महाराष्ट्र की सियासत के चाणक्य कहे जाने वाले शरद पवार और बीजेपी के बीच आखिर कौन सी खिचड़ी पक रही है? दरअसल सियासी गलियारों में पिछले काफी दिनों से ऐसी अटकलें तेज हैं कि शरद पवार के नेतृत्व वाली एनसीपी (एसपी) भी एनडीए से हाथ मिलाने जा रही है. वैसे शरद पवार की तरफ से इन तमाम अटकलों को खारिज किया जाता रहा है, लेकिन सुप्रिया सुले के एक ताजा बयान ने महाराष्ट्र की सियासत में हलचल पैदा कर दी है. दरअसल सुले ने शनिवार को बताया कि एनसीपी (एसपी) के आठ सांसदों का प्रतिनिधिमंडल सोमवार को प्रधानमंत्री मोदी से मुलाकात करेगा. यह बैठक सोमवार सुबह 11 बजे संसद भवन स्थित प्रधानमंत्री कार्यालय में होगी. उन्होंने इस मुलाकात के पीछे की वजह महाराष्ट्र के अहम मुद्दों को लेकर प्रधानमंत्री मोदी के साथ चर्चा बताया है.
सुप्रिया सुले के मुताबिक, पार्टी ने महाराष्ट्र से जुड़े कई गंभीर और लंबे समय से चले आ रहे मुद्दों पर प्रधानमंत्री का ध्यान खींचने के लिए मुलाकात का समय मांगा था. संसद की कार्यवाही लगातार बाधित होने के कारण सांसदों ने अब सीधे प्रधानमंत्री से मिलकर राज्य की समस्याएं रखने का फैसला किया है.
‘पानी की किल्लत से किसान आत्महत्या तक के उठाएंगे मुद्दे’
सुप्रिया सुले ने बताया कि महाराष्ट्र के सामने इस समय कई गंभीर चुनौतियां हैं. इनमें पानी की कमी, किसानों की आत्महत्या, तेजी से बढ़ता शहरीकरण और स्थानीय स्तर पर विकास कार्यों से जुड़ी समस्याएं प्रमुख हैं. उन्होंने सांसद स्थानीय क्षेत्र विकास योजना यानी MPLAD फंड का मुद्दा भी उठाया. सुले के मुताबिक, सांसदों को अपने क्षेत्र में विकास कार्यों के लिए मिलने वाले 5 करोड़ रुपये के फंड का इस्तेमाल करने में भी कई व्यावहारिक दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है. उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य सरकार की ओर से पर्याप्त सहयोग नहीं मिलने के कारण इन फंडों का इस्तेमाल प्रभावित हो रहा है.
एनसीपी (एसपी) का कहना है कि इन मुद्दों पर केंद्र और राज्य के बीच बेहतर समन्वय जरूरी है, ताकि महाराष्ट्र के लोगों को सीधे इसका फायदा मिल सके.
FCRA संशोधन बिल पर NCP-SP का विरोध
इस बीच सुप्रिया सुले ने प्रस्तावित विदेशी अंशदान विनियमन अधिनियम यानी FCRA संशोधन विधेयक को लेकर भी पार्टी का रुख साफ कर दिया. उन्होंने कहा कि एनसीपी (एसपी) मौजूदा स्वरूप में इस बिल का समर्थन नहीं करती.
सुले ने सरकार से मांग की कि या तो इस विधेयक को वापस लिया जाए या फिर इसे संयुक्त संसदीय समिति (JPC) के पास भेजा जाए, ताकि इसके प्रावधानों पर विस्तार से चर्चा और विचार-विमर्श हो सके.
उनका कहना है कि इतने महत्वपूर्ण कानून में बदलाव से पहले सभी पक्षों को अपनी बात रखने का मौका मिलना चाहिए. पार्टी संसद में इस मुद्दे पर सरकार के सामने अपना विरोध दर्ज कराने की तैयारी में है.
जंतर-मंतर और NEET विवाद पर भी SIT की मांग
सुप्रिया सुले ने छात्र आंदोलनों और NEET से जुड़े विवादों का मुद्दा भी उठाया. उन्होंने पहले जंतर-मंतर पर हुए छात्र प्रदर्शन से संबंधित घटनाओं की जांच के लिए विशेष जांच दल यानी SIT गठित करने की मांग दोहराई.
सुले ने कथित तौर पर पेलेट गन और आंसू गैस के इस्तेमाल से जुड़े आरोपों का भी जिक्र किया. उन्होंने कहा कि इन घटनाओं की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए और यह पता लगाया जाना चाहिए कि आखिर उस दौरान क्या हुआ था.
उन्होंने संसद परिसर से जुड़े कथित घटनाक्रम पर भी सवाल उठाए और पूरे मामले की जांच की मांग की. एनसीपी (एसपी) का कहना है कि ऐसे मामलों में तथ्यों को सामने लाने के लिए स्वतंत्र जांच जरूरी है.
परिसीमन बिल पर अभी से फैसला क्यों नहीं?
प्रस्तावित परिसीमन विधेयक को लेकर पूछे गए सवाल पर सुप्रिया सुले ने फिलहाल किसी अंतिम रुख की अटकलों को खारिज कर दिया. उन्होंने कहा कि अभी तक विधेयक का कोई आधिकारिक मसौदा संसद में पेश नहीं हुआ है. ऐसे में उसके प्रावधानों पर अंतिम प्रतिक्रिया देना जल्दबाजी होगी.
सुले ने बताया कि INDIA गठबंधन के नेता रोजाना सुबह करीब 10 बजे कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के नेतृत्व में बैठक करते हैं. जब परिसीमन विधेयक आधिकारिक रूप से संसद में आएगा, तब गठबंधन के सहयोगियों के साथ विचार-विमर्श करके सामूहिक रणनीति तैयार की जाएगी.
उन्होंने साफ किया कि इस मुद्दे पर एनसीपी (एसपी) अकेले फैसला नहीं करेगी. कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, शिवसेना (UBT), तृणमूल कांग्रेस और अन्य सहयोगी दलों के साथ चर्चा के बाद ही विपक्ष की रणनीति सामने आएगी.
ऐसे में अब सबकी नजर इस बात पर होगी कि सोमवार की बैठक में प्रधानमंत्री की ओर से महाराष्ट्र के इन मुद्दों पर क्या आश्वासन मिलता है और क्या इस मुलाकात के बाद राज्य से जुड़े कुछ मामलों में केंद्र और एनसीपी (एसपी) के बीच संवाद का नया रास्ता खुलता है. (IANS इनपुट के साथ)