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रांची सहित झारखंड के नगर निकायों और ग्रामीण क्षेत्रों में यदि कोई व्यक्ति अपनी निजी जमीन सार्वजनिक उपयोग के लिए सरकार को दान करता है, तो उस पर अब स्टांप फीस नहीं लगेगी। नगर निगम क्षेत्रों में नक्शा पास कराने वाले बिल्डरों को सड़क चौड़ीकरण के लिए जमीन दान करने पर पहले स्टांप शुल्क देना पड़ता था। अब सरकार ने उन्हें बड़ी राहत दी है। अब बिल्डरों को सड़क चौड़ीकरण के लिए जमीन दान करने पर स्टांप फीस नहीं देने होंगे। मतलब जमीन के वैल्यू के आधार पर लगने वाले 4 प्रतिशत स्टांप फीस से बिल्डरों को छूट मिल गई है। अब रजिस्ट्री के लिए केवल 3 प्रतिशत कोर्ट फीस ही देनी होगी। राजस्व, निबंधन एवं भूमि सुधार विभाग ने इससे संबंधित अधिसूचना जारी कर दी है। यह छूट भारतीय मुद्रांक अधिनियम 1899 के तहत दी गई है। अधिसूचना के अनुसार, किसी भी भू-स्वामी द्वारा अपनी निजी भूमि का दान झारखंड सरकार के सार्वजनिक उपक्रमों हेतु अथवा झारखंड सरकार के विभिन्न प्रयोजन के लिए जैसे नागरिक सुविधा की बढ़ोतरी के लिए, शहरी विकास के लिए, ग्रामीण विकास के लिए, सड़क, पार्क, पुस्तकालय आदि के लिए दानपत्र के माध्यम से किया जा रहा है तो ऐसे भू-हस्तांतरण से संबंधित दस्तावेज में स्टांप फीस नहीं लगेगा। पुनर्वास-पुनर्स्थापन नीति के तहत झारखंड सरकार द्वारा चिह्नित एवं अधिसूचित भूमि से संबंधित दस्तावेज में भी स्टांप फीस नहीं लगेगा। फायर सेफ्टी और रेन वाटर हार्वेस्टिंग की भी होगी जांच रांची नगर निगम की टीम शहर में भवनों की जांच के दौरान फायर सेफ्टी और पर्यावरण से जुड़े नियमों की भी पड़ताल करेगी। जिन भवनों का नक्शा पास करते समय फायर सेफ्टी सिस्टम का प्रावधान किया गया था, लेकिन वहां यह सिस्टम नहीं लगाया गया है, ऐसे भवन मालिकों पर कार्रवाई की जाएगी। निगम की टीम ऐसे भवनों की जांच कर स्थिति का सत्यापन करेगी। इसके अलावा 300 वर्गमीटर प्लॉट पर करीब 3200 वर्गफीट क्षेत्रफल में बने भवनों में रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम है या नहीं, इसकी भी जांच होगी। जहां यह सिस्टम बना है लेकिन काम नहीं कर रहा है, वहां भी कार्रवाई की जाएगी। नगर निगम ने अधिकारियों को निर्देश दिया है कि सभी नियमों का सख्ती से पालन कराया जाए और लापरवाही पर तुरंत कदम उठाए जाएं। पांच से 50 हजार रु. तक की होगी बचत भवन का नक्शा पास कराने के लिए मास्टर प्लान के अनुसार जितनी चौड़ी सड़क है, उतनी जमीन छोड़नी पड़ती है। मान लिया जाए कि यदि मास्टर प्लान में सड़क की चौड़ाई 25 फीट है और मौके पर 15 फीट सड़क है, तो ऐसे में नक्शा पास कराने के लिए एक ओर करीब 5 फीट जमीन नगर निगम को दान करनी पड़ती है। इसके बाद इस जमीन की रजिस्ट्री भी करानी होती है। अब तक इस प्रक्रिया में जमीन के कुल मूल्य का 4 प्रतिशत स्टांप फीस देना पड़ता था। उदाहरण के तौर पर, यदि एक डिसमील जमीन की कीमत 10 लाख रुपए है, तो लगभग 40 हजार रुपए स्टांप शुल्क देना पड़ता था। नई व्यवस्था के तहत अब यह स्टांप फीस नहीं लगेगी, जिससे बिल्डरों और भू-स्वामियों को 5 से 50 हजार रुपए तक की राहत मिलेगी। छोटे भवनों के लिए देना होगा सिर्फ शपथपत्र जी प्लस टू तक के भवनों के नक्शा पास कराने के मामलों में सड़क चौड़ीकरण के लिए दी जाने वाली जमीन की रजिस्ट्री नहीं होती है। जमीन मालिक को दान की जाने वाली जमीन का पूरा विवरण देते हुए नोटरी पब्लिक का शपथ पत्र देना होता है। इसमें किसी तरह का बदलाव नहीं किया गया है। ऐसे जमीन मालिकों को 50 रुपए के स्टांप पर शपथ पत्र देकर जमीन दान करना होगा। इसके अलावा, आदिवासी जमीन के मामले में सड़क चौड़ीकरण के लिए जमीन का हस्तांतरण पूरी तरह निशुल्क रहेगा। सड़क की जमीन से कब्जा हटाएगा निगम, पार्किंग में बनीं दुकानें तोड़ी जाएंगी रांची| रांची नगर निगम एक बार फिर पूरे शहर में भवनों की जांच के लिए व्यापक अभियान चलाएगा। सड़क चौड़ीकरण के लिए दी गई जमीन पर यदि कहीं कब्जा मिला तो उसे तुरंत खाली कराया जाएगा। जिन भवनों में बेसमेंट का नक्शा पास है, लेकिन वहां दुकान या अन्य व्यावसायिक गतिविधि चल रही है, उन्हें हटाया जाएगा। इसके अलावा जिन भवनों में सेटबैक क्षेत्र पर अवैध कब्जा या उसका गलत उपयोग हो रहा है, उन पर भी कार्रवाई की जाएगी। सेटबैक में पार्किंग व्यवस्था नहीं होने पर ऐसे भवनों पर नो पार्किंग का बोर्ड लगाना अनिवार्य किया गया है। नगर आयुक्त सुशांत गौरव ने मंगलवार को टाउन प्लानिंग विभाग के अधिकारियों के साथ बैठक कर शहरभर में भवनों की जांच का निर्देश दिया।
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