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रांची सदर अस्पताल में बोन मैरो ट्रांसप्लांट होगा:ब्लड कैंसर, थैलेसीमिया व सिकल...




थैलेसीमिया, सिकल सेल एनीमिया, ल्यूकेमिया (ब्लड कैंसर), लिम्फोमा समेत गंभीर रक्त रोगों के मरीजों को अब इलाज के लिए दिल्ली, मुंबई, वेल्लोर, कोलकाता या हैदराबाद नहीं जाना पड़ेगा। राज्य सरकार ने रांची के सदर अस्पताल में बोन मैरो स्टेम सेल ट्रांसप्लांट (बीएमटी) यूनिट स्थापित करने का फैसला किया है। इसके लिए 13.45 करोड़ की स्वीकृति दी गई है। इससे पहले 6.71 करोड़ मंजूर हुए थे, पर राशि कम होने के कारण एजेंसी ने काम करने से इनकार कर दिया था। इसके बाद जिला स्वास्थ्य समिति ने परियोजना की वास्तविक लागत का प्रस्ताव भेजा, जिसे वित्तीय वर्ष 2026-27 की राज्य योजना के तहत मंजूरी मिल गई। स्वास्थ्य विभाग के अनुसार राज्य में रक्त संबंधी गंभीर बीमारियों के मरीज बढ़ रहे हैं। अभी तक बीएमटी सुविधा नहीं होने से मरीजों को दूसरे राज्यों में इलाज कराना पड़ता है, जहां लाखों रुपए खर्च होते हैं और समय पर उपचार भी नहीं मिल पाता। वो सबकुछ जो आपके लिए जानना जरूरी है, हेमेटोलॉजी यूनिट में 20% को बोन मैरो ट्रांसप्लांट की जरूरत क्लिनिकल हेमेटोलॉजी यूनिट में हर साल एक्यूट ल्यूकेमिया व लिम्फोमा से पीड़ित करीब 100 से 150 बच्चों का इलाज होता है। वहीं थैलेसीमिया के 150 से 200 नए मरीज हर वर्ष पंजीकृत होते हैं। इनमें 50 से 60% बच्चों का नियमित उपचार किया जाता है, जबकि 15 से 20% मरीजों को बोन मैरो स्टेम सेल ट्रांसप्लांट की जरूरत पड़ती है। यूनिट शुरू होने के बाद ऐसे मरीजों का इलाज होगा। बोन मैरो ट्रांसप्लांट के लिए सदर अस्पताल के हेमेटोलॉजी विभाग में विशेषज्ञ चिकित्सकों, प्रशिक्षित नर्सिंग स्टाफ, ट्रांसप्लांट कोऑर्डिनेटर और अत्याधुनिक प्रयोगशाला सुविधाओं की व्यवस्था की जाएगी। जानिए…13.45 करोड़ रुपए से क्या-क्या सुविधाएं मिलेंगी 4 करोड़ से बोन मैरो ट्रांसप्लांट क्लीनिकल सुविधा विकसित होगी। इसमें क्लीन रूम, एचईपीए फिल्ट्रेशन, पॉजिटिव प्रेशर आइसोलेशन रूम, मेडिकल गैस पाइपलाइन, मॉड्यूलर स्टरल पार्टिशन शामिल हैं
7 करोड़ रुपए अत्याधुनिक मेडिकल उपकरण, सेल प्रोसेसिंग लैब, ट्रांसप्लांट मशीनों और अन्य क्लीनिकल सिस्टम की खरीद व स्थापना पर खर्च होंगे। 1 करोड़ शुरुआती उपभोग्य सामग्री, रिएजेंट, सेल प्रोसेसिंग किट, संक्रमण नियंत्रण सामग्री और लैब कंज्यूमेबल्स पर खर्च किए जाएंगे। 1 करोड़ रुपए पांच वर्षों तक उपकरणों के रखरखाव (सीएमसी) पर खर्च होंगे। आयुष्मान योजना से होगा इलाज यूनिट शुरू होने के बाद मरीजों के इलाज का खर्च आयुष्मान भारत मुख्यमंत्री जन आरोग्य योजना के तहत उपलब्ध राशि से वहन किया जाएगा। भवन निर्माण, मशीनों की खरीद और अन्य आधारभूत संरचना पर होने वाला खर्च राज्य योजना की स्वीकृत राशि से किया जाएगा। भवन निर्माण विभाग बनाएगा यूनिट, जेम से उपकरण खरीदारी संकल्प के अनुसार यूनिट के भवन और आधारभूत संरचना का निर्माण भवन निर्माण विभाग कराएगा। मेडिकल उपकरणों और मशीनों की खरीद गवर्नमेंट ई-मार्केटप्लेस (जेम) के माध्यम से होगी। उपकरणों की गुणवत्ता, रखरखाव और उपयोग की नियमित निगरानी भी सुनिश्चित की जाएगी।



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