ञ अम्बिका कुशवाहा ने लोकल 18 से बातचीत करते हुए बताया कि अगर किसी के घर या खेत में लगा निम्बू का पौधा फल नहीं दे रहा है तो सबसे पहले उसकी कटिंग-प्रूनिंग यानी छंटाई करनी चाहिए. पौधे की सूखी, कमजोर, रोगग्रस्त और आपस में उलझी हुई शाखाओं को काटकर अलग कर देना चाहिए.कई बार पुरानी और बेकार शाखाएं पौधे का पूरा पोषण अपने अंदर ले लेती हैं, जिससे नई टहनियां नहीं निकल पातीं और फलन भी प्रभावित होता है. जब इन शाखाओं को हटा दिया जाता है तो पौधे में नई शाखाएं तेजी से निकलती हैं और वही शाखाएं आगे चलकर फूल और फल देने का काम करती हैं. इसलिए जुलाई में कटिंग-प्रूनिंग करना सबसे जरूरी काम माना जाता है.

जुलाई माह मे जड़ मे डाले अवश्य यह चीजे 
उन्होंने आगे बताया कि केवल छंटाई कर देना ही काफी नहीं है. इसके बाद पौधे की जड़ के आसपास की मिट्टी को हल्का सा खोदकर भुरभुरा कर देना चाहिए ताकि हवा और पानी आसानी से जड़ों तक पहुंच सके.इसके बाद पौधे की उम्र के अनुसार डीएपी, अच्छी तरह सड़ी हुई सूखी गोबर की खाद और पौधे के आसपास उगी हुई खरपतवार को हटाकर साफ-सफाई करनी चाहिए. गोबर की खाद मिट्टी की उर्वरता बढ़ाती है, जबकि डीएपी पौधे को आवश्यक पोषक तत्व उपलब्ध कराता है. वहीं खरपतवार हटाने से पौधे का पूरा पोषण उसी को मिलता है और बेकार घास पोषक तत्वों की चोरी नहीं कर पाती.बारिश के मौसम में यह प्रक्रिया पौधे के लिए काफी लाभदायक मानी जाती है.

निम्बू के पौधे मे गुच्छे भर आएगा फलन 
कृषि विशेषज्ञ का कहना है कि अगर जुलाई महीने में किसान या बागवानी करने वाले लोग यह सभी काम समय पर कर लेते हैं तो लगभग एक महीने के भीतर पौधे में साफ बदलाव दिखाई देने लगता है. नई कोपलें निकलने लगती हैं, नई शाखाओं का विकास होता है और धीरे-धीरे फूल आने शुरू हो जाते हैं.इसके बाद पौधे में एक-दो नहीं बल्कि गुच्छों में निम्बू लगने लगते हैं. कई बार जिन पौधों में वर्षों से फल नहीं आ रहे होते हैं, उनमें भी सही देखभाल के बाद अच्छा फलन देखने को मिलता है.हालांकि उन्होंने सलाह दी कि खाद की मात्रा पौधे की उम्र और आकार के हिसाब से ही देनी चाहिए, ताकि पौधे को नुकसान न पहुंचे.

About the Author

Amit Singh

8 वर्षों से पत्रकारिता में अग्रसर. इलाहबाद विश्वविद्यालय से मास्टर्स इन जर्नालिस्म की पढ़ाई. अमर उजाला, दैनिक जागरण और सहारा समय संस्थान में बतौर रिपोर्टर, उपसंपादक औऱ ब्यूरो चीफ दायित्व का अनुभव. क्राइम, खेल, …और पढ़ें



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