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झारखंड की राजनीति में क्रॉस वोटिंग के जिन्न ने एक बार फिर ऐसा खेल दिखाया कि पर्याप्त संख्या बल होने के बावजूद सत्ताधारी महागठबंधन बिखर गया। राज्यसभा की दो सीटों के लिए हुए मुकाबले में बड़े पैमाने पर हुई क्रॉस वोटिंग के चलते महागठबंधन के कांग्रेस कोटे के उम्मीदवार प्रणव झा चुनाव हार गए। उन्हें सिर्फ 21 वोट मिले। इसमें एक अमान्य रहे। वहीं सिर्फ 24 विधायकों के भरोसे बैठी एनडीए ने अपनी अचूक रणनीति के दम पर अपने समर्थित निर्दलीय प्रत्याशी परिमल नाथवानी को 30 वोट दिलाकर जीत दिला दी। हालांकि इनमें दो वोट अमान्य मिले। उधर, झामुमो कोटे के उम्मीदवार बैजनाथ राम 30 वोट लाकर आसानी से चुनाव जीत गए। दोनों प्रत्याशियों को प्रथम वरीयता के आधार पर ही जीत मिल गई। इसलिए दूसरी वरीयता के वोटों की गिनती की जरूरत नहीं पड़ी। चुनाव के लिए गुरुवार सुबह से ही गहमागहमी शुरू हो गई थी। एनडीए और कांग्रेस के विधायक बस से विधानसभा पहुंचे। जबकि झामुमो और अन्य दलों के विधायक अलग-अलग पहुंचे। सुबह नौ बजे वोटिंग शुरू हुई, जो चार बजे तक चली। फिर शाम करीब पांच बजे मतगणना शुरू हुई और करीब 6:35 बजे नतीजे घोषित हुए। इस चुनाव ने न सिर्फ राज्यसभा की दो सीटों का फैसला किया, बल्कि महागठबंधन में एकजुटता की कलई खुल गई। कांग्रेस प्रत्याशी ने हर सहयोगी दलों के शीर्ष नेतृत्व से मुलाकात कर उनका आश्वासन भी लिया था। फिर भी सारी कवायद बेकार हो गई। क्रॉस वोटिंग रोकने को कांग्रेस-राजद ने हैवीवेट को बनाया था एजेंट, रहे विफल कांग्रेस उम्मीदवार प्रणव झा की हार सिर्फ एक व्यक्ति की हार नहीं, बल्कि गठबंधन के भीतर गहरे अविश्वास की कहानी भी बयां करती है। क्रॉस वोटिंग ने साफ कर दिया कि महागठबंधन के भीतर सब कुछ ठीक नहीं है। चुनाव से पहले दावे किए जा रहे थे कि महागठबंधन के पास पर्याप्त संख्या बल है। लेकिन जब बैलेट बॉक्स खुला तो स्थिति उलट थी। यह हाल इसलिए भी गंभीर था कि कांग्रेस पार्टी इस चुनाव को अपनी प्रतिष्ठा की लड़ाई मान रही थी। कांग्रेस ने पार्टी के प्रदेश प्रभारी के. राजू और सह प्रभारी सिरी बेला प्रसाद को पोलिंग एजेंट बनाया था। वहीं राजद ने राष्ट्रीय महामंत्री भोला यादव को पाेलिंग एजेंट बनाया था। फिर भी क्रॉस वोटिंग नहीं रुकी। हार के बाद महागठबंधन के दलों ने एक-दूसरे पर उठाई उंगली महागठबंधन में एकजुटता नहीं : के राजू
झारखंड कांग्रेस के प्रभारी के. राजू ने चुनाव परिणाम को लेकर गठबंधन सहयोगियों पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि राजद और भाकपा माले के कुछ विधायकों ने धोखा दिया। ईमानदारी से गठबंधन एकजुट रहता, तो नतीजा कुछ और आता। के. राजू की भाषा दुखद: राजद
राजद के केंद्रीय महासचिव भोला यादव ने कहा कि राजू की भाषा दुखद है। मैं ही पार्टी का एजेंट था। मेरे सामने चारो विधायकों ने दिखाकर वोट दिया है। बिना किसी जांच के राजू कैसे कह सकते हैं कि राजद ने धोखा दिया है। हमारे नेता कभी सांप्रदायिक ताकतों के साथ हाथ नहीं मिला सकते। दोनों विधायकों ने कांग्रेस को वोट दिया:माले
सीपीआई (एमएल) के महासचिव दीपांकर भट्टाचार्य ने कांग्रेस प्रभारी के. राजू के आरोपों को सिरे से नकार दिया। उन्होंने कहा कि माले के दोनों विधायकों ने कांग्रेस प्रत्याशी को वोट दिया है। क्रॉस वोटिंग की बात पूरी तरह से गलत है। हमने गठबंधन धर्म का पूरी तरह से पालन किया है। प्रणव की हार के कारण 1. गोलबंद नहीं रहा महागठबंधन: महागठबंधन अपने विधायकों को गोलबंद रखने में नाकाम रहा। चुनाव से पहले कोई रिसॉर्ट पॉलिटिक्स या कड़ा पहरा नहीं था, जिसका फायदा एनडीए समर्थित उम्मीदवार ने उठाया।
2. झामुमो का गेम: झामुमो ने अपने उम्मीदवार बैजनाथ राम को सुरक्षित करने के चक्कर में (30 वोट दिलाकर) सहयोगी कांग्रेस के वोट कटने दिए? यह गठबंधन के भीतर अविश्वास की बड़ी कहानी है।
3. अमान्य वोटों का रहस्य: जो 3 वोट अमान्य हुए, वे किसके थे? क्या यह जानबूझकर किया गया। क्या यह स्मार्ट क्रॉस वोटिंग का तरीका था। जिसका इस्तेमाल महागठबंधन के विधायकों ने किया। राजद का दही-चूड़ा व पॉलिटिक्स कहते हैं सफर पर निकलने से पहले दही-चूड़ा खाया जाए, तो यात्रा शुभ होती है। राजद के विधायकों ने वोटिंग की यात्रा दही-चूड़ा खाकर शुरू की। हालांकि, कांग्रेस के लिए सबकुछ शुभ नहीं हुआ। नतीजा कांग्रेस के खिलाफ रहा। उनके प्रत्याशी की हार हुई। जिम्मेवार राजद को भी ठहराया गया। रातभर होटलों में ईमानदारी की दुहाई कांग्रेस प्रत्याशी की हार और आपसी बयानो से गठबंधन तार-तार होने लगा है। रातभर होटलों में महागठबंधन की बैठक होती रही। इसमें गठबंधन के घटक दलों ने ईमानदारी की दुहाई दी। चुनाव परिणाम का असर भास्कर इनसाइट महागठबंधन में लगी सेंध, 6 वोट से बदला समीकरण रहस्यमयी 6 वोट: जो महागठबंधन की हाजिरी में तो थे, पर खाते में नहीं जुड़े छह वोट ने इस चुनावी नतीजे का समीकरण बदल दिया। नाथवानी के पास एनडीए के घोषित 24 वोट थे। जीत के जादुई आंकड़े 28 तक पहुंचने के लिए उन्हें 4 अतिरिक्त बैसाखियों की दरकार थी, लेकिन जब बक्सा खुला तो उनके खाते में उम्मीद से ज्यादा यानी पूरे 30 वोट निकले। यह बात अलग है कि दो वोट अमान्य हो गए। तब भी उन्होंने 28 का आंकड़ा छू दिया। सबसे बड़ा यक्ष प्रश्न यही है कि महागठबंधन के कुनबे से खिसके वे 6 वोट किसके थे? वो कौन से माननीय हैं, जो गठबंधन के पाले में बैठकर भी दिल नाथवानी से लगा बैठे?। शक के दायरे में राजद, भाकपा माले
शक की सुई राजद और भाकपा माले के इर्द-गिर्द घूमती नजर आ रही है। कांग्रेस खेमे में चर्चा है कि राजद के कोटे के चार वोट शायद पूरी तरह कांग्रेस प्रत्याशी प्रणव झा के पक्ष में नहीं गिरे। वहीं, भाकपा माले के दो विधायकों के पूर्ण साथ को लेकर शक है। यह माना जा रहा है कि राजद व भाजपा माले ने पूर्ण साथ नहीं दिया। 2 वोट बैजनाथ को अधिक मिले, क्रॉस वोटिंग नहीं होती, तो भी कांग्रेस नहीं जीतती
81 सदस्यीय विधानसभा में राज्यसभा की एक सीट जीतने के लिए 28 वोटों की जरूरत थी। महागठबंधन के कुल 56 विधायक हैं। इसके आधार पर महागठबंधन के दोनों उम्मीदवार झामुमो के बैजनाथ राम और कांग्रेस के प्रणव झा की जीत सुनिश्चित बताई जा रही थी। लेकिन महागठबंधन को दोनों उम्मीदवार को कुल 53 वोट ही मिले, जिसमें झामुमो उम्मीदवार को जरूरत से 2 अधिक यानी 30 वोट मिले। इससे भी कांग्रेस को मिलने वाले दो वोट की कमी आ गई। महागठबंधन बार-बार दोहरा रहा था कि 28 -28 वोट से दोनों उम्मीदवार की जीत होगी। यदि क्रॉस वोटिंग नहीं भी होती तो भी कांग्रेस का आंकड़ा 26 पर ही पहुंच पाता।
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