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महाराष्ट्र के लोनावला के पास स्थित लोहागढ़ किला फिलहाल भले ही पुणे के कारोबारी केतन अग्रवाल की हत्या को लेकर चर्चा में है. लेकिन 900 साल पुराना इस किले का अपना गौरवशाली इतिहास है. यह किला शिवाजी महाराज, मराठा-मुगल संघर्षों और शानदार वास्तुकला के लिए जाना जाता है. विंचू काटा, चार ऐतिहासिक दरवाजे, विसापुर किले से जुड़ाव और मानसून ट्रेक इसे पर्यटकों की पहली पसंद बनाते हैं. वहीं, पिछले कुछ वर्षों में यहां सामने आए कुछ संदिग्ध मौतों के मामलों ने भी इस ऐतिहासिक किले को सुर्खियों में ला दिया था. जानिए लोहागढ़ किले से जुड़ी कुछ दिलचस्प बातें.
महाराष्ट्र के लोनावला के पास मौजूद लोहागढ़ किला करीब 900 साल पुराने इतिहास को अपने भीतर समेटे हुए है. यह किला सिर्फ अपनी मजबूत बनावट के लिए ही नहीं, बल्कि वीरता, युद्ध, राजाओं के शासन, शानदार वास्तुकला और कई अनसुलझे रहस्यों के कारण भी मशहूर है. आइए जानते हैं इस ऐतिहासिक किले से जुड़ी 13 बेहद दिलचस्प बातें.
लोहागढ़ किला महाराष्ट्र के लोनावला के पास समुद्र तल से लगभग 1,033 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है. चारों तरफ फैली पहाड़ियां, हरियाली और बादलों से घिरा यह किला पर्यटकों को खूब आकर्षित करता है. इसकी मजबूत दीवारें और खूबसूरत प्राकृतिक नजारे इसे इतिहास और प्रकृति का शानदार संगम बनाते हैं.
माना जाता है कि लोहागढ़ किले का निर्माण 11वीं शताब्दी में हुआ था. इसके बाद इस पर यादव वंश, बहमनी सल्तनत, निजामशाही, मराठा साम्राज्य और आखिर में अंग्रेजों का शासन रहा. कई राजाओं और साम्राज्यों का उतार-चढ़ाव देखने वाला यह किला आज भी अपने लंबे और गौरवशाली इतिहास की गवाही देता है.
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छत्रपति शिवाजी महाराज ने लोहागढ़ किले को अपनी महत्वपूर्ण सैन्य चौकियों में शामिल किया था. उन्होंने इसकी सुरक्षा को और मजबूत बनाने के लिए नए दरवाजे, बुर्ज और दीवारें बनवाईं. इतना ही नहीं, मराठा साम्राज्य के महत्वपूर्ण खजाने और युद्ध सामग्री को सुरक्षित रखने के लिए भी इसी किले का इस्तेमाल किया जाता था.
लोहागढ़ किला मराठों और मुगलों के बीच हुए कई बड़े संघर्षों का गवाह रहा है. इसकी मजबूत स्थिति और ऊंची पहाड़ी पर बने होने के कारण दुश्मनों के लिए इस पर कब्जा करना आसान नहीं था. यही वजह थी कि यह पश्चिमी भारत के सबसे सुरक्षिति किलों में गिना जाता था.
पेशवा शासन के दौरान नाना फडणवीस ने लोहागढ़ किले का काफी विकास कराया. उन्होंने यहां महल, मंदिर, दरबार और पानी जमा करने के लिए कई जल संरचनाएं बनवाईं थीं. उस समय यह किला सिर्फ सुरक्षा का केंद्र नहीं था, बल्कि प्रशासन चलाने और अहम फैसले लेने का भी प्रमुख स्थान बन गया था.
साल 1818 में अंग्रेजों ने लोहागढ़ किले पर कब्जा कर लिया. इसके बाद इस किले का इस्तेमाल कई स्वतंत्रता सेनानियों को कैद करके रखने के लिए किया गया. अलग-अलग ऐतिहासिक विवरणों में यह भी उल्लेख मिलता है कि यहां कई बंदियों को कठोर यातनाएं दी गईं और कुछ स्वतंत्रता सेनानियों की मौत भी इसी किले में हुई.
लोहागढ़ किले तक पहुंचने के लिए गणेश द्वार, नारायण द्वार, हनुमान द्वार और महा द्वार से होकर गुजरना पड़ता है. ये चारों दरवाजे मजबूत पत्थरों से बनाए गए हैं और इन पर की गई नक्काशी उस समय की बेहतरीन स्थापत्य कला की झलक दिखाती है. हर दरवाजा किले की सुरक्षा व्यवस्था का अहम हिस्सा था.
लोहागढ़ किले का सबसे खास हिस्सा ‘विंचू काटा’ है. इसकी आकृति बिच्छू की पूंछ जैसी दिखाई देती है, इसलिए इसे यह नाम दिया गया. यहां से आसपास की घाटियां, ऊंचे पहाड़, हरियाली और दूर-दूर तक फैला खूबसूरत नजारा साफ दिखाई देता है. यही वजह है कि यहां सबसे ज्यादा पर्यटक पहुंचते हैं.
लोहागढ़ किले के अंदर लक्ष्मी कोठी, गणेश दरवाजा, नाना फड़नवीस से जुड़ी ऐतिहासिक संरचनाएं और कई पुराने अवशेष आज भी मौजूद हैं. ये इमारतें उस दौर की कला, स्थापत्य और प्रशासनिक व्यवस्था की झलक दिखाती हैं. इन्हें देखकर किले के गौरवशाली इतिहास का आसानी से अंदाजा लगाया जा सकता है.
लोहागढ़ किला एक संकरी पहाड़ी रिज के जरिए पास स्थित विसापुर किले से जुड़ा हुआ है. माना जाता है कि पुराने समय में दोनों किले मिलकर पूरे इलाके की सुरक्षा करते थे. अगर किसी एक किले पर हमला होता था, तो दूसरे किले से तुरंत मदद पहुंचाई जा सकती थी.
लोहागढ़ किला महाराष्ट्र के सबसे लोकप्रिय ट्रेकिंग डेस्टिनेशन में शामिल है. मालवली और भाजे गांव से शुरू होने वाला ट्रेक आसान होने के कारण नए ट्रेकर्स भी यहां बड़ी संख्या में पहुंचते हैं. खासकर मानसून में हरियाली, झरने, बादल और ठंडी हवा इस जगह की खूबसूरती को कई गुना बढ़ा देते हैं.
अगर आप लोहागढ़ घूमने जाते हैं, तो उसके आसपास मौजूद विसापुर किला, भाजा गुफाएं, कार्ला गुफाएं, पावना झील और राजमाची प्वाइंट जैसी जगहों का भी आनंद ले सकते हैं. यही वजह है कि यह इलाका इतिहास, प्राकृतिक सुंदरता और एडवेंचर पसंद करने वाले लोगों के लिए एक बेहतरीन पर्यटन स्थल माना जाता है.
लोहागढ़ किला सिर्फ अपने इतिहास के लिए ही नहीं, बल्कि कुछ चर्चित संदिग्ध मौतों की घटनाओं के कारण भी सुर्खियों में रहा है. दिसंबर 2016 में 21 वर्षीय राहुल नराले का शव किले के पास झाड़ियों में मिला था. वहीं मार्च 2025 में 21 वर्षीय मानसी गोविंदपुरकर का शव भी इसी इलाके में मिला, जिसकी हत्या के मामले में उसके तीन परिचितों पर संदेह जताया गया था.
करीब 900 साल से महाराष्ट्र की पहाड़ियों पर खड़ा लोहागढ़ किला इतिहास, वीरता और शानदार वास्तुकला की अनमोल पहचान है. शिवाजी महाराज से लेकर अंग्रेजों तक कई शासकों ने इसका इस्तेमाल किया. विंचू काटा, चार विशाल दरवाजे, विसापुर किले से जुड़ाव और खूबसूरत ट्रेक इसे खास बनाते हैं. वहीं कुछ चर्चित संदिग्ध मौतों ने भी इस किले को समय-समय पर सुर्खियों में रखा.