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झारखंड के प्राथमिक विद्यालयों में कार्यरत करीब 50 हजार पारा शिक्षकों को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट में पारा शिक्षकों के नियमितीकरण से जुड़ी याचिका पर सुनवाई हुई। जस्टिस पंकज मित्तल और जस्टिस एसवीएन भट्टी की अदालत ने सुनील कुमार यादव समेत अन्य पारा शिक्षकों की याचिका पर सुनवाई करते हुए सहायक शिक्षक के 50 प्रतिशत पदों पर पारा शिक्षकों की नियुक्ति करने का निर्देश दिया। अदालत ने झारखंड सरकार को निर्देश दिया कि सहायक शिक्षक और सहायक आचार्य के 50 प्रतिशत आरक्षित पदों पर नियुक्ति के लिए विशेष रूप से पारा शिक्षकों से आवेदन आमंत्रित करने की अधिसूचना जारी की जाए। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने पारा शिक्षकों को सीधे नियमित करने की मांग खारिज कर दी। कोर्ट ने कहा कि झारखंड प्राथमिक विद्यालय शिक्षक भर्ती नियमावली, 2012 और झारखंड प्राथमिक विद्यालय सहायक आचार्य संवर्ग नियमावली, 2022 के तहत पहले से बने नियमों को लागू करना राज्य सरकार की जिम्मेदारी होगी। -शेष पेज 9 पर टिप्पणी: शिक्षा में अस्थायी व्यवस्था समाप्त होनी चाहिए सुप्रीम कोर्ट ने अस्थायी व्यवस्था पर कड़ी टिप्पणी भी की। कहा कि राज्य सरकार को शिक्षा क्षेत्र में अस्थायी व्यवस्था समाप्त करनी चाहिए। शिक्षण सेवाओं में स्थिरता का वातावरण होना जरूरी है। अदालत ने कहा कि रोजगार की सुरक्षा की भावना किसी भी सेवा में दक्षता बढ़ाने की अनिवार्य शर्त है। शिक्षा भी इससे अलग नहीं है। अब समय आ गया है कि कार्यपालिका समय-समय पर प्रदर्शन का मूल्यांकन करे। हर साल 10 हफ्ते में भर्ती प्रक्रिया पूरी करने का निर्देश सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार को हर साल नियुक्ति प्रक्रिया तय कैलेंडर के अनुसार पूरी करने का निर्देश दिया है। चालू शैक्षणिक वर्ष के लिए राज्य सरकार को चार सप्ताह के भीतर रिक्तियों का निर्धारण करने और विज्ञापन जारी होने की तारीख से 10 सप्ताह के भीतर भर्ती प्रक्रिया पूरी करने को कहा गया है। अदालत ने कहा कि हर साल 31 मार्च तक रिक्तियां निर्धारित की जाएं और उनमें से 50 प्रतिशत पद पारा शिक्षकों के लिए आरक्षित किए जाएं। इसके बाद 31 मई तक चयन प्रक्रिया पूरी की जाए।
शिक्षकों की भारी कमी बनी राहत का आधार याचिकाकर्ताओं ने हाईकोर्ट के आदेश के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की थी। इसमें झारखंड में शिक्षकों की कमी का हवाला दिया गया था। पारा शिक्षकों ने बताया था कि राज्य के 24 जिलों के सरकारी स्कूलों में करीब 1.50 लाख सहायक शिक्षकों की कमी है। सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं की ओर से पेश किए गए आंकड़ों को अदालत ने राहत देने का आधार माना। कोर्ट ने कहा कि प्राथमिक व मध्य विद्यालयों में शिक्षकों की भारी कमी है। प्राथमिक विद्यालयों में 83,595 पद और उच्च प्राथमिक विद्यालयों में 37,133 पद खाली हैं। ऐसे में सहायक शिक्षकों के 50% पारा शिक्षकों से भरना उचित होगा।
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