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सुणे कहां पाउंजीर रुणू-झुणू स्वरो… भजन पर थिरके ओडिशा व बंगाल के...




भास्कर न्यूज | सरायकेला राति बेसी हेला परे… बड़ो देउलो भीतरे… सुणे कहां पाउंजीर रुणू-झुणू स्वरो… से राधाराणी रो ना देवदासी रो…! जैसे ही इस लोकप्रिय ओड़िया भजन की स्वर लहरियां गोपबंधु चौक में गूंजीं, पूरा वातावरण भक्तिरस में डूब गया। महाप्रभु श्री जगन्नाथ के रथ के समीप आयोजित सांस्कृतिक संध्या में भक्ति और कला का ऐसा संगम देखने को मिला। इसने श्रद्धालुओं को देर रात तक बांधे रखा। रथयात्रा की बीती रात श्री जगन्नाथ सेवा समिति द्वारा आयोजित सांस्कृतिक कार्यक्रम का शुभारंभ शाम सात बजे सरायकेला थाना प्रभारी विनय कुमार ने दीप प्रज्ज्वलित कर किया। कार्यक्रम में ओडिशा के भुवनेश्वर स्थित नूपुरध्वनि डांस एकेडमी, जटनी तथा पश्चिम बंगाल के खड़गपुर स्थित आदि नृत्य कला द डांस एकेडमी के कलाकारों ने अपनी मनमोहक प्रस्तुतियों से दर्शकों का दिल जीत लिया। महाप्रभु श्री जगन्नाथ, राधा-कृष्ण और भारतीय सांस्कृतिक विरासत पर आधारित ओडिसी नृत्य एवं नृत्य-नाटिकाओं ने कार्यक्रम को विशेष ऊंचाई प्रदान की। कलाकार आशीष कुमार पाधी, पार्थ मजूमदार, गुडली देउरी, करीना बाला दास, प्रियंशु प्रियदर्शिनी प्रधान, सम्प्रितिका बिहारी, नम्रता पुष्टि, सोनाली मलिक, मोनालिसा प्रधान, रिषा बेरा और तानिया डे की प्रस्तुतियों पर दर्शकों ने जमकर तालियां बजाईं। कार्यक्रम के दौरान ऐसा प्रतीत हो रहा था मानो रथ पर विराजमान महाप्रभु स्वयं अपने भक्तों के बीच कला और भक्ति के इस महोत्सव का आनंद ले रहे हों। एक के बाद एक प्रस्तुत भजन, नृत्य और नृत्य-नाटिकाओं ने दर्शकों को आध्यात्मिक अनुभूति से भर दिया। इस अवसर पर कलाकारों को राजा प्रताप आदित्य सिंहदेव द्वारा सम्मानित किया गया। कार्यक्रम में सुशांत महापात्र, प्रशांत महापात्र, राजा सिंहदेव सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु एवं संस्कृति प्रेमी उपस्थित थे। भक्ति, संस्कृति और सौंदर्य से सराबोर यह संध्या रथयात्रा महोत्सव की सबसे आकर्षक प्रस्तुतियों में से एक बन गई।



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