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कोडरमा जिले में मानसून की शुरुआत के साथ ही जलप्रपातों पर रौनक लौट आई है। पिछले तीन दिनों से हो रही बारिश के कारण यहां के विभिन्न झरने और झीलें आकर्षक दिख रही हैं। जिले के दो प्रमुख जलप्रपात, सदर प्रखंड के जरगा पंचायत में स्थित वृन्दाहा जलप्रपात और सतगांवां प्रखंड में झारखंड-बिहार सीमा पर स्थित पेट्रो जलप्रपात, पर्यटकों के लिए मुख्य आकर्षण बन गए हैं। आसपास के जिलों से भी लोग पहुंच रहे इन दोनों जलप्रपातों की प्राकृतिक सुंदरता इतनी मनमोहक है कि इन्हें देखने के लिए न केवल कोडरमा जिले से, बल्कि आसपास के अन्य जिलों और पड़ोसी राज्य बिहार से भी बड़ी संख्या में पर्यटक पहुंच रहे हैं। सतगांवां प्रखंड के घने जंगलों के बीच स्थित पेट्रो जलप्रपात अपनी प्राकृतिक सुंदरता और ठंडे पानी के लिए विशेष रूप से प्रसिद्ध है। यह प्राकृतिक झरना जिला मुख्यालय से लगभग 70 किलोमीटर दूर है। यहां स्थानीय निवासियों के साथ-साथ पड़ोसी जिलों और बिहार से भी पर्यटक आते हैं। पर्यटक कुंडों में स्नान कर गर्मी से राहत महसूस करते हैं पेट्रो जलप्रपात की एक प्रमुख विशेषता यहां बने सात प्राकृतिक कुंड हैं। पहाड़ों से गिरता पानी इन कुंडों में जमा होकर एक मनमोहक दृश्य बनाता है। पर्यटक इन कुंडों में स्नान कर गर्मी से राहत महसूस करते हैं। आसपास की हरियाली, ठंडी हवा और पानी की कल-कल ध्वनि इस स्थान को एक आदर्श पिकनिक स्पॉट बनाती है। यही वजह है कि छुट्टियों और सप्ताहांत में यहां पर्यटकों की भारी भीड़ देखी जा रही है। पर्यटन स्थलों में अपनी पहचान बना चुका है यहां आने वाले पर्यटक इस स्थान की प्राकृतिक सुंदरता से प्रभावित होते हैं। ठंडे पानी की फुहारें और शांत वातावरण उन्हें सुकून का अनुभव कराते हैं। कई लोग अपने परिवार और दोस्तों के साथ यहां आकर यादगार पल बिताते हैं। हालांकि, कुछ पर्यटकों ने जलप्रपात स्थल पर साफ-सफाई और सुरक्षा व्यवस्था में सुधार की आवश्यकता भी व्यक्त की है। प्राकृतिक सौंदर्य और रोमांच का अनूठा संगम प्रस्तुत करता पेट्रो जलप्रपात आज कोडरमा जिले के प्रमुख पर्यटन स्थलों में अपनी पहचान बना चुका है। जरूरत है तो बस इसे सुरक्षित और स्वच्छ बनाए रखने की। ताकि आने वाले समय में भी यह स्थल सैलानियों को इसी तरह आकर्षित करता रहे और प्रकृति की यह अनमोल धरोहर सुरक्षित रह सके। झरने का पानी काफी मीठा स्थानीय पूर्व पंचायत समिति सदस्य नियाज अंसारी ने बताया कि यहां झरने से गिरने वाले पानी का अलग ही महत्व है। उन्होंने बताया कि यहां पिकनिक मनाने वाले लोग अपने साथ पानी का जार तो लाते हैं, लेकिन वे उस पानी को बिना उपयोग ही वापस ले जाते हैं। ऐसा इसलिए है क्योंकि पेट्रो जलप्रपात से गिरने वाला झरने का पानी काफी मीठा होने के साथ साथ सुपाच्य भी है। ऐसा माना जाता है कि यहां के पानी से पकने वाले खाने में एक अलग स्वाद आता है। वहीं यहां का पानी पीते ही खाना काफी जल्दी पच जाता है। वृंदाहा जल प्रपात दो ऊंची पहाडों के बीच से गिरती है इधर, सदर प्रखण्ड के वृन्दाहा जलप्रपात की बात करें तो इसे जिले का कश्मीर कहना गलत नहीं होगा। वृंदाहा जल प्रपात दो ऊंची पहाडों के बीच से कल कल कर गिरती है। यहां की प्राकृतिक सौंदर्य भी लुभावन है। चारों ओर घने जंगल से घिरा यह प्राकृतिक जल प्रपात लोगों के बीच कौतुहल का विषय बना है। 40 फीट की उंचाई से जल नीचे गिरता है यह जल प्रपात कोडरमा स्टेशन से करीब 10 किलोमीटर दूर कोडरमा प्रखंड के जरगा पंचायत में अवस्थित है। प्रकृति की हसीन वादियों में बहती वृंदाहा जल प्रपात दो ऊंची पहाड़ी के बीच से होकर गुजरती है, फिर करीब 40 फीट की उंचाई से जल नीचे गिरता है। जहां जलाशय में स्नान कर लोग आनंद की अनुभूति प्राप्त करते है। जंगल, पहाड़, झरने व नदियों से सराबोर यह जल प्रपात आदिम काल से मानव को अपनी ओर मोहित करते आ रहा है। हर साल यहां हजारों पर्यटक दूसरे प्रदेशों से देखने आते है और यहां की वादियों में सैर करते है। इसकी खास विशेषता यह है कि इस जल प्रपात से एक नदी निकलती है जो जंगल व पत्थरों से बीच से बहते बिहार की सीमा तक जाती है, जहां हल्दिया डैम अवस्थित है। यहां का दृश्य अदभुत व दर्शनीय है। यहां पिकनिक मनाने वाले लोग बताते है कि जल प्रपात का पानी बहुत ही स्वच्छ है। सुरक्षा को लेकर बनाई गई है समिति इधर, इन जलप्रपातों में सुरक्षा को लेकर प्रशासन सजग है। जिला पर्यटन पदाधिकारी तुषार रॉय ने बताया कि जलप्रपातों में पहुंचने वाले सैलानियों के सुरक्षा तथा अन्य व्यवस्थाओं को सुगम बनाने के लिए जिला प्रशासन द्वारा स्थानीय ग्रामीणों के साथ एक बैठक की गई है। उन्होंने कहा कि ग्रामीणों को इन जगहों पर नाश्ते की दुकान लगाने के साथ-साथ यहां पहुंचने वाले सैलानियों की सुरक्षा की जिम्मेवारी दी गई है। उन्होंने कहा कि इससे स्थानीय लोगों को रोजगार के अवसर के साथ-साथ सुरक्षा भी सुनिश्चित की गई है। शराब सेवन पर रोक और गंदगी फैलाने वालों पर जुर्माना की मांग हालांकि बढ़ती लोकप्रियता के साथ कुछ चिंताएं भी सामने आ रही हैं। स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि झरने के आसपास पर्याप्त सुरक्षा व्यवस्था नहीं होने के कारण दुर्घटनाओं का खतरा बना रहता है। फिसलन भरे पत्थर और गहरे कुंड अनजान पर्यटकों के लिए जोखिम पैदा कर सकते हैं। ऐसे में प्रशासन से यहां सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम करने की मांग की जा रही है। इसके अलावा कुछ असामाजिक तत्वों द्वारा शराब सेवन और कचरा फैलाने की घटनाएं भी देखी जा रही हैं। इससे इस प्राकृतिक स्थल की सुंदरता प्रभावित हो रही है। ग्रामीणों ने मांग की है कि झरना क्षेत्र में शराब सेवन पर सख्ती से रोक लगाई जाए और गंदगी फैलाने वालों पर जुर्माना लगाया जाए। उनका मानना है कि समय रहते कदम नहीं उठाए गए तो यह प्राकृतिक धरोहर अपनी पहचान खो सकती है।
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