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जुर्माने की राशि 5 लाख से घटकर एक लाख रु. होगी झारखंड के छोटे निजी अस्पतालों और नर्सिंग होम को बड़ी राहत मिलने वाली है। राज्य सरकार वर्ष 2013 से प्रभावी क्लिनिकल एस्टैब्लिशमेंट एक्ट में बदलाव करेगी। नई व्यवस्था लागू होने के बाद शहरी क्षेत्र के 40 से कम बेड और ग्रामीण क्षेत्र के 30 से कम बेड वाले अस्पताल इस कानून के दायरे से बाहर हो जाएंगे। साथ ही एक्ट के दायरे में आने वाले संस्थानों पर लगने वाले अधिकतम जुर्माने की राशि को भी पांच लाख रुपए से घटाकर 20 हजार से एक लाख रुपए तक करने पर सहमति बनी है। चिकित्सक संगठनों के विरोध और कोर्ट के निर्देश के आलोक में सरकार ने इस एक्ट की नियमावली में संशोधन के लिए इसी माह स्वास्थ्य विभाग की विशेष सचिव नेहा अरोड़ा की अध्यक्षता में समिति गठित की थी। जुर्माने की जगह अब पेनाल्टी, आपराधिक कार्रवाई में नरमी वर्तमान में एक्ट की धारा 40, 41, 42 और 43 के तहत कड़े आर्थिक दंड का प्रावधान है। इसमें बिना रजिस्ट्रेशन अस्पताल या क्लीनिक चलाने पर पहली बार 50 हजार रुपए और दूसरी बार उल्लंघन पर दो लाख रुपये जुर्माने की बाध्यता थी। इसके अलावा अधिकतम जुर्माना 5 लाख रुपए तक था। केंद्र सरकार द्वारा धारा 40, 43 और 46 में जुर्माने की जगह ‘पेनाल्टी’ का प्रावधान किए जाने के बाद अब झारखंड सरकार भी इसी तर्ज पर व्यवस्था लागू करेगी। धारा 44 के तहत दंड का निर्धारण उल्लंघन की प्रकृति और उसकी गंभीरता के आधार पर तय होगा। नए नियमों में छोटे प्रक्रियात्मक उल्लंघनों पर आपराधिक कार्रवाई कम करने और दंड लगाने से पहले सुनवाई व अपील की प्रक्रिया सुनिश्चित करने पर जोर दिया गया है। उद्देश्य… इलाज की गुणवत्ता में सुधार लाने के लिए बनाया गया था कानून प्रमुख प्रावधान… बिना रजिस्ट्रेशन वाले संस्थान पर अब लगेगा जुर्माना
केंद्र के 22 जून 2026 के संशोधन के अनुसार सहमति केंद्र सरकार ने 22 जून 2026 को क्लिनिकल एस्टैब्लिशमेंट एक्ट में संशोधन किया था। इसी के अनुरूप झारखंड में भी नियमों की समीक्षा की गई है। समिति ने विचार-विमर्श के बाद यह तय किया है कि जो छोटे निजी अस्पताल और क्लीनिक इस एक्ट के दायरे से बाहर होंगे, उनके लिए स्वास्थ्य विभाग एक अलग गाइडलाइन जारी करेगा, जिसका पालन अनिवार्य होगा। वहीं, अस्पताल एक्ट के दायरे में रहे या उससे बाहर, सभी चिकित्सा संस्थानों को फायर लाइसेंस के लिए शपथ पत्र देना अनिवार्य रहेगा।
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