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Jamshedpur Celebrating Sir Dorabji Tata 167th Birth Anniversary: सर दोराबजी टाटा की 167वीं जयंती पर जमशेदपुर उनके योगदान को याद कर रहा है. उन्होंने टाटा आयरन एंड स्टील कंपनी की स्थापना की और शहर को एक आधुनिक औद्योगिक केंद्र में बदला. जमशेदपुर के विकास में उनका अहम योगदान रहा.
27 अगस्त 1859 को जन्मे सर दोराबजी टाटा की आज 167वीं जयंती है. जमशेदपुर के लिए यह दिन इसलिए खास है, क्योंकि शहर की पहचान और विकास की कहानी में उनका योगदान बेहद महत्वपूर्ण रहा है. जमशेदजी टाटा के निधन के बाद उनके सपने को पूरा करने की जिम्मेदारी सर दोराबजी टाटा ने संभाली. सिंहभूम क्षेत्र में लौह अयस्क और अन्य संसाधनों की तलाश के बाद साकची को स्टील प्लांट के लिए चुना गया. 1907 में टाटा आयरन एंड स्टील कंपनी की स्थापना हुई और धीरे-धीरे साकची एक औद्योगिक शहर में बदलने लगा.
सर दोराबजी टाटा के जीवन की सबसे प्रेरक बात उनका त्याग है. स्टील कंपनी की शुरुआती यात्रा में जब आर्थिक संकट आया, तब उन्होंने कंपनी को बचाने के लिए अपनी निजी संपत्ति तक दांव पर लगा दी. उन्होंने अपने निजी आभूषण और संपत्ति गिरवी रखकर कंपनी को संकट से बाहर निकालने में मदद की. जिस उद्योग को आज देश की बड़ी औद्योगिक विरासतों में गिना जाता है, उसके शुरुआती दौर में उन्होंने अपना सब कुछ जोखिम में डाल दिया था.
उनकी सोच सिर्फ स्टील बनाने तक सीमित नहीं थी. वे चाहते थे कि जिस शहर में उद्योग खड़ा हो, वहां काम करने वाले लोगों और उनके परिवारों को भी बेहतर जिंदगी मिले. इसी सोच से जमशेदपुर में आवास, सड़क, पानी, स्वास्थ्य, शिक्षा, खेल और हरियाली जैसी सुविधाओं के विकास पर जोर दिया गया. यही दूरदृष्टि आगे चलकर जमशेदपुर की खास पहचान बनी.
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आज भी सर दोराबजी टाटा की विरासत जमशेदपुर में दिखाई देती है. उनके नाम से जुड़े ट्रस्ट और संस्थाएं शिक्षा, स्वास्थ्य, खेल और समाजसेवा के क्षेत्र में योगदान दे रही हैं. शहर में मौजूद सर दोराबजी टाटा पार्क भी उनकी स्मृति को जीवित रखता है. यही वजह है कि जमशेदपुर की जनता के दिल में उनके लिए आज भी गहरा सम्मान है.
आज उनकी 167वीं जयंती पर जमशेदपुर उस महान व्यक्तित्व को नमन कर रहा है, जिसने सिर्फ एक उद्योग नहीं, बल्कि एक पूरे शहर के भविष्य की नींव मजबूत की. सर दोराबजी टाटा ने रोजगार, विकास और उम्मीद की ऐसी विरासत छोड़ी, जिस पर आज का जमशेदपुर खड़ा है. इसलिए यहां के लोगों के लिए वे केवल इतिहास का हिस्सा नहीं, बल्कि शहर की पहचान और आत्मा से जुड़े एक ऐसे नाम हैं, जिन्हें आज भी बेहद सम्मान और श्रद्धा से याद किया जाता है.