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CJI Surykant on CJP Protest: दिल्ली के जंतर मंतर और बिहार में पुलिस कार्रवाई पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई. वकील ने पुलिस पर कार्रवाई की मांग की और इस पर सीजेआई सूर्यकांत ने कहा कि इससे जांच समिति के दायरे पर असर पड़ सकता है.
विरोध प्रदर्शन के दौरान पुलिस कार्रवाई को लेकर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान क्या-क्या हुआ? (फाइल फोटो)
नई दिल्ली: दिल्ली के जंतर मंतर और बिहार में हुए विरोध प्रदर्शन के दौरान पुलिस कार्रवाई को लेकर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान उस वक्त तीखी बहस देखने को मिली जब वकील ने पुलिस को कड़ा संदेश देने और जिम्मेदारी तय करने की मांग की. वकील ने कहा कि महिला प्रदर्शनकारियों के साथ कथित दुर्व्यवहार के मामले में सिर्फ जांच काफी नहीं है बल्कि जिम्मेदार पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई भी जरूरी है. इस पर सीजेआई सूर्यकांत ने कहा कि अगर अदालत सीधे जांच और निर्देश देने लगेगी तो इससे जांच समिति के दायरे पर असर पड़ सकता है.
सुनवाई के दौरान वकील ने कहा कि कुछ पुलिस अधिकारियों से जुड़े ऐसे वीडियो सामने आए हैं, जिनमें प्रदर्शनकारियों के साथ कथित तौर पर आपत्तिजनक व्यवहार दिखाई देता है. उन्होंने कहा कि समिति इन घटनाओं की जांच कर सकती है, लेकिन इससे पुलिस को जरूरी कार्रवाई करने से रोका नहीं जाना चाहिए.
‘पुलिस को कड़ा संदेश देना जरूरी’
वकील गोपाल एस ने अदालत के सामने कहा कि मेरी बस एक ही गुजारिश है. पुलिस को कड़ा संदेश देना जरूरी है. उन्होंने डीसीपी की ओर से दाखिल किए गए जवाब का हवाला देते हुए कहा कि पुलिस ने माना है कि कुछ पुलिसकर्मी सादे कपड़ों में प्रदर्शन स्थल पर मौजूद थे और उनके खिलाफ कार्रवाई की गई है. उन्होंने यह भी कहा कि कई पुलिसकर्मियों ने नाम या पहचान संबंधी टैग नहीं लगाए हुए थे. वकील के मुताबिक, पिछले करीब दो महीने से यह मांग की जा रही है कि पुलिस बताए कि कथित घटनाओं के बाद उसने क्या कार्रवाई की है.
वकील ने कहा कि अगर महिला प्रदर्शनकारियों के साथ कथित तौर पर दुर्व्यवहार और प्रताड़ना हुई है तो इसकी जिम्मेदारी तय होनी चाहिए. उन्होंने अदालत से संबंधित अधिकारियों से कार्रवाई का रिकॉर्ड और सबूत सामने रखने की मांग की.
CJI बोले- जांच समिति का दायरा प्रभावित हो सकता है
वकील की दलीलों पर मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि अदालत को इस मामले में सावधानी से आगे बढ़ना होगा. उन्होंने कहा कि अगर सुप्रीम कोर्ट खुद जांच शुरू कर देता है और लगातार निर्देश देने लगता है तो इससे पहले से बनाई गई समिति के काम और उसके दायरे पर असर पड़ सकता है. सीजेआई ने कहा कि समिति को ही इस मामले को देखने दिया जाना चाहिए. हालांकि अदालत ने यह भी माना कि कुछ ऐसे मुद्दे हैं जिन पर तुरंत ध्यान देने की जरूरत हो सकती है. कोर्ट ने संकेत दिया कि अगर वकील तत्काल राहत या अंतरिम व्यवस्था से जुड़े ठोस सुझाव देते हैं तो अदालत उन पर विचार कर सकती है.
‘अगर दोषी मिला तो कार्रवाई होगी’
सॉलिसिटर जनरल ने भी अदालत के सामने जल्दबाजी से कोई कार्रवाई करने के खिलाफ दलील दी. उन्होंने कहा कि अगर जांच समिति किसी अधिकारी को दोषी पाती है तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी. उन्होंने अदालत से कहा कि जांच पूरी होने से पहले किसी व्यक्ति के खिलाफ मनमाने तरीके से कार्रवाई नहीं की जा सकती. उनका तर्क था कि पूरी प्रक्रिया को तथ्यों और जांच के आधार पर आगे बढ़ाया जाना चाहिए. सॉलिसिटर जनरल ने कहा कि अदालत को जल्दबाजी नहीं करनी चाहिए और सनसनी फैलाने की क्या जरूरत है?
पेलेट गन से घायल लोगों के मुआवजे का भी मुद्दा
सुनवाई के दौरान प्रदर्शन के दौरान पेलेट गन से घायल हुए लोगों को अंतरिम मुआवजा देने का मुद्दा भी उठाया गया. इस पर सॉलिसिटर जनरल ने कहा कि वह इस पहलू की जांच करेंगे. वहीं, वरिष्ठ अधिवक्ता शादान फरासत ने कुछ पुलिस अधिकारियों से जुड़े कथित वीडियो का हवाला दिया और कहा कि इन घटनाओं की जांच समिति के सामने हो सकती है. उनका कहना था कि समिति की जांच अपनी जगह है, लेकिन अगर किसी पुलिसकर्मी के खिलाफ प्रथम दृष्टया कार्रवाई जरूरी है तो उसे जांच पूरी होने तक टाला नहीं जाना चाहिए.
दिल्ली हाईकोर्ट के संरक्षण आदेश का भी जिक्र
सुनवाई के दौरान दिल्ली हाईकोर्ट की ओर से दिए गए संरक्षण संबंधी आदेश का भी उल्लेख किया गया. इस पर सीजेआई ने स्पष्ट किया कि अदालत पहले ही उस संबंध में आदेश पारित कर चुकी है और वह आदेश जारी रहेगा. सुप्रीम कोर्ट ने अधिकारियों को मामले से जुड़ी सामग्री जांच समिति के सामने पेश करने का निर्देश देने की बात भी कही. इसके अलावा अदालत ने नोडल अधिकारियों की नियुक्ति का भी निर्देश दिया. विरोध प्रदर्शन के आयोजकों की जवाबदेही तय करने से जुड़ी याचिका पर भी अदालत ने कहा कि सभी संबंधित मामलों में नोटिस जारी किए जा रहे हैं और इसमें कोई बाधा नहीं है.
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अरुण बिंजोला वर्तमान में News18 हिंदी में एसोसिएट एडिटर के पद पर काम कर रहे हैं. पत्रकारिता के क्षेत्र में वह करीब 19 वर्षों से काम कर रहे हैं, जिसमें 13 वर्षों से अधिक समय डिजिटल मीडिया में बी…
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