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मानसून अभी दूर है, लेकिन अलवर और खैरतल तिजारा जिले के किसान खरीफ सीजन की तैयारी में अभी से जुट गए हैं. गांव-गांव में ट्रैक्टरों की गड़गड़ाहट सुनाई दे रही है और खेतों में जुताई-हंकाई जोरों पर है. कृषि उपकरणों की मांग अचानक बढ़ गई है और वर्कशॉपों में देर रात तक काम हो रहा है. किसानों का एक ही लक्ष्य है- पहली बारिश के साथ ही बुआई शुरू हो जाए.
अलवर : अलवर जिला सहित खैरतल तिजारा जिले में किसानों ने खरीफ सीजन की बुआई की तैयारी में लगे हुए हैं. किसान अपने खेतों को तैयार करने के लिए ट्रैक्टर से खेतों में जुताई करवा रहे हैं. जहां गांवों में सुबह से ही ट्रैक्टरों की गड़गड़ाहट सुनाई देने लगी है, वहीं, किसान खेतों में हंकाई और जुताई कर जमीन को तैयार करने में जुट गए हैं
खैरथल तिजारा जिले के कोटकासिम, तिजारा, खैरथल और किशनगढ़ बास सहित विभिन्न गांव में किसान खरीफ सीजन की बुआई के लिए किसानों में समय से पहले तैयारी को लेकर विशेष उत्साह दिखाई दे रहा है, जिससे कृषि गतिविधियां गांव-गांव में तेज हो गई है. किसान खेतों को समतल करने, खरपतवार हटाने और मिट्टी को भुरभुरी बनाने का कार्य कर रहे हैं, ताकि पहली बारिश होते ही बुवाई का काम बिना देरी शुरू किया जा सके. कई किसान ट्रैक्टरों से गहरी जुताई करवा रहे हैं, जिससे मिट्टी की उर्वरता बढ़े और फसल उत्पादन बेहतर हो सके.
खेतों में तैयारी तेज, औजारों की मांग बढ़ी
फसलों की बुवाई से पहले किसान अपने खेत में उपयोग होने वाले कृषि उपकरण की खरीदारी और ट्रैक्टर को सही करने के काम में लगे हुए हैं. सीजन से पहले वर्कशॉपों में सुबह से देर रात तक कारीगर कृषि उपकरणों की मरम्मत और निर्माण में जुटे हुए हैं. किसान तवी, कल्टी, हल, नेरणी सहित अन्य उपकरणों को दुरुस्त करवाने और खरीदारी करने के लिए किसान की भीड़ लगी हुई है. कृषि उपकरण व्यापारी केदार, सैकुल खान ने बताया कि इन दिनों हंकाई और जुताई से जुड़े औजारों की मांग अचानक बढ़ गई है.
मानसून से पहले किसान जुटे तैयारियों में
किसान पुराने उपकरणों की मरम्मत के साथ नए औजार भी तैयार करवा रहे हैं. वहीं इस समय खेत की जुताई के लिए काम आने वाले हल की ज्यादा ग्रामीण इलाकों में किसान परिवार सहित खेतों में जुटे हुए हैं. कृषि जानकारों के अनुसार समय पर हंकाई और जुताई करने से मिट्टी की संरचना बेहतर होती है, नमी बनी रहती है और खरपतवार नियंत्रण में मदद मिलती है, जिससे फसल उत्पादन में वृद्धि की संभावना बढ़ जाती है. मौसम में बदलाव और तेज हवाओं के बीच किसान जल्द से जल्द अपनी तैयारियां पूरी करने में लगे हैं. लगे हैं, ताकि मानसून की पहली बारिश के साथ ही खरीफ फसलों की बुवाई शुरू की जा सके.
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