नई दिल्ली. विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने गुरुवार को भरोसा जताया कि नई दिल्ली में चल रही ब्रिक्स विदेश मंत्रियों की बैठक में हुई चर्चाएं दुनिया को ज्यादा स्थिर, न्यायसंगत और सबको साथ लेकर चलने वाली व्यवस्था बनाने में मदद करेंगी. नई दिल्ली में आयोजित ब्रिक्स विदेश मंत्रियों की बैठक में पहुंचे विदेशी प्रतिनिधियों का स्वागत करते हुए जयशंकर ने कहा कि यह बैठक ऐसे समय में हो रही है, जब दुनिया लगातार ज्यादा जटिल और अनिश्चित होती जा रही है. इसका सबसे ज्यादा असर उभरती अर्थव्यवस्थाओं और विकासशील देशों पर पड़ रहा है.
उन्होंने ऊर्जा, खाद्य, उर्वरक और स्वास्थ्य सुरक्षा जैसी चुनौतियों से निपटने के लिए ज्यादा प्रभावी कदम उठाने की जरूरत पर जोर दिया. उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय जलमार्गों में सुरक्षित और बिना रुकावट समुद्री आवाजाही बेहद जरूरी है, क्योंकि इससे वैश्विक अर्थव्यवस्था जुड़ी हुई है जयशंकर ने भरोसेमंद सप्लाई चेन और विविध बाजारों की जरूरत पर भी जोर दिया, ताकि आर्थिक मजबूती बनी रहे. उन्होंने कहा कि अच्छी शासन व्यवस्था और सबको साथ लेकर विकास के लिए तकनीक का सही इस्तेमाल जरूरी है. साथ ही, भरोसे, पारदर्शिता और तकनीक तक बराबर पहुंच से जुड़े मुद्दों पर भी ध्यान देना होगा.
विदेश मंत्री ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय शांति और सुरक्षा से जुड़ी चुनौतियों का समाधान बातचीत, कूटनीति और आतंकवाद के खिलाफ मजबूत सहयोग से निकाला जाना चाहिए. उन्होंने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में स्थायी और अस्थायी दोनों श्रेणियों में सुधार की जरूरत पर भी जोर दिया. जयशंकर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर लिखा, “भारत की ब्रिक्स अध्यक्षता का फोकस मजबूती, नवाचार, सहयोग और टिकाऊ विकास पर है. हमें भरोसा है कि ब्रिक्स इंडिया 2026 की चर्चाएं दुनिया को ज्यादा स्थिर, न्यायपूर्ण और समावेशी बनाने में मदद करेंगी.”
ब्रिक्स विदेश मंत्रियों की दो दिवसीय बैठक गुरुवार को नई दिल्ली में भारत की अध्यक्षता में शुरू हुई. इस अहम बैठक की अध्यक्षता जयशंकर कर रहे हैं, जिसमें ब्रिक्स सदस्य देशों और साझेदार देशों के विदेश मंत्री और वरिष्ठ प्रतिनिधि हिस्सा ले रहे हैं. यह बैठक भारत की ब्रिक्स अध्यक्षता के तहत पहला बड़ा मंत्रीस्तरीय कार्यक्रम है और माना जा रहा है कि इससे इस साल होने वाले ब्रिक्स नेताओं के शिखर सम्मेलन का एजेंडा तय करने में अहम भूमिका निभेगी.
भारत 2026 में ब्रिक्स की अध्यक्षता कर रहा है. इसकी थीम है “बिल्डिंग फॉर रेजिलिएंस, इनोवेशन, को-ऑपरेशन एंड सस्टेनेबिलिटी” यानी मजबूती, नवाचार, सहयोग और टिकाऊ विकास के लिए काम करना. यह सोच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से 2025 में रियो डी जेनेरियो में हुए 17वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में दिए गए ‘लोगों को केंद्र में रखने और मानवता पहले’ के दृष्टिकोण पर आधारित है.
विदेश मंत्री एस जयशंकर ने कहा कि हमारी चार प्राथमिकताएं – लचीलापन, नवाचार, सहयोग और सतत विकास – साझेदार देशों सहित सहभागिता के लिए एक व्यावहारिक ढांचा प्रदान करती हैं.
पहला: लचीलापन…
हम आपूर्ति श्रृंखलाओं को मजबूत करने, बाजारों में विविधता लाने, प्रारंभिक चेतावनी प्रणालियों को बेहतर बनाने और जलवायु-लचीला बुनियादी ढांचा तैयार करने पर कार्य कर रहे हैं. सामाजिक कल्याण के लिए डिजिटल एकीकरण जैसी पहलें लोगों के कल्याण पर हमारे विशेष ध्यान को दर्शाती हैं.
दूसरा: नवाचार…
BRICS इनक्यूबेटर नेटवर्क, साइंस एंड रिसर्च रिपॉजिटरी और यूथ स्टार्टअप प्लेटफॉर्म जैसी पहलें नवाचार के पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत करने और अवसरों का विस्तार करने का उद्देश्य रखती हैं.
तीसरा: सहयोग…
BRICS MSME कनेक्ट पोर्टल, ट्रेड रिसीवेबल्स डिस्काउंटिंग सिस्टम तथा कृषि और स्वास्थ्य क्षेत्रों में साझेदारियां ठोस परिणाम प्रदान करेंगी.
चौथा: सतत विकास…
हमारा ध्यान जलवायु कार्रवाई, स्वच्छ ऊर्जा और सतत विकास के मार्गों पर केंद्रित है.
विदेश मंत्री ने कहा, “दुनिया बदल चुकी है. और BRICS को भी आगे बढ़ना होगा. केवल चर्चा का मंच बनने से आगे बढ़कर परिणाम देने वाला मंच बनना होगा. हमारी प्रासंगिकता केवल इरादों से नहीं, बल्कि परिणामों से तय होगी. जितना अधिक हम अपने समाजों और उनकी आकांक्षाओं से जुड़ेंगे, BRICS का महत्व उतना ही बढ़ेगा. भारत अंतरराष्ट्रीय समझ, एकजुटता, खुलेपन, समावेशिता, पूर्ण परामर्श और सहमति के सिद्धांतों के अनुरूप BRICS को मजबूत करने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराता है.”