नई दिल्ली. आईपीएल के संस्थापक और पूर्व क्रिकेट प्रशासक ललित मोदी ने एक इंटरव्यू में अंडरवर्ल्ड डॉन दाऊद इब्राहिम से जुड़े एक पुराने फोन कॉल का जिक्र करते हुए बड़ा खुलासा किया. समाचार एजेंसी एएनआई से बातचीत में ललित मोदी ने बताया कि जब उन्हें दाऊद इब्राहिम की ओर से फोन आया था, तब वह बेहद घबरा गए थे और डर के कारण उनकी हालत खराब हो गई थी.
ललित मोदी ने कहा कि उस समय दाऊद इब्राहिम का नाम सुनते ही बड़े-बड़े लोग कांप जाते थे. उन्होंने स्वीकार किया कि जब उन्हें यह जानकारी मिली कि दूसरी तरफ दाऊद इब्राहिम लाइन पर है, तो वह इतने भयभीत हो गए कि उनके मुंह से शब्द तक नहीं निकल रहे थे. उन्होंने इंटरव्यू में कहा, “मैं इतना डर गया था कि मैंने पैंट में ही… कर दिया.”
हालांकि, ललित मोदी ने यह भी स्पष्ट किया कि उनका किसी भी तरह का आपराधिक या अंडरवर्ल्ड से संबंध नहीं रहा. उन्होंने इस घटना को अपने जीवन के सबसे डरावने अनुभवों में से एक बताया. इंटरव्यू के दौरान उन्होंने उस समय के माहौल और अंडरवर्ल्ड के खौफ का भी जिक्र किया. ललित मोदी का यह बयान सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर भी चर्चा तेज हो गई है. क्रिकेट, कारोबार और अंडरवर्ल्ड से जुड़े पुराने दौर की कई घटनाएं एक बार फिर सुर्खियों में आ गई हैं.
ANI से बात करते हुए, ललित मोदी – जो मई 2010 में भारत छोड़ने के बाद से मुख्य रूप से लंदन में रह रहे हैं – ने कई विषयों पर बात की, जिसमें भगोड़े गैंगस्टर दाऊद इब्राहिम से जुड़ी धमकियां भी शामिल थीं. मोदी ने इस बात पर ज़ोर दिया कि उनके कार्यकाल के दौरान फिक्सिंग से जुड़ा कोई विवाद सामने नहीं आया. उन्होंने कहा, “IPL कमिश्नर और चेयरमैन के तौर पर मेरे तीन साल के कार्यकाल में आपने एक भी ऐसी घटना के बारे में नहीं सुना होगा, और न ही मेरे समय में मैच-फिक्सिंग से जुड़ी कोई जांच हुई.”
उन्होंने आरोप लगाया कि दाऊद के नेटवर्क ने उन्हें इसलिए निशाना बनाया क्योंकि उन्होंने इंडियन प्रीमियर लीग (आईपीएल) के शुरुआती सालों में मैच-फिक्सिंग की इजाज़त देने से मना कर दिया था. मोदी ने दावा किया कि मैच में हेरफेर की कोशिशों को नज़रअंदाज़ करने के लिए उन्हें “करोड़ों डॉलर” के ऑफ़र मिले थे, जिन्हें ठुकराने के बाद दाऊद के कथित इशारे पर उन पर तीन बार जानलेवा हमले हुए, जिनसे वे बाल-बाल बच गए.
ललित मोदी ने कहा, “उसने मुझ पर तीन बार हमला करवाया. यह बात खुद दाऊद ने कही थी. तीनों बार वह चूक गया.” उन्होंने आरोप लगाया कि जब मैच को प्रभावित करने के लिए उनसे संपर्क किया गया, तो उनके द्वारा ‘आंखें फेर लेने’ (नज़रअंदाज़ करने) से मना करने पर आपराधिक गिरोह नाराज़ हो गए थे. ललित मोदी के अनुसार, उनके नेतृत्व में IPL के पहले तीन सीज़न ज़्यादातर फिक्सिंग से मुक्त रहे थे; इसी रुख़ के कारण उनका टकराव सट्टेबाज़ी और अंडरवर्ल्ड के ताक़तवर लोगों से हो गया था.
ललित मोदी ने आगे आरोप लगाया कि यह टकराव 2009 के सीज़न के दौरान और बढ़ गया, जब उन्होंने भारत के आम चुनावों के कार्यक्रम के कारण सुरक्षा चिंताओं को देखते हुए IPL को सफलतापूर्वक दक्षिण अफ्रीका में ट्रांसफर कर दिया था. उन्होंने दावा किया कि सट्टेबाज़ी के गिरोहों ने इस धारणा पर भारी दांव लगाए थे कि टूर्नामेंट भारत में ही होगा. जब यह आयोजन सफलतापूर्वक संपन्न हो गया, तो जिन लोगों को पैसे का नुकसान होने वाला था, वे कथित तौर पर उनके खिलाफ़ हो गए.
IPL के पूर्व प्रमुख ने कहा कि क़ानून प्रवर्तन एजेंसियों को इन धमकियों के बारे में जानकारी थी. उनके अनुसार, मुंबई पुलिस ने इस मामले से जुड़ी बातचीत को रिकॉर्ड किया था और बाद में उन्हें Z-श्रेणी की सुरक्षा प्रदान की थी. मोदी ने यह भी आरोप लगाया कि उनके मुंबई स्थित आवास के बाहर गोलीबारी हुई थी, और अधिकारियों ने दक्षिण अफ्रीका तथा मोंटेनेग्रो में उन्हें निशाना बनाने की अलग-अलग साज़िशों का भी पर्दाफ़ाश किया था.