भारतन्यूज़ – टॉप हेडर
News Menu Bar

मानस के जीवन सूत्रों को जन-जन तक पहुंचाना जरूरी : विनोद



भास्कर न्यूज | गढ़वा सृजन साहित्यिक मंच गढ़वा की ओर से तुलसी जयंती के मौके पर ज्ञान निकेतन स्कूल में विचार गोष्ठी सह काव्य पाठ का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की शुरुआत संत तुलसीदास के चित्र पर दीप प्रज्ज्वलित व पुष्प अर्पित कर की गई। गोष्ठी का विषय “आज के समय में तुलसीकृत रामचरितमानस की प्रासंगिकता” रखा गया था। विषय प्रवेश कराते हुए मंच के सचिव सतीश कुमार मिश्र ने कहा कि संत तुलसीदास रचित रामचरितमानस एक कालजयी महाग्रंथ है, जिसकी प्रासंगिकता रचनाकाल की तरह आज भी बनी हुई है। उन्होंने कहा कि विशेषकर टूटती भारतीय परिवार व्यवस्था को बचाने और नई पीढ़ी को संस्कार एवं दिशा देने के लिए मानस में अनेक जीवन सूत्र मौजूद हैं। मंच के अध्यक्ष विनोद पाठक ने कहा कि आज बड़े-बड़े आयोजनों में मानस कथा हो रही है और टीवी व सोशल मीडिया पर भी रामकथा का व्यापक प्रसारण हो रहा है, बावजूद इसके समाज में पारिवारिक अशांति बढ़ रही है। संयुक्त परिवार से एकल परिवार की ओर बढ़ने के बावजूद लोगों को वास्तविक सुख-शांति नहीं मिल पा रही है। ऐसे में मानस के जीवन सूत्रों को जन-जन तक पहुंचाना जरूरी है। अधिवक्ता राकेश त्रिपाठी ने कहा कि कभी विद्यालयों से लेकर गांव की चौपालों तक रामचरितमानस की चौपाइयों का गायन सुनाई देता था। आज उसके लोप का असर समाज पर दिखाई दे रहा है। मंच के संरक्षक रासबिहारी तिवारी ने कहा कि पहले खेतों में काम करने वाले लोग भी मानस की पंक्तियां गाते थे और पारिवारिक विवादों का समाधान रामचरितमानस के पात्रों एवं प्रसंगों का उदाहरण देकर किया जाता था। शिक्षक डॉ. आशीष अविरल चतुर्वेदी ने मानस की चौपाइयों का गायन करते हुए प्रभु राम और उनके भाइयों सहित परिवार के अन्य सदस्यों के चरित्र पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि राम के आदर्श परिवार से प्रेरणा लेकर आज की पारिवारिक समस्याओं का समाधान तलाशा जा सकता है। अधिवक्ता राकेश शुक्ला ने रामचरितमानस के विभिन्न प्रसंगों का उल्लेख करते हुए प्रभु राम के जीवन से सीख लेने की बात कही।



Source link

Leave a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Scroll to Top