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केंद्र सरकार यूपी, बिहार और पश्चिम बंगाल समेत कई राज्यों में आबादी में बदलाव यानी डेमोग्राफिक चेंज की जांच कराने जा रही है. लेकिन यह जांच कैसे होती है और सरकार क्या क्या देखती है. कैसे पकड़ती है कि फलां इलाके में हिन्दुओं की आबादी कम हो गई या बढ़ गई. दूसरे धर्म के लोग ज्यादा आ गए.
डेमोग्राफी चेंज की जांच कराने जा रही सरकार.
यूपी,बिहार, बंगाल, राजस्थान और असम समेत कई राज्यों में बॉर्डर इलाकों में आबादी का पैटर्न चेंज हो रहा है. इसकी भनक सरकार को लग चुकी है, इसीलिए सरकार इस बदलते पैटर्न की जांच कराने जा रही है. गृह मंत्रालय की हाई लेवल कमेटी जल्द ही पश्चिम बंगाल, असम, बिहार, उत्तर प्रदेश, राजस्थान समेत सीमावर्ती राज्यों के जिलों, बड़े शहरों और इंडस्ट्रिलय इलाकों में जाएगी. वहां अफसरों से बात करेगी. लोगों से मिलकर सवाल जवाब करेगी. समझने की कोशिश करेगी कि 2011 की जनगणना के बाद किन इलाकों में आबादी का पैटर्न कैसे बदला और उसके पीछे क्या वजहें रहीं.
रिटायर्ड सुप्रीम कोर्ट जज प्रकाश प्रभाकर नाओलेकर की अगुवाई वाली यह कमेटी घुसपैठियों और अन्य वजहों से आबादी में हुए बदलाव पर डिटेल रिपोर्ट बनाकर सरकार को देगी. गृह मंत्री अमित शाह ने समिति से जल्द रिपोर्ट देने को कहा है, ताकि इस पर एक्शन लिया जा सके. यह कमेटी सिर्फ कारण नहीं तलाशेगी, बल्कि क्या कार्रवाई की जानी चाहिए, कैसे इसे ठीक किया जा सकता है, उसकी पॉलिसी भी बताएगी. मगर सवाल ये कि आखिर डेमोग्राफिक चेंज पकड़ा कैसे जाएगा?
क्या-क्या चेक करेगी सरकार?
- सरकार सबसे पहले यह देखेगी कि किसी जिले, शहर या राज्य की जनसंख्या 2011 जनगणना के वक्त कितनी थी, और अब उसमें कितना बदलाव आया है. यानी कितनी घटी है या बढ़ी है. अगर किसी इलाके की आबादी सामान्य औसत से ज्यादा तेजी से बढ़ी है, तो उसके कारणों की जांच होगी. देखा जाएगा कि इसके पीछे ज्यादा बच्चों का जन्म, रोजगार, रोजगार, शहरीकरण, शिक्षा, इंडस्ट्री या घुसपैठिये तो नहीं हैं.
- सरकार आबादी की ग्रोथ रेट भी देखेगी. मान लीजिए अगर किसी राज्य की औसत जनसंख्या वृद्धि दर 12 फीसदी है, लेकिन पड़ोस वाले जिले में यह 30 फीसदी है, तो चौंकाता है. सरकार समझने की कोशिश करेगी कि ऐसा क्यों हुआ. क्या वहां कोई कंपनी लगी, जिससे ज्यादा लोग आए. दूसरे राज्यों के लोग बड़ी संख्या में आए तो वजह क्या रही? अगर सामान्य कारणों से जवाब नहीं मिलता, तो जांच की जाती है.
- किसी क्षेत्र की आबादी तभी अचानक बदलती है, या तो उस इलाके में बच्चों का जन्म अन्य जगहों के मुकाबले ज्यादा हुआ हो, या फिर मौत ज्यादा हुई हो. सरकार देखेगी कि वहां जन्म दर कितनी है और मृत्यु दर कितनी है. अगर जन्म अधिक और मृत्यु कम है, तो आबादी का बढ़ना सामान्य माना जाता है. लेकिन यदि आबादी में वृद्धि इन दोनों आंकड़ों से मेल नहीं खाती, तो चिंता की बात है.
- माइग्रेशन यानी अचानक एक जगह पर बहुत सारे लोगों का आ जाना, इसकी भी जांच होगी. यह देखा जाएगा कि देश के अंदर के लोग ही आए हैं या कहीं बाहर से लोग घुसपैठ करके आ गए हैं. क्या इसकी वजह एजुकेशन है, रोजगार या फिर कोई और वजह.
- सरकार उन इलाकों में रहने वालों की उम्र भी देखेगी. चेक किया जाएगा कि उस क्षेत्र में बच्चों, युवाओं, कामकाजी उम्र के लोगों और बुजुर्गों का अनुपात क्या है. अगर किसी इलाके में युवाओं की आबादी तेजी से बढ़ रही है, तो वहां भविष्य में रोजगार, शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाओं की मांग भी बढ़ेगी. वहीं बुजुर्ग आबादी बढ़ने पर स्वास्थ्य सेवाओं और सामाजिक सुरक्षा की जरूरत बढ़ जाती है.
- सबसे बड़ी वजह धार्मिक बदलाव… सरकार देखेगी कि 2011 में उस इलाके में किस धर्म या समुदाय के लोगों की संख्या कितनी थी, और उसमें कितना बदलाव अब हुआ है. कितनी बढ़ी है या फिर घटी है. जैसे मान लीजिए कि उस वक्त किसी जगह पर 10 लाख हिन्दू थे, और 2 लाख अन्य धर्म के लोग, तो ऐसा तो नहीं कि 2 लाख वाले 5 लाख हो गए और हिन्दू सिर्फ 10 से 11 लाख हुआ.अगर बदलाव दिखेगा तो इसकी वजह तलाशी जाएगी.
- जनसंख्या में बदलाव का असर सरकारी व्यवस्थाओं पर भी पड़ता है. यदि किसी इलाके में आबादी तेजी से बढ़ती है तो स्कूल, अस्पताल, सड़क, बिजली, पानी, राशन, पुलिस और आवास जैसी सेवाओं पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है. इसलिए डेमोग्राफिक स्टडी में यह भी देखा जाएगा कि ज्यादा लोग होने की वजह से कहीं अफसरों पर ज्यादा दबाव तो नहीं. बजट कम तो नहीं आ रहा है.
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<strong>Gyanendra Kumar Mishra</strong> is a senior journalist with nearly <strong>20 years of experience</strong> in the media industry. He is currently associated with <strong>News18 Hindi </strong>(hindi.new…और पढ़ें