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वोट चोरी नहीं, अब सीट चोरी… राज्यसभा चुनाव में हाई वोल्टेज ड्रामा,...


नई दिल्ली. मध्य प्रदेश से कांग्रेस की राज्यसभा उम्मीदवार मीनाक्षी नटराजन का नामांकन रद्द होने के बाद कांग्रेस नेताओं ने भाजपा का घेराव किया. कांग्रेस के वरिष्ठ नेता केसी वेणुगोपाल ने दावा किया कि यह नामांकन रद्द होना पूरी तरह से अलोकतांत्रिक है और लोकतंत्र की हत्या कर दी गई है. मीनाक्षी नटराजन का नामांकन रद्द होने के बाद कांग्रेस नेता जयराम रमेश, केसी वेणुगोपाल, भूपेश बघेल, सचिन पायलट और अन्य नेता भारत निर्वाचन आयोग के कार्यालय पहुंचे.

केसी वेणुगोपाल ने मीडिया से कहा कि यह लोकतंत्र का बुनियादी मामला है. हम तब तक यहीं बैठे रहेंगे जब तक वे हमें अंदर जाने की इजाजत नहीं देते. हम बहुत जिम्मेदार लोग हैं. पूर्व मुख्यमंत्री, उप-मुख्यमंत्री और सांसद यहां मौजूद हैं. पार्टी इस मुद्दे को हाईकोर्ट में चुनौती देगी या सीधे सुप्रीम कोर्ट का रुख करेगी, इस बारे में उसके नेताओं ने कुछ भी स्पष्ट नहीं बताया लेकिन वरिष्ठ अधिवक्ता और पार्टी के राज्यसभा सदस्य विवेक तन्खा ने सुझाव दिया कि यह ऐसा मामला है जिसे सीधे सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी जानी चाहिए.

कांग्रेस नेता सचिन पायलट ने कहा कि हमारी उम्मीदवार (मीनाक्षी नटराजन) के खिलाफ कोई एफआईआर या चार्जशीट नहीं है. उन्होंने बिना किसी वजह के हमारी उम्मीदवार का नामांकन रद्द कर दिया. हम यहां आए, लेकिन हमें अंदर जाने नहीं दिया जा रहा है. हमने 2 घंटे पहले लिखित में जानकारी दी थी. जिस सीट पर हम जीत रहे थे, हमारी उम्मीदवार का नॉमिनेशन रद्द कर दिया गया है. यहां कोई हमसे मिलने को तैयार नहीं है. वे कह रहे हैं कि चुनाव आयोग में कोई अधिकारी नहीं है. ऐसा पहली बार हुआ है कि सिर्फ एक नोटिस की वजह से राज्यसभा उम्मीदवार का नॉमिनेशन रद्द कर दिया गया हो. उनके खिलाफ कोई केस या एफआईआर नहीं है.

दूसरी ओर, मध्य प्रदेश से कांग्रेस की राज्यसभा उम्मीदवार के तौर पर अपना नामांकन रद्द होने पर कांग्रेस नेता मीनाक्षी नटराजन ने कहा कि यह सब तब शुरू हुआ जब सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी ने जरूरी संख्या बल न होने के बावजूद तीसरा उम्मीदवार मैदान में उतारा. यह साफ हो गया कि वे संविधान और लोकतंत्र को कुचलने वाली राजनीति कर रहे थे. वे साफ तौर पर राज्यसभा चुनाव में हेरफेर करने की कोशिश कर रहे हैं, ठीक वैसे ही जैसे उन्होंने पहले मध्य प्रदेश में चुनावों को प्रभावित किया था. यह सिर्फ राज्यसभा सीट या किसी खास उम्मीदवार की बात नहीं है. यह ‘भारत की सोच’ और लोकतंत्र के लिए उस व्यापक संघर्ष की बात है जिसके लिए हमारे नेता राहुल गांधी आज देश के लिए एक अहम लड़ाई लड़ रहे हैं. सवाल यह है कि क्या लोकतंत्र बचेगा, क्या भारत का संघीय ढांचा कायम रहेगा और क्या एक-पार्टी सिस्टम और तानाशाही थोपने की कोशिश नाकाम होगी.

नटराजन ने भोपाल में एक संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा कि जब सदस्यों की संख्या पर्याप्त नहीं थी और भाजपा ने तीसरा उम्मीदवार उतार दिया तभी यह स्पष्ट हो गया था कि भाजपा लोकतंत्र और संविधान को ‘कुचलने’ के प्रयास में है. नटराजन ने कहा, “अभी तक तो मामला वोट चोरी तक सीमित था, अब यह सीट चोरी हो गया है… जब उन्हें लगा कि कांग्रेस के विधायक एकजुट हैं तो उन्होंने उस कानूनी नोटिस की आड़ ली जिसे संज्ञान में ही नहीं लिया गया.” नटराजन ने कहा कि यह महज एक उम्मीदवारी के बारे में नहीं है, देश में एक गंभीर स्थिति है.

मध्य प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने कहा कि कांग्रेस पार्टी पूरी ताकत से इसका मुकाबला करेगी. इन घटनाओं से जुड़े कानूनी और चुनाव संबंधी आरोपों और जिस तरह से हमारे कानूनी विशेषज्ञों ने स्थिति को संभाला, उसे देखते हुए अधिकारी कानूनी आधार को यूं ही खारिज नहीं कर सकते थे और न ही कर सकते हैं. फिर भी, जो हुआ वह पूरी तरह से राजनीतिक द्वेष का काम था. मीनाक्षी नटराजन के राज्यसभा उम्मीदवार के तौर पर नामांकन रद्द होने पर भाजपा नेताओं की प्रतिक्रिया भी सामने आई.

भाजपा विधायक भगवान दास सबनानी ने कहा कि इसे संविधान की जीत के तौर पर देखा जाना चाहिए क्योंकि गलत जानकारी इसी मंच पर सामने आई थी. नतीजतन, कांग्रेस पार्टी की असलियत सामने आ गई और मीनाक्षी नटराजन का नामांकन रद्द कर दिया गया. अगर आपने यह फॉर्म ही ठीक से नहीं भरा है, तो संविधान के प्रति आपका सम्मान कहां है.

भाजपा नेता राकेश सिंह ने कहा कि सच की जीत हुई है. उन्होंने जान-बूझकर यह बात छिपाई थी. फॉर्म अधूरा था और उन्होंने गलत जानकारी दी थी. रिटर्निंग ऑफिसर ने इसी आधार पर उनका नामांकन रद्द कर दिया. इसलिए, अब हम कह सकते हैं कि सच और ईमानदारी की जीत हुई है. मध्यप्रदेश सरकार में मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने कहा कि हम न्यायपालिका का सम्मान करते हैं. आपराधिक मामले को जानबूझकर छिपाया गया था और गलत जानकारी दी गई थी. न्याय हुआ है और हमारे पार्टी कार्यकर्ता महेश केवट को लोगों का आशीर्वाद मिला है. भाजपा को लोकतंत्र में भरोसा है.

वकील संकेत गुप्ता ने कहा कि सभी को यह समझना होगा कि भारतीय जनता पार्टी ने यह कानूनी लड़ाई कानूनी तरीकों से लड़ी. यह लड़ाई न्याय के अनुसार, चुनाव आयोग की गाइडलाइंस और सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के आधार पर लड़ी गई. मीनाक्षी नटराजन के खिलाफ तेलंगाना में एक केस चल रहा है. उन्हें इसकी जानकारी थी, और इसी जानकारी के साथ उन्होंने अपने वकील के जरिए जवाब दाखिल किया था. चूंकि उन्होंने एक आपराधिक मामले में जवाब दाखिल किया था, इसलिए यह जानकारी सामने आई. हमने फैसला और चुनाव आयोग की गाइडलाइंस पेश कीं. आज रिटर्निंग ऑफिसर ने फैसला सुनाया कि मीनाक्षी नटराजन ने जानबूझकर अपने खिलाफ चल रहे आपराधिक मामले की जानकारी छिपाई.

भाजपा के राज्यसभा उम्मीदवार महेश केवट ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, हमारे मुख्यमंत्री मोहन यादव, हमारी राज्य की लीडरशिप और राज्य व राष्ट्रीय स्तर पर भारतीय जनता पार्टी की पूरी लीडरशिप ने मुझ जैसे एक साधारण पार्टी कार्यकर्ता को यह जिम्मेदारी सौंपी है. इसके लिए मैं आभार व्यक्त करता हूं. भाजपा ने मुझे यह मौका और जिम्मेदारी दी है. जब भगवान श्री राम वनवास पर गए थे, तो उन्होंने केवट और निषाद राज को गले लगाया था. उसी भावना के साथ भारतीय जनता पार्टी ने मेरे साथ व्यवहार किया है. मैं सभी नेताओं का आभार और धन्यवाद व्यक्त करता हूं.



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