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रिम्स के नए निदेशक डॉ. डीके सिन्हा ने पदभार संभालने के बाद अपनी प्राथमिकताओं को स्पष्ट करते हुए कहा कि उनकी पहली प्राथमिकता मरीजों को बेहतर और समय पर इलाज उपलब्ध कराना है। शनिवार को आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में उन्होंने कहा कि अस्पताल की व्यवस्थाओं को चरणबद्ध तरीके से दुरुस्त किया जाएगा, ताकि मरीजों और उनके परिजनों को किसी प्रकार की परेशानी का सामना न करना पड़े। डॉ. सिन्हा ने बताया कि पदभार ग्रहण करने के तुरंत बाद उन्होंने ट्रॉमा सेंटर और सेंट्रल इमरजेंसी का निरीक्षण किया। इसके बाद क्रिटिकल केयर विभाग के प्रमुख समेत संबंधित अधिकारियों के साथ बैठक कर आवश्यक सुधारों के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि मरीजों की सुविधा और अस्पताल की कार्यप्रणाली में सुधार उनकी सर्वोच्च प्राथमिकता है। निदेशक ने कहा कि अस्पताल में सभी आवश्यक दवाओं और कंज्यूमेबल्स की उपलब्धता सुनिश्चित की जाएगी। लक्ष्य यह है कि मरीजों और उनके परिजनों को इलाज के दौरान दवा और अन्य जरूरी सामग्री खरीदने के लिए बाहर न जाना पड़े। डॉ. डीके सिन्हा ने कहा कि रिम्स में बेड और मैनपावर की कमी मरीजों के इलाज को प्रभावित कर रही है। इस समस्या को प्राथमिकता के आधार पर दूर करने की दिशा में तत्काल कदम उठाए जाएंगे, ताकि स्वास्थ्य सेवाएं और अधिक प्रभावी बन सकें। हर शिफ्ट में रहेगा डिप्टी मेडिकल सुपरिटेंडेंट अस्पताल की निगरानी व्यवस्था को मजबूत करने के लिए अब तीनों शिफ्टों में एक-एक डिप्टी मेडिकल सुपरिंटेंडेंट की तैनाती की जाएगी। इससे 24 घंटे वरिष्ठ प्रशासनिक निगरानी सुनिश्चित होगी और मरीजों की समस्याओं का त्वरित समाधान किया जा सकेगा। प्राइवेट प्रैक्टिस पर सख्त कार्रवाई होगी निदेशक ने प्राइवेट प्रैक्टिस के सवाल का जवाब देते हुए स्पष्ट किया कि सरकारी सेवा में रहते हुए निजी प्रैक्टिस करने वाले डॉक्टरों के खिलाफ सख्त कानूनी और विभागीय कार्रवाई की जाएगी। सभी मेडिकल छात्रों का होगा दस्तावेज सत्यापन डॉ. सिन्हा ने बताया कि 3 मेडिकल छात्रों के दस्तावेजों को लेकर शिकायत मिलने व सीआईडी जांच के बाद अब रिम्स में दाखिला लेने वाले सभी मेडिकल छात्रों के दस्तावेजों का अनिवार्य सत्यापन कराया जाएगा। भविष्य में अनियमितता रोकने के लिए यह व्यवस्था आगे भी लागू रहेगी।
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