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शादी करना भी हुआ महंगा, लोगों का बजट बिगड़ा:बर्तन, टेंट और कैटरिंग...




देश में बढ़ती महंगाई का असर अब शादी-विवाह के आयोजनों पर भी स्पष्ट रूप से दिखने लगा है। कांसा, पीतल और स्टील के बर्तनों की कीमतों में अप्रत्याशित वृद्धि के साथ-साथ टेंट, कैटरिंग और सजावट के खर्च में भारी बढ़ोतरी के कारण लोग अब सादे तरीके से विवाह करने और केवल रस्मों के लिए ही खरीदारी करने को मजबूर हो रहे हैं। भारतीय विवाह परंपरा में बेटियों को स्टील, पीतल और कांमसा के बर्तन दान करने का रिवाज वर्षों से चला आ रहा है। पहले जहां लोग अपनी बेटियों की शादी में बड़ी मात्रा में ये बर्तन देते थे, वहीं पिछले चार-पांच महीनों में इन बर्तनों की बढ़ी कीमतों ने इस चलन को काफी प्रभावित किया है। पेट्रोल-डीजल की बढ़ती कीमतों का असर खाड़ी देशों में जारी युद्ध के कारण उत्पन्न हुए एलपीजी संकट और पेट्रोल-डीजल की बढ़ती कीमतों का असर पहले खाद्य पदार्थों पर पड़ा था। अब इसका सीधा प्रभाव शादी-विवाह से जुड़े सामान बर्तनों, ज्वैलरी, टेंट, खाना पर दिख रहा है, जिससे विवाह का पूरा बजट बिगड़ गया है। झुमरी तिलैया के स्टेशन रोड स्थित चिरंजी लाल बर्तन दुकान के संचालक मनोज कुमार ने बताया कि चार-पांच महीने पहले जो स्टील के बर्तन का सेट 4 हजार रुपए में मिलता था, उसकी कीमत अब 52 सौ रुपए हो गई है। उन्होंने यह भी बताया कि विवाह के अवसर पर बेटी को दान किए जाने वाले अन्य बर्तनों की कीमतों में भी काफी वृद्धि हुई है। इधर, इवेंट प्लानर गौरी भगत ने जानकारी दी कि शादी के लिए टेंट, कैटरिंग, सजावट और लाइट के बजट में पिछले लग्न के मुकाबले इस लग्न में करीब 20 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। उन्होंने बताया कि पिछले लग्न में विवाह के जिस इवेंट का खर्च 6 लाख से 7 लाख रुपए आता था, वह इस वर्ष के लग्न में 8 लाख तक पहुंच चुका है। ट्रांसपोर्टेशन चार्ज बढ़ा
गौरी भगत ने बताया कि बीते कुछ माह में डीजल के दाम बढ़ने के कारण जहां एक ओर ट्रांसपोर्टेशन चार्ज बढ़ा है। वहीं, इसके साथ-साथ मजदूर के भाव, कपड़े की कीमत और खाने के सारे आइटम भी मांगे हो गए हैं। इसके कारण शादी विवाह के खर्चे में 20 से 25% तक की वृद्धि हो गई है। ज्वैलरी के दाम में अप्रत्याशित वृद्धि
वहीं, अगर सोने चांदी के जेवर की बात की जाए तो इसमें अप्रत्याशित वृद्धि हुई है। झुमरीतिलैया स्थित तनिष्क के संचालक हर्ष जालान ने बताया कि पिछ्ले वर्ष के मुकाबले इस वर्ष सोने के भाव में जहां दोगुनी वृद्धि हुई है। वहीं चांदी के भाव में तीन गुणा वृद्धि हुई है। उन्होंने बताया कि पिछले वर्ष मई-जून के माह में सोने के 22 कैरट की कीमत प्रति 10 ग्राम 70 हजार रुपए के आसपास थी, वहीं इसका आज का भाव 1 लाख 30 हजार रुपए प्रति 10 ग्राम हो गया है। इसके अलावे चांदी का भाव जहां पिछले वर्ष 1 लाख 20 हजार रुपए प्रति किलो था, वो इस वर्ष 3 लाख 20 हजार रुपए तक पहुंच चुका है। इस प्रकार से सोने चांदी में हुई अप्रत्याशित वृद्धि के कारण बिक्री पर भी प्रभाव पड़ा है। ग्राहकों के इंतजार में पूरा दिन गुजर रहा बर्तन विक्रेता मनोज कुमार ने बताया कि पूर्व में जहां शादी के लगन के समय दुकान में आराम करने का भी समय नहीं मिल पाता था। इस बार ग्राहकों के इंतजार में पूरा दिन गुजर रहा है। स्टील के बर्तन सेट के भी मूल्यों में वृद्धि हुई है। 111 पीस का सेट 5400 रुपए वाला अब 8500 रुपए में और 121 पीस का सेट 7500 रुपए वाला अब 9900 में बिक रहा है। इसके अतिरिक्त पहले 90 से 100 रुपए में बिकने वाली घंटी अब 150 रुपए की हो गई है। दिया की कीमत 60-70 से बढ़कर एक 125 रुपए, धूपदानी 150 रुपए वाला 250 रुपए का हो गया है। इधर, कॉस्मेटिक विक्रेता मदन मोहन प्रसाद ने बताया कि बढ़ती महंगाई का आलम यह है कि लोगों ने इसमें भी भारी कटौती कर दी है। पहले जहां लोग जमकर खरीदारी करते थे, वहीं अब जरूरत की और नियम को पूरा करने के लिए काम भर ही सामान की खरीदारी कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि पिछले शादी के लगन में जो वेनाइटी बॉक्स उनके यहां 5 सौ रुपए में बिकी थी, उसकी कीमत अब 600 से 700 रुपए तक पहुंच चुकी है। दुल्हन के हाथों की शोभा बढ़ाने वाली चूड़ी के दाम प्रतिदिन बढ़ रहे हैं, जिसके कारण अब लोग सीमित खरीदारी कर रहे हैं। इसके अलावे सिंधोरा भी महंगा हो गया है। शादी का जोड़ा भी हो गया महंगा
साड़ी और लहंगा के विक्रेता मोंटी जैन ने बताया कि शादी के जोड़े की कीमतों में भी भारी बढ़ोतरी हो गई है। पूर्व में 3 हजार से 3500 में बिकने वाला शादी का जोड़ा अब 4500 से 5000 रुपए में बिक रहा है। ब्लाउज के कपड़े पहले 120 से 130 रुपए मीटर में बेचे जाते थे, वे अब 150 से 160 रुपए में बेचने पड़ रहे हैं। इसके अलावे 12 से 13 हजार में बिकने वाला लहंगा अब 15 से 20 हजार रुपए का हो गया है। इस प्रकार हुई अप्रत्याशित वृद्धि ने एक ओर जहां आम लोगों की मुसीबतें बढ़ाई है, वहीं इसके कारण खरीदारी में कमी ने दुकानदारों की चिंता भी बढ़ा दी है। ऐसे में दुकानदारों को पूंजी फंसने का भी डर सता रहा है।



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