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सुनील बताते हैं कि जब वह खेल के मैदान में मेहनत करते थे. तब उन्हें एहसास हुआ कि गांव के कई बच्चे ऐसे हैं जिन्हें सही माहौल और मार्गदर्शन नहीं मिल पाता. कुछ बच्चे गरीबी की वजह से पढ़ाई में पीछे रह जाते हैं तो कुछ को अच्छी तैयारी नहीं मिलती बस यहीं से उन्होंने शिक्षा के लिए काम करने का फैसला लिया. उन्होंने ब्लॉक चमरौआ की ग्राम पंचायत पट्टी कल्याणपुर से शिक्षा पाठशाला की शुरुआत की लेकिन धीरे-धीरे दूसरे गांवों के लोग भी उनसे जुड़ते गए. आज करीब 15 ग्राम पंचायतों में बच्चों को निशुल्क पढ़ाया जाता है और दो से ढाई हजार बच्चे इससे जुड़ चुके हैं इनमें सरकारी और प्राइवेट दोनों स्कूलों के बच्चे शामिल हैं.
रामपुर: जहां आज के समय में ज्यादातर युवा अपने करियर और कमाई तक सीमित रहते हैं, वहीं रामपुर का 26 वर्षीय युवक गांव के हजारों बच्चों की जिंदगी बदलने में जुटा हुआ है. राष्ट्रीय कबड्डी खिलाड़ी के तौर पर पहचान बना चुके सुनील यादव अब खेल के साथ-साथ शिक्षा और ग्रामीण समस्याओं पर भी लगातार काम कर रहे हैं.
सुनील यादव की कहानी किसी फिल्मी किरदार से कम नहीं लगती. दिन में बच्चों को खेल की ट्रेनिंग देना फिर गांव-गांव जाकर लोगों की समस्याएं उठाना और हर रविवार को मुफ्त शिक्षा पाठशाला चलाना अब उनकी जिंदगी का हिस्सा बन चुका है. खास बात यह है कि इस पूरी मुहिम में वह अपनी कमाई का हिस्सा भी बच्चों की पढ़ाई पर खर्च कर देते हैं.
15 ग्राम पंचायतों में चल रही पाठशाला
सुनील बताते हैं कि जब वह खेल के मैदान में मेहनत करते थे. तब उन्हें एहसास हुआ कि गांव के कई बच्चे ऐसे हैं जिन्हें सही माहौल और मार्गदर्शन नहीं मिल पाता. कुछ बच्चे गरीबी की वजह से पढ़ाई में पीछे रह जाते हैं तो कुछ को अच्छी तैयारी नहीं मिलती बस यहीं से उन्होंने शिक्षा के लिए काम करने का फैसला लिया. उन्होंने ब्लॉक चमरौआ की ग्राम पंचायत पट्टी कल्याणपुर से शिक्षा पाठशाला की शुरुआत की लेकिन धीरे-धीरे दूसरे गांवों के लोग भी उनसे जुड़ते गए. आज करीब 15 ग्राम पंचायतों में बच्चों को निशुल्क पढ़ाया जाता है और दो से ढाई हजार बच्चे इससे जुड़ चुके हैं इनमें सरकारी और प्राइवेट दोनों स्कूलों के बच्चे शामिल हैं.
पढ़के युवा कर सकते हैं बदलाव
हर रविवार को गांवों में सुबह दो घंटे और शाम को दो घंटे की क्लास लगती है. यहां बच्चों को सिर्फ किताबों तक सीमित नहीं रखा जाता बल्कि सामान्य ज्ञान प्रतियोगिता, निबंध लेखन और कला प्रतियोगिताएं भी कराई जाती हैं ताकि बच्चों का आत्मविश्वास बढ़ सके. इस मुहिम की सबसे खास बात यह है कि गांव के पढ़े-लिखे बेरोजगार युवा भी इसमें हिस्सा ले रहे हैं. कई ऐसे युवा जिन्होंने ग्रेजुएशन और पोस्ट ग्रेजुएशन किया है अब गांव के बच्चों को पढ़ाने में मदद कर रहे हैं. सुनील कहते हैं कि अगर गांव का पढ़ा-लिखा युवा गांव के बच्चों को पढ़ाएगा तो बदलाव और तेजी से आएगा.
सुनील यादव के साथ लोग करते हैं सहयोग
सुनील यादव अकेले इस काम को नहीं चला रहे उनके साथ कई सरकारी विभागों में नौकरी कर रहे लोग भी जुड़े हुए हैं. जिन्होंने अपनी मेहनत और लगन के दम पर संघर्ष करके नौकरी पाई वो लोग आर्थिक मदद करते हैं तो कुछ बच्चों के लिए पढ़ाई का सामान उपलब्ध कराते हैं. हर रविवार की क्लास से पहले करीब 100 से 150 साथियों को मैसेज भेजा जाता है और उन्हीं के सहयोग से बच्चों के लिए कॉपी, किताब और दूसरी सामग्री जुटाई जाती है. सुनील खुद भी बच्चों की पढ़ाई के लिए अपनी सैलरी का हिस्सा खर्च करते हैं वह बच्चों को खेल की ट्रेनिंग देकर जो कमाई करते हैं उसका कुछ हिस्सा शिक्षा पाठशाला में लगा देते हैं उनका कहना है कि अगर गांव का बच्चा पढ़ाई और खेल दोनों में आगे बढ़ेगा तभी समाज मजबूत बनेगा.
ग्रामीण समस्याओं को लगातार उठाते हैं
शिक्षा के अलावा सुनील यादव ग्रामीण समस्याओं को भी लगातार उठाते रहते हैं. कई बार रक्तदान कर चुके हैं. 15 हजार से अधिक पौधे भी लगा चुके हैं और गांव-गांव साइकिल व पैदल यात्राएं निकालकर लोगों को जागरूक करते रहे हैं. गांव में सड़क, पार्क और दूसरी जरूरी सुविधाओं को लेकर वह कई बार प्रशासन तक लोगों की आवाज पहुंचा चुके हैं सामाजिक मुद्दों पर वह सोशल मीडिया के जरिए भी लगातार सक्रिय रहते हैं हाल ही में उन्होंने खराब सड़क और पुलिया की समस्या को लेकर मुख्यमंत्री को खून से पत्र लिखा था जिसके बाद सड़क निर्माण के लिए प्रस्ताव भी भेजा जा चुका है. इसके अलावा उन्होंने स्वतंत्रता सेनानियों और महापुरुषों की प्रतिमा लगाने जैसे मुद्दों को भी उठाया जिस पर कई जगह काम भी हुआ.
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मैं रजनीश कुमार यादव, 2019 से पत्रकारिता से जुड़ा हूं. तीन वर्ष अमर उजाला में बतौर सिटी रिपोर्टर काम किया. तीन वर्षों से न्यूज18 डिजिटल (लोकल18) से जुड़ा हूं. ढाई वर्षों तक लोकल18 का रिपोर्टर रहा. महाकुंभ 2025 …और पढ़ें