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एक तरफ जहां कई युवा अभी इसी बात को लेकर कंफ्यूजन में हैं कि उन्हें किस दिशा की तरफ अपने कदम आगे बढ़ाना चाहिए. वहीं कई युवा ऐसे हैं जिन्होंने उस काम को करना शुरू कर दिया जिस काम में उनका मन लगा. धीरे-धीरे उसी रास्ते पर आगे बढ़ते हुए वह अच्छी कमाई करने लगा. आज ऐसे ही एक युवा की कहानी बताने जा रहे हैं जिसने सरकारी मदद के जरिए अपने काम को आगे बढ़ाया और आसान भी किया. इससे उसका व्यवसाय और कमाई दोनों बढ़ा है.
पलामू: चाय के शौकीनों के बीच कुल्हड़ वाली चाय का अलग ही क्रेज है. मिट्टी के कुल्हड़ में चाय पीने का स्वाद और अनुभव लोगों को खूब पसंद आता है. यही वजह है कि बाजार में मिट्टी के कुल्हड़ की मांग लगातार बढ़ रही है. ऐसे में कुल्हड़ बनाने का कारोबार कम लागत में रोजगार और कमाई का अच्छा जरिया बन सकता है. खास बात यह है कि सरकार की अनुदान योजना की मदद से इस व्यवसाय को शुरू करना और आसान हो सकता है.
नीलांबर-पीतांबरपुर में तैयार हो रहे हैं मिट्टी के कुल्हड़
पलामू जिले के नीलांबर-पीतांबरपुर प्रखंड में अर्जुन प्रजापति मिट्टी के कुल्हड़ बनाने का व्यवसाय कर रहे हैं. उन्होंने सरकारी अनुदान की मदद से मशीन लगाकर अपने कारोबार को नई गति दी है. पहले जहां कुल्हड़ बनाने में काफी मेहनत और समय लगता था, वहीं अब मशीन की मदद से कम समय में अधिक उत्पादन करना संभव हो गया है. इस कारोबार से उन्होंने खुद के लिए रोजगार का साधन तैयार करने के साथ ही दो से चार अन्य लोगों को भी काम दिया है.
75 हजार की प्रेस मशीन पर मिला 90 प्रतिशत अनुदान
अर्जुन प्रजापति ने बताया कि उन्होंने कुल्हड़ बनाने के लिए बाहर से प्रेस मशीन मंगाई है. इसकी कीमत करीब 75 हजार रुपये है. माटीकला बोर्ड की योजना के तहत उन्हें इस मशीन पर 90 प्रतिशत अनुदान मिला है. इससे उन्होंने दो मशीन लगाई. मशीन मिलने से उनके व्यवसाय को काफी सहूलियत हुई है. उन्होंने बताया कि पहले उन्हें हाथ से कुल्हड़ बनाने में अधिक मेहनत करनी पड़ती थी. अब मशीन से अलग-अलग डिजाइन और आकार के कुल्हड़ आसानी से तैयार किए जा रहे हैं. सरकारी सहायता मिलने से कारोबार को आगे बढ़ाने में काफी मदद मिली है.
पग मिल मशीन से तैयार होती है कुल्हड़ बनाने वाली मिट्टी
कुल्हड़ बनाने की प्रक्रिया में सबसे पहले मिट्टी को तैयार किया जाता है. इसके लिए पग मिल मशीन का इस्तेमाल होता है. कुल्हड़ बनाने के लिए भुरभुरी और अच्छी तरह तैयार मिट्टी की जरूरत होती है. पग मिल मशीन से मिट्टी को मिलाया जाता है. इसके बाद छिलने वाली मशीन से भुरभुरा और उपयोग के योग्य बनाया जाता है. इसके बाद तैयार मिट्टी को प्रेस मशीन में डालकर अलग-अलग आकार के कुल्हड़ तैयार किए जाते हैं. मशीन को सेट करना भी आसान है. इससे उत्पादन की प्रक्रिया पहले की तुलना में काफी सरल हो गई है.
मशीन से एक घंटे में सैकड़ों कुल्हड़ तैयार
अर्जुन प्रजापति ने लोकल18 को बताया कि पहले हाथ से काम करने पर एक घंटे में करीब 40 से 50 कुल्हड़ ही तैयार हो पाते थे. इसमें काफी मेहनत भी लगती थी. लेकिन प्रेस मशीन की मदद से अब एक घंटे में सैकड़ों कुल्हड़ तैयार किए जा सकते हैं. मशीन से उत्पादन बढ़ने के साथ ही अलग-अलग डिजाइन के कुल्हड़ बनाना भी आसान हो गया है. बाजार में इनकी मांग अच्छी है. इससे कारोबार को विस्तार देने का अवसर मिल रहा है.
महीने में 40 से 50 हजार रुपये तक की कमाई
अर्जुन प्रजापति बताते हैं कि कुल्हड़ बनाने के इस व्यवसाय से महीने में करीब 40 से 50 हजार रुपये तक की कमाई हो जाती है. इसमें सभी खर्चों को निकालने के बाद अच्छी आमदनी बचती है. मशीन की मदद से कम समय में अधिक उत्पादन होने के कारण व्यवसाय में मुनाफे की संभावना बढ़ गई है. उनके अनुसार, सही तरीके से काम किया जाए और बाजार की मांग को ध्यान में रखकर उत्पादन किया जाए तो मिट्टी के कुल्हड़ का कारोबार अच्छी कमाई का जरिया बन सकता है.
महिलाओं के लिए भी रोजगार का बेहतर साधन बनी मशीन
इस कारोबार में संगीता देवी भी अपना योगदान दे रही हैं. उन्होंने बताया कि पहले वह घर पर ही रहती थी लेकिन अब प्रेस मशीन आने से उन्हें रोजगार का एक अच्छा साधन मिल गया है. मशीन चलाना काफी आसान है और इससे घर के पास ही काम करने की सुविधा मिल रही है. वह लंबे समय से मिट्टी के कुल्हड़ बनाने का काम कर रही हैं. अब मशीन की मदद से कम समय में अधिक कुल्हड़ तैयार कर पा रही हैं. इससे बच्चों की पढ़ाई-लिखाई और घर के खर्चों में सहयोग मिल रहा है. उनके अनुसार, घर बैठे रोजगार मिलने से समय का भी बेहतर उपयोग हो रहा है.
दीपावली में दीये के साथ कुल्हड़ का भी हो रहा उत्पादन
फिलहाल दीपावली के अवसर पर यहां मिट्टी के दीये तैयार किए जा रहे हैं. त्योहार को देखते हुए दीयों की मांग बढ़ने के कारण उत्पादन पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है. इसके साथ ही कुल्हड़ बनाने का काम भी जारी है. संगीता देवी बताती हैं कि वह एक घंटे में करीब 150 कुल्हड़ तैयार कर लेती हैं. मशीन से काम आसान होने के कारण महिलाएं भी इस व्यवसाय में बढ़-चढ़कर हिस्सा ले रही हैं. अर्जुन प्रजापति ने बताया कि अरविंद सर के माध्यम से उन्हें सरकारी योजना और अनुदान की जानकारी मिली थी, जिसके बाद उन्होंने इस दिशा में काम शुरू किया. आज सरकारी सहायता, मशीन और मेहनत के दम पर यह कारोबार उनके परिवार के साथ दूसरे लोगों के लिए भी रोजगार का साधन बन रहा है.
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