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राजकीय उच्च नृत्य कला केंद्र में मनाया गया कुंवर विजय प्रताप का...




भास्कर न्यूज | सरायकेला सरायकेला छऊ शैली के जनक एवं विश्वप्रसिद्ध छऊ नृत्य को नई पहचान दिलाने वाले कुंवर विजय प्रताप सिंहदेव की 130वीं जन्म जयंती बुधवार को “विजय जयंती उत्सव” के रूप में राजकीय छऊ नृत्य कला केंद्र, सरायकेला में धूमधाम और श्रद्धापूर्वक मनाई गई। कार्यक्रम में छऊ कला से जुड़े कलाकारों, गुरुओं, कला प्रेमियों एवं गणमान्य लोगों ने भाग लेकर कुंवर साहब को श्रद्धांजलि अर्पित की। कार्यक्रम की शुरुआत कला केंद्र परिसर में स्थापित कुंवर विजय प्रताप सिंहदेव की आदमकद प्रतिमा पर अनुमंडल पदाधिकारी सह राजकीय छऊ नृत्य कला केंद्र के सचिव अभिनव प्रकाश, छऊ गुरुओं एवं कलाकारों द्वारा माल्यार्पण से हुई। इस अवसर पर अनुमंडल पदाधिकारी अभिनव प्रकाश ने कहा कि सरायकेला जैसे छोटे नगर में कुंवर विजय प्रताप सिंहदेव जैसे महान व्यक्तित्व का जन्म होना गौरव की बात है। उन्होंने अपनी दूरदर्शी कला अवधारणा से पारंपरिक छऊ नृत्य को शास्त्रीय तत्वों से जोड़ते हुए पौराणिक, दार्शनिक तथा प्रकृति आधारित अनेक कालजयी नृत्यों को स्वरूप प्रदान किया। आज सरायकेला छऊ को विश्व स्तर पर अमूर्त शास्त्रीय कला के रूप में पहचान प्राप्त है। उन्होंने कहा कि राजकीय छऊ नृत्य कला केंद्र इस अमूल्य सांस्कृतिक धरोहर के संरक्षण और संवर्धन के लिए निरंतर कार्य करता रहेगा। पद्मश्री शशधर आचार्य ने कहा कि ऐसे महापुरुषों का सम्मान ही कला का सम्मान है और सामूहिक प्रयासों से ही इस अमूल्य विरासत को आने वाली पीढ़ियों तक सुरक्षित पहुंचाया जा सकता है। आर्टिस्ट एसोसिएशन के अध्यक्ष भोला महांति ने कहा कि युवाओं को छऊ कला से जोड़ना ही कुंवर साहब के प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होगी। वहीं कला केंद्र के समन्वयक सुदीप कवि ने कहा कि कलाकारों के उत्थान के माध्यम से ही सरायकेला छऊ को लेकर कुंवर साहब के सपनों को साकार किया जा सकता है। शाम को कला केंद्र प्रेक्षागृह में सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन किया गया, जिसमें राधा-कृष्ण, नाविक, हंस सहित कई आकर्षक छऊ नृत्यों की प्रस्तुति दी गई। कार्यक्रम में संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार प्राप्त गुरु ब्रजेन्द्र पटनायक, गुरु शुशांत महापात्र, गुरु सुधांशु शेखर पानी, गुरु बिजय साहू, गुरु तरुण भोल, गुरु रजत पटनायक, गुरु मनोरंजन साहू, गुरु आशीष कर, संतोष कर, गजेंद्र महंती, अबिनाश कबी, रुपेश साहू, गणेश महंती, अद्यापदों साहू, बाउरी बंधु महतो, सीधेश्वर दरोघा, ठाकुर सरदार, पूर्ण सरदार, विनोद प्रधान, गणेश परीछा, पंकज साहू, सुमित महापात्र, निवारण महतो, देवनारायण सिंहदेव, शिवनाथ मिश्रा, राकेश कबी, राजेश गोप सहित बड़ी संख्या में कलाकार एवं कला प्रेमी उपस्थित थे।



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