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रांची, लोहरदगा लोकल पैसेंजर ट्रेन में ऐसे तो यात्रा की आपाधापी मची रहती है। परंतु बीते कुछ समय से एकबार फिर यात्रा को लेकर यात्रियों की स्थिति यह रह रही है कि यात्री या तो ट्रेन में चढ़ ही नहीं पा रहे हैं या फिर चढ़ भी रहे हैं तो रिस्क लेकर उनको यात्
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पेट्रोल डीजल के बढ़े दाम के बाद बसों में बढ़ाई गई किराए के बाद यात्रियों का रुख ट्रेन की ओर अधिक हो गया है। रविवार को भी ऐसी स्थिति लोहरदगा से रांची जाने वाली एक्सप्रेस सहित लोकल पैसेंजर ट्रेन की रही। लोकल पैसेंजर ट्रेन में मात्र आठ बोगियों की संख्या होने के कारण हजारों यात्रियों को आवागमन करने में भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। खास करके बुजूर्ग, महिला और बच्चों को गोद लेकर ट्रेन में चढ़ने वाले यात्रियों के बीच दुर्घटना की आशंका बनी रहती है। हालांकि स्टेशन में आरपीएफ पुलिस बल रहती है जो यात्रियों की भीड़ को नियंत्रित करने में नाकाफी हैं। यहां यात्रियों की बढ़ी संख्या को देखते हुए आरपीएफ पुलिस बल बढ़ाने की आवश्यकता है। इतना ही नहीं कई बार यात्रा के दौरान यात्री भीड़ को लेकर अपनी सीट पाने की होड़ में आपस में ही लड़ बैठते हैं। कई यात्रियों को आपस में सीट हासिल करने को लेकर लड़ते झगड़ते भी देखा जाता है।
परंतु आरपीएफ पुलिस बल की संख्या कम होने के कारण इस पर नियंत्रण नहीं पाया जा पा रहा। कुल मिलाकर लोहरदगा रेलवे स्टेशन में आरपीएफ पुलिस बल की बढ़ोतरी के साथ लोकल पैसेंजर ट्रेन में बोगी की भी बढ़ोतरी आवश्यक नजर आ रही है। हालांकि बोगी बढ़ाने की दिशा में कोई जनप्रतिनिधि द्वारा भी आवाज बुलंद नहीं की जा रही है। नतीजा यात्रा करने वाले यात्रियों को ठूसकर आवागमन करने को मजबूर होना पड़ रहा है। मुख्य रूप से लोहरदगा से नौ बजे खुलने वाली एक्सप्रेस ट्रेन में सुबह यात्रियों की आपाधापी सबसे अधिक रहती है। स्थिति यह रहती है कि कई बार यात्रियों को भीड़ की वजह से वापस भी लौटना पड़ता है। वहीं अधिकांश लोगों को ट्रेन के दरवाजे पर ही खड़े होकर रांची तक की दूरी तय करनी पड़ती है। वहीं 7 आरएल लोकल पैसेंजर ट्रेन में मजदूरों की संख्या अधिक होने के कारण स्थिति भयावह रहती है।