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खूंखार महिला नक्सली शकुंतला ने कोलकाता पुलिस के सामने आत्मसमर्पण कर दिया है. उसने 19 साल पहले जमशेदपुर के सांसद सुनील महतो की सरेआम हत्या की थी. फुटबॉल मैदान में घुसकर सांसद और उनके साथियों को गोलियों से भूना गया था. शकुंतला ने मृत सांसद की छाती पर चढ़कर क्रूर जश्न मनाया था. आइये विस्तार से जानते हैं पूरी कहानी…
AI से तैयार प्रतिकात्मक फोटो
रांची/जमशेदपुर: खूंखार महिला नक्सली शकुंतला उर्फ गुप्ता ने कोलकाता पुलिस के सामने आत्मसमर्पण कर दिया है. इस खबर के सामने आते ही झारखंड का एक पुराना और खौफनाक पन्ना फिर से खुल गया है. यह कहानी 19 साल पहले पूर्वी सिंहभूम के एक फुटबॉल मैदान में खेले गए खूनी खेल की है. इस जघन्य वारदात में जमशेदपुर के तत्कालीन सांसद सुनील महतो की सरेआम हत्या कर दी गई थी. इस पूरे हत्याकांड की मुख्य सूत्रधार शकुंतला ही थी. उसने न सिर्फ सांसद को मौत के घाट उतारा, बल्कि मानवता को शर्मसार करने वाला जश्न भी मनाया था.
फुटबॉल मैदान में बिछ गई थीं लाशें
तारीख थी 4 मार्च 2007. पूर्वी सिंहभूम के बाकरिया गांव के मैदान में एक फुटबॉल मैच का आयोजन किया गया था. इस मैच में मुख्य अतिथि के रूप में जमशेदपुर के लोकप्रिय सांसद सुनील महतो पहुंचे थे. मैदान में उनका जोरदार स्वागत किया गया. चारों तरफ जश्न और उत्साह का माहौल था. सुनील महतो को इस बात का जरा भी अंदाजा नहीं था कि मौत उनके बेहद करीब खड़ी है.
मैच अभी चल ही रहा था कि अचानक हथियारबंद नक्सलियों का एक दस्ता वहां आ धमका. इससे पहले कि कोई कुछ समझ पाता, नक्सलियों ने अंधाधुंध फायरिंग शुरू कर दी. गोलियों की तड़तड़ाहट से पूरा इलाका गूंज उठा. इस भीषण हमले में सांसद सुनील महतो, उनके दो बॉडीगार्ड और जेएमएम के एक स्थानीय नेता की मौके पर ही मौत हो गई.
दहशत के मंजर के बीच छाती पर जश्न
अचानक हुई गोलीबारी से मैदान में अफरा-तफरी मच गई. अपनी जान बचाने के लिए पूरी भीड़ बाहर की तरफ भागी. कुछ ही मिनटों में पूरा मैदान खाली हो गया. वहां सिर्फ हमलावर नक्सली और चार लहूलुहान लाशें बची थीं.
इसके बाद जो हुआ, उसने सबको झकझोर कर रख दिया. सांसद सुनील महतो को गोलियों से छलनी करने के बाद नक्सली शकुंतला ने एक वीभत्स रूप अख्तियार किया. लाशों से खून बह रहा था. उसी बीच शकुंतला मृत सांसद की छाती पर चढ़ गई. उसने वहां पैर रखकर अपनी जीत का जश्न मनाया और हवा में हथियार लहराए.
11 नक्सलियों की मौत का लिया था बदला
नक्सली शकुंतला के इस क्रूर जश्न के पीछे प्रतिशोध की एक गहरी आग थी. दरअसल, कुछ समय पहले पूर्वी सिंहभूम के लांगो गांव में ग्रामीणों ने एकजुट होकर 11 नक्सलियों को मार गिराया था. नक्सली संगठन इस हार से बौखलाया हुआ था. शकुंतला अपने 11 साथियों की मौत का जिम्मेदार सांसद सुनील महतो को मानती थी. उसने मन ही मन बदला लेने की कसम खाई थी. इसी बदले को पूरा करने के लिए उसने फुटबॉल मैच के दिन को चुना और नक्सल इतिहास की सबसे वीभत्स घटनाओं में से एक को अंजाम दिया.
10 साल की उम्र में थामा था हथियार
शकुंतला मूल रूप से पश्चिम बंगाल के झारग्राम अंतर्गत बेलपहाड़ी इलाके की रहने वाली है. उसकी जिंदगी बचपन से ही अपराध के रास्ते पर चल पड़ी थी. महज 10 साल की उम्र में उसने नक्सली संगठन जॉइन कर लिया था. इसके बाद उसने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा। पुलिस की आंखों में धूल झोंकने के लिए वह लगातार अपने नाम बदलती रही. उसने कभी ‘वर्षा’, कभी ‘परी’ तो कभी ‘गुप्ता’ नाम का सहारा लेकर सुरक्षाबलों की नाक में दम कर रखा था.
स्क्वाड कमांडर से प्यार, फिर शादी
साल 2005 में शकुंतला की मुलाकात झारग्राम के स्क्वाड कमांडर अतुल महतो से हुई. संगठन में काम करते-करते दोनों के बीच प्रेम हो गया. इसी साल दोनों ने शादी कर ली. इसके बाद शकुंतला और अधिक सक्रिय होकर बड़ी नक्सली घटनाओं को अंजाम देने लगी.
अब इतने सालों बाद जब शकुंतला ने कोलकाता पुलिस के सामने घुटने टेक दिए हैं, तो न्याय की उम्मीद फिर से जगी है. इस आत्मसमर्पण ने झारखंड और बंगाल पुलिस को राहत तो दी है, लेकिन सुनील महतो के समर्थकों के जख्मों को एक बार फिर हरा कर दिया है.
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मीडिया में 6 साल का अनुभव है. करियर की शुरुआत ETV Bharat (बिहार) से बतौर कंटेंट एडिटर की थी, जहां 3 साल तक काम किया. पिछले 3 सालों से Network 18 के साथ हूं. यहां बिहार और झारखंड से जुड़ी खबरें पब्लिश करता हूं.