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सावन की अंतिम सोमवारी पर कोडरमा में सोमवार को आस्था और भक्ति का सैलाब उमड़ पड़ा। श्री राम संकीर्तन मंडल की ओर से आयोजित कांवर पदयात्रा में बड़ी संख्या में शिवभक्त शामिल हुए। अहले सुबह से ही झुमरीतिलैया के झरनाकुंड धाम से कांवरियों का जत्था जल लेकर ध्वजाधारी पहाड़ की ओर निकल पड़ा। पूरा मार्ग बोल बम और हर-हर महादेव के जयकारों से गूंजता रहा। शिवभक्त भक्ति गीतों पर झूमते हुए बाबा भोलेनाथ के जलाभिषेक के लिए आगे बढ़ते रहे। इस यात्रा में कोडरमा के अलावा चतरा, हजारीबाग और गिरिडीह सहित अन्य जिलों से भी श्रद्धालु पहुंचे। श्रद्धालुओं में अंतिम सोमवारी को लेकर खासा उत्साह देखा गया। 15 किमी पैदल यात्रा के बाद 777 सीढ़ियां चढ़े कांवरिए शिवभक्त झुमरीतिलैया स्थित झरनाकुंड धाम से जल उठाकर करीब 15 किलोमीटर की पैदल कांवर यात्रा कर ध्वजाधारी धाम पहुंचे। यात्रा का रास्ता जंगल के दुर्गम इलाकों से होकर गुजरता है। ध्वजाधारी पहाड़ पहुंचने के बाद कांवरियों ने 777 सीढ़ियां चढ़कर पहाड़ पर स्थित भगवान शिव का जलाभिषेक किया। श्रद्धालुओं ने बाबा भोलेनाथ से परिवार की सुख-समृद्धि और खुशहाली की कामना की। मान्यता है कि सावन के महीने में ध्वजाधारी धाम में भगवान शिव की पूजा-अर्चना और जलाभिषेक करने से भक्तों की मनोकामनाएं पूरी होती हैं। इसी आस्था के कारण हर वर्ष अंतिम सोमवारी पर यहां बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं। इस दौरान कांवरियों की सेवा के लिए यात्रा मार्ग में जगह-जगह शिविर लगाए गए। सामाजिक और राजनीतिक संगठनों के सदस्यों ने श्रद्धालुओं को शर्बत, नींबू पानी और फलाहार उपलब्ध कराया। प्रशासन मुस्तैद, जगह-जगह बैरिकेडिंग कांवर पदयात्रा में उमड़ी भीड़ को देखते हुए जिला प्रशासन भी पूरी तरह मुस्तैद रहा। यात्रा मार्ग पर जगह-जगह बैरिकेडिंग की गई, ताकि पैदल चल रहे शिवभक्तों को परेशानी नहीं हो। पुलिस बल की तैनाती कर भीड़ और यातायात व्यवस्था को नियंत्रित किया गया। प्रशासन और पुलिसकर्मी लगातार कांवरियों की सुरक्षा और सुविधा पर नजर बनाए रहे। वहीं, सेवा शिविरों में भी स्वयंसेवक श्रद्धालुओं की मदद करते नजर आए। अंतिम सोमवारी पर कोडरमा की सड़कों से लेकर ध्वजाधारी पहाड़ तक हर तरफ भगवा रंग और कांवरियों की भीड़ दिखाई दी। बोल बम और हर-हर महादेव के जयघोष के बीच श्रद्धालु पूरे उत्साह और आस्था के साथ बाबा भोलेनाथ के दरबार की ओर बढ़ते रहे।
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