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IMD Weather Update: पहाड़ों पर आसमान से बरसी आफत ने पूरे उत्तर भारत में हाहाकार मचा दिया है. उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश में भारी बारिश और खौफनाक लैंडस्लाइड के कारण 3 राष्ट्रीय राजमार्गों समेत 120 सड़कें पूरी तरह बंद हैं. यमुनोत्री हाईवे का हिस्सा बहने से फंसे 100 तीर्थयात्रियों को रेस्क्यू कर सुरक्षित निकाला गया. यूपी, बिहार, पंजाब और हरियाणा समेत देश के कई अन्य राज्यों में भी भारी बारिश से जनजीवन अस्त-व्यस्त रहा.
मौसम की मार हिमाचल और उत्तराखंड पर सबसे ज्यादा पड़ी.
नई दिल्ली. पहाड़ों पर आसमान से बरसी आफत ने इस वक्त पूरे उत्तर भारत में हाहाकार है. मानसून की इस मार से उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश के पहाड़ इस कदर दरक रहे हैं कि मानो धरती का सीना फट गया हो. कुदरत के इस रौद्र रूप के आगे तीन राष्ट्रीय राजमार्गों समेत 120 सड़कें मलबे के ढेर में तब्दील हो चुकी हैं, जिससे चारों तरफ चीख-पुकार और दहशत का माहौल है. सबसे खौफनाक मंजर यमुनोत्री हाईवे पर देखने को मिला. यहां पूरी की पूरी सड़क नदी में समा गई. साथ ही 100 तीर्थयात्री मौत के मुहाने पर आकर फंस गए. इसके बाद धड़कते पहाड़ों और गिरते मलबे के बीच रस्सियों के सहारे रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया गया. सिर्फ पहाड़ ही नहीं बल्कि यूपी, बिहार, पंजाब और हरियाणा समेत देश के कई मैदानी राज्यों में भी बादलों की इस भयंकर गड़गड़ाहट का असर देखने को मिली.
यमुनोत्री हाईवे का हिस्सा बहा
उत्तराखंड में कुदरत का सबसे भीषण प्रहार देखने को मिला है. लगातार हो रही मूसलाधार बारिश के कारण पहाड़ी दरकने से राज्य के तीन प्रमुख राष्ट्रीय राजमार्गों समेत 120 से अधिक सड़कें पूरी तरह बंद हो गई हैं. सबसे खराब स्थिति उत्तरकाशी जिले के स्यानाचट्टी में देखने को मिली, जहां लैंडस्लाइड के कारण यमुनोत्री राष्ट्रीय राजमार्ग का लगभग 100 मीटर हिस्सा भरभराकर ढह गया और नदी में समा गया.
रास्ता बंद होने के कारण वहां करीब 100 तीर्थयात्री फंस गए. राज्य आपदा मोचन बल (SDRF) की टीम ने त्वरित कार्रवाई करते हुए बेहद विकट परिस्थितियों में रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया. मलबे और पत्थरों के गिरने के बीच बचाव दल ने वैकल्पिक रास्ते पर रस्सियाँ बांधीं और एक-एक करके सभी 100 तीर्थयात्रियों को मौत के मुंह से सुरक्षित बाहर निकाला. हाइवे को खोलने के लिए युद्धस्तर पर मरम्मत कार्य जारी है, लेकिन लगातार गिर रहे पत्थरों के कारण काम में बाधा आ रही है. इसी बीच, चमोली जिले से एक बेहद दुखद खबर आई, जहां प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के प्रभारी डॉ. नवीन डिमरी की परिसर में चल रहे मरम्मत कार्य का निरीक्षण करने के दौरान मलबे की चपेट में आने से दर्दनाक मौत हो गई.
हिमाचल में ढहे पुल, डूबे मकान
पड़ोसी राज्य हिमाचल प्रदेश में भी हालात चिंताजनक बने हुए हैं. शिमला में भारी लैंडस्लाइड की घटनाएं सामने आई हैं, तो वहीं सांगला में एक ‘बेली’ पुल पानी के तेज बहाव में ताश के पत्तों की तरह ढह गया. किन्नौर जिले में लिप्पा झरने का जलस्तर अचानक बढ़ने से बाढ़ जैसी स्थिति पैदा हो गई. यहां लिप्पा बस अड्डे के पास स्थित एक मंजिला मकान पूरी तरह जलमग्न हो गया, जबकि कई अन्य रिहायशी मकानों पर डूबने का खतरा मंडरा रहा है. मौसम विभाग ने शिमला, कुल्लू, चंबा, बिलासपुर और सिरमौर जिलों के लिए ‘येलो अलर्ट’ जारी किया है.
देश के इन राज्यों में भी आफत की बारिश
सिर्फ पहाड़ी राज्य ही नहीं, बल्कि देश के कई अन्य हिस्सों में भी मानसून आफत बनकर बरस रहा है. आईएमडी (IMD) के अनुसार, पूर्वी उत्तर प्रदेश और मेघालय में बहुत भारी बारिश दर्ज की गई है. इसके अलावा पश्चिम बंगाल, ओडिशा, झारखंड, बिहार, पंजाब, हरियाणा, पश्चिमी उत्तर प्रदेश, मिजोरम, केरल और तमिलनाडु में भी भारी बारिश ने रफ्तार रोक दी है. केरल के वायनाड में अनक्कमपोयिल-मेप्पाडी सुरंग परियोजना स्थल पर हुए लैंडस्लाइड के बाद लापता लोगों के लिए बड़े पैमाने पर खोज अभियान चलाया जा रहा है. कुल मिलाकर, उत्तर से लेकर दक्षिण तक मानसून की इस मार ने पूरे देश को अलर्ट पर ला दिया है.
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डिजिटल पत्रकारिता में खबरों की गहरी समझ रखने वाले संदीप गुप्ता वर्तमान में News18 इंडिया में बतौर चीफ सब-एडिटर अपनी सेवाएं दे रहे हैं. 16 वर्षों से सुदीर्घ पत्रकारीय सफर में इन्होंने अपनी कलम से जटिल विषयों को …और पढ़ें