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10 अगस्त 2026 को सावन सोमवार और सोम प्रदोष व्रत का शुभ संयोग बन रहा है. इस दिन प्रदोष काल में शिव पूजा से मनोकामनाएं पूरी होंगी. रुद्राभिषेक और जलाभिषेक करने से विवाह में बाधा, आर्थिक तंगी और पारिवारिक तनाव दूर होगा. भक्तों को विशेष पुण्य और सुख-शांति मिलेगी.
देवघरः सावन का महीना भगवान भोलेनाथ की भक्ति के लिए सबसे पवित्र माना जाता है. इस बार सावन की दूसरी सोमवारी 10 अगस्त 2026 को पड़ रही है और इस दिन एक ऐसा दुर्लभ संयोग बन रहा है, जिसका इंतजार शिव भक्त वर्षों से करते हैं.पंचांग के अनुसार इस दिन सोमवार के साथ त्रयोदशी तिथि पड़ रही है, जिसके कारण सोम प्रदोष व्रत का भी संयोग बन रहा है.धार्मिक मान्यताओं के अनुसार सावन सोमवार और सोम प्रदोष का एक साथ आना अत्यंत पुण्यदायी माना जाता है. बैद्यनाथ ज्योतिर्लिंग के तीर्थपुरोहित सह ज्योतिषाचार्य प्रमोद श्रृंगारी बताते हैं कि कई वर्षों बाद ऐसा शुभ संयोग बना है.इससे पहले वर्ष 2020 में ऐसा योग बना था. ऐसे में इस दिन भगवान शिव की विधि-विधान से पूजा करने वाले श्रद्धालुओं की मनोकामनाएं जल्द पूरी होने की मान्यता है.
प्रदोष तिथि में भगवान शिव की पूजा अत्यंत शुभ:
ज्योतिषाचार्य प्रमोद श्रृंगारी बताते हैं कि स्कंद पुराण में प्रदोष व्रत का विशेष महत्व बताया गया है.मान्यता है कि त्रयोदशी तिथि की प्रदोष बेला में भगवान शिव कैलाश पर्वत पर समस्त देवी-देवताओं के बीच आनंद तांडव करते हैं. यही कारण है कि इस समय की गई शिव आराधना, मंत्र जाप, जलाभिषेक और रुद्राभिषेक का फल सामान्य दिनों की तुलना में कई गुना अधिक मिलता है.भगवान शिव अपने भक्तों पर शीघ्र प्रसन्न होकर उनकी मनोकामनाएं पूर्ण करते हैं और जीवन में चल रही अनेक प्रकार की बाधाओं को दूर करते हैं.
जानिए पूजा का शुभ मुहूर्त:
अगर इस दिन के शुभ मुहूर्त की बात करें तो सावन सोमवार की पूजा के लिए सुबह 5 बजकर 47 मिनट से 7 बजकर 27 मिनट तक का समय बेहद शुभ रहेगा.इसके बाद सुबह 9 बजकर 07 मिनट से 10 बजकर 47 मिनट तक भी शिव पूजा का उत्तम मुहूर्त रहेगा. वहीं सोम प्रदोष व्रत की पूजा के लिए शाम की प्रदोष बेला सबसे महत्वपूर्ण मानी गई है. इस दिन शाम 7 बजकर 05 मिनट से रात 9 बजकर 14 मिनट तक भगवान भोलेनाथ की विशेष पूजा-अर्चना करना अत्यंत फलदायी रहेगा.
इस दिन पंचोपचार से करनी चाहिए पूजा आराधना:
ज्योतिषाचार्य के अनुसार सावन में आने वाला हर सोमवार अपने आप में विशेष होता है, लेकिन जब सोमवार के दिन ही त्रयोदशी तिथि पड़ जाए और सोम प्रदोष व्रत का संयोग बन जाए, तब इसका महत्व और भी बढ़ जाता है. इस दिन शिवलिंग पर गंगाजल, दूध, दही, शहद, बेलपत्र, धतूरा, भांग, सफेद चंदन और आक के फूल अर्पित कर ॐ नमः शिवाय तथा महामृत्युंजय मंत्र का जाप करना अत्यंत शुभ माना गया है.श्रद्धालु यदि पूरे श्रद्धा भाव से व्रत रखकर भगवान शिव की आराधना करें तो उन्हें विशेष कृपा प्राप्त होती है.
खत्म होती सभी नकरात्मक शक्तियां:
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस शुभ संयोग में किया गया रुद्राभिषेक और जलाभिषेक सामान्य दिनों की तुलना में अधिक फलदायी माना जाता है. जिन लोगों के विवाह में लगातार बाधाएं आ रही हैं या योग्य जीवनसाथी की तलाश पूरी नहीं हो पा रही है, उनकी मनोकामना भगवान शिव की कृपा से जल्द पूरी हो सकती है.दांपत्य जीवन में चल रहे तनाव, पति-पत्नी के बीच मतभेद और प्रेम संबंधों में आ रही परेशानियां भी दूर होने की मान्यता है.इतना ही नहीं, संतान सुख की इच्छा रखने वाले दंपतियों, परिवार के सदस्यों के अच्छे स्वास्थ्य और लंबी आयु की कामना करने वालों के लिए भी यह दिन बेहद शुभ माना गया है. मान्यता है कि इस दिन सच्चे मन से शिव पूजा करने पर आर्थिक तंगी, कर्ज, मानसिक तनाव और जीवन में चल रही नकारात्मक परिस्थितियों से भी राहत मिलने लगती है. घर में यदि लंबे समय से विवाद या अशांति का माहौल हो तो प्रदोष काल में भगवान शिव की पूजा और मंत्र जाप करने से परिवार में सुख-शांति का वातावरण बनता है और आपसी मतभेद दूर होने लगते हैं.
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प्रसून सिंह को मीडिया में 7 साल काम करने का अनुभव है. खबरों को डिजिटल प्लेटफॉर्म पर रोचक अंजाद में पेश करना खासियत है. दैनिक भास्कर अखबार में इंटर्नशिप के साथ करियर की शुरुआत हुई.
इसके बाद ETV Bharat (बिहार)…
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