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Rampur news: कोठी खास बाग सिर्फ एक बाग नहीं रामपुर की नवाबी विरासत की ऐसी पहचान है जो आज भी गर्मी के सीजन में जिंदा हो उठती है. करीब 300 एकड़ में फैला यह ऐतिहासिक बाग नवाबों के दौर की कहानी कहता है यहां लगे कई पेड़ दशकों पुराने हैं और आज भी उनकी शाखों पर वही स्वाद झूलता है. जिसे कभी नवाबों के दस्तरखान तक पहुंचाया जाता था. यही वजह है कि कोठी खास बाग के आम सिर्फ रामपुर ही नहीं दूर-दूर के शहरों और विदेश तक पसंद किए जाते हैं.
रामपुरः कोठी खास बाग सिर्फ एक बाग नहीं रामपुर की नवाबी विरासत की ऐसी पहचान है जो आज भी गर्मी के सीजन में जिंदा हो उठती है. करीब 300 एकड़ में फैला यह ऐतिहासिक बाग नवाबों के दौर की कहानी कहता है यहां लगे कई पेड़ दशकों पुराने हैं और आज भी उनकी शाखों पर वही स्वाद झूलता है. जिसे कभी नवाबों के दस्तरखान तक पहुंचाया जाता था. यही वजह है कि कोठी खास बाग के आम सिर्फ रामपुर ही नहीं दूर-दूर के शहरों और विदेश तक पसंद किए जाते हैं.
कोठी खास बाग में पुरानी प्रजातियों के हैं आम
रामपुर के नवाबों को बाग लगाने और अलग-अलग किस्मों के फलों का बेहद शौक था. उन्होंने आलीशान इमारतों के साथ ऐसे बाग बसाए जो सिर्फ शौक नहीं बल्कि शान की पहचान थे. कोठी खास बाग उन्हीं में सबसे खास माना जाता है इस बाग के भीतर आज भी कई पुरानी प्रजातियों के आम के पेड़ मौजूद हैं. लंगड़ा, दशहरी, चौसा, फजरी, कलमी, तोता परी, सुरमेदानी और दूधिया आमन जैसी किस्में यहां खूब मिलती हैं. हर किस्म का स्वाद अलग है और हर पेड़ के साथ एक पुरानी कहानी जुड़ी हुई है.
इस बाग की सबसे दिलचस्प बात यह है कि यहां कुछ ऐसे पेड़ भी हैं. जिनके आम खास तौर पर अचार के लिए ही पहचाने जाते हैं. स्थानीय लोग बताते हैं कि इन पेड़ों का फल ज्यादा रसीला नहीं बल्कि सख्त और खट्टा होता है. जिससे अचार लंबे समय तक टिकता है. खास तौर पर गोला किस्म के पेड़ ऐसे हैं, जिनके आम अचार डालने के लिए सबसे ज्यादा तोड़े जाते हैं. हर सीजन में व्यापारी सीधे बाग पहुंचते हैं और इन्हीं पेड़ों से कच्चे आम खरीदकर ले जाते हैं. यही वजह है कि रामपुर के कई घरों में आज भी नवाबी बागों के आम का अचार पड़ता है.
विदेश तक आम भेजा जाता है
कोठी खास बाग के आम की पहचान सिर्फ स्वाद तक सीमित नहीं है यहां के आमों की मांग दिल्ली, मुंबई, बिहार, पश्चिम बंगाल और इटली तक रहती है व्यापारी सीजन शुरू होते ही यहां पहुंच जाते हैं. बाग से बड़े ट्रकों में आम भरकर बाहर भेजे जाते हैं. ठेकेदार बताते हैं कि चौसा और फजरी सबसे आखिर तक चलते हैं इसलिए करीब ढाई महीने तक तुड़ाई होती रहती है. इस दौरान 40 से 50 मजदूर लगातार पेड़ों से आम तोड़ने, छंटाई और लोडिंग का काम करते हैं. रामपुर की पहचान अगर लंगड़ा आम से है तो उसकी असली खुशबू इन्हीं पुराने बागों में बसती है कोठी खास बाग आज भी नवाबी दौर की विरासत को संभाले हुए है.
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मैं रजनीश कुमार यादव, 2019 से पत्रकारिता से जुड़ा हूं. तीन वर्ष अमर उजाला में बतौर सिटी रिपोर्टर काम किया. तीन वर्षों से न्यूज18 डिजिटल (लोकल18) से जुड़ा हूं. ढाई वर्षों तक लोकल18 का रिपोर्टर रहा. महाकुंभ 2025 …और पढ़ें