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छत्तीसगढ़ की पारंपरिक रसोई में भी कई ऐसे व्यंजन हैं, जिनका स्वाद त्योहार और धार्मिक अवसरों से जुड़ा हुआ है. इन्हीं में से एक है दूद फरा, जो दूध और चावल के आटे से तैयार होने वाली स्वादिष्ट और पारंपरिक मिठाई है. सावन में इसे सात्विक तरीके से तैयार कर भगवान भोलेनाथ को भोग लगाया जा सकता है. पूजा के बाद प्रसाद के रूप में ग्रहण किया जाता है.
सावन का महीना भगवान शिव की भक्ति और पूजा-अर्चना के लिए बेहद खास माना जाता है. इस दौरान भक्त भोलेनाथ को अलग-अलग तरह के फल, मिठाई और पारंपरिक पकवानों का भोग लगाते हैं. छत्तीसगढ़ की पारंपरिक रसोई में भी कई ऐसे व्यंजन हैं, जिनका स्वाद त्योहार और धार्मिक अवसरों से जुड़ा हुआ है. इन्हीं में से एक है दूद फरा, जो दूध और चावल के आटे से तैयार होने वाली स्वादिष्ट और पारंपरिक मिठाई है. सावन में इसे सात्विक तरीके से तैयार कर भगवान भोलेनाथ को भोग लगाया जा सकता है. पूजा के बाद प्रसाद के रूप में ग्रहण किया जाता है.
दूध और चावल से तैयार होता है दूद फर
दूद फरा बनाने के लिए मुख्य रूप से चावल का आटा और दूध का इस्तेमाल किया जाता है. चावल के आटे को गुनगुने पानी से गूंधकर छोटे-छोटे नरम फरे तैयार किए जाते हैं. इन्हें उबलते दूध में पकाया जाता है. दूध में पकने के बाद फरे बेहद मुलायम हो जाते हैं और उनका स्वाद काफी खास लगता है.
मेवों से बढ़ जाता है स्वाद
दूद फरा को और स्वादिष्ट बनाने के लिए इसमें काजू, बादाम, किशमिश और छुहारा डाला जाता है. इलायची की खुशबू इस पारंपरिक मिठाई का स्वाद और बढ़ा देती है. जरूरत के अनुसार गुड़ मिलाकर इसे प्राकृतिक मिठास दी जा सकती है.
सावन में भोलेनाथ को लगाएं भोग
सावन में भगवान शिव की पूजा के दौरान भक्त सात्विक भोजन को विशेष महत्व देते हैं. ऐसे में घर पर तैयार किया गया दूद फरा भगवान भोलेनाथ को भोग के रूप में अर्पित किया जा सकता है. पूजा के बाद इसे परिवार के सदस्यों के बीच प्रसाद के तौर पर बांट सकते हैं. हालांकि व्रत रखने वाले लोग अपनी व्रत-परंपरा और इस्तेमाल किए जाने वाले अनाज के नियम के अनुसार ही इसका सेवन करें.
ऐसे बनाएं स्वादिष्ट दूद फरा
सबसे पहले चावल के आटे को गुनगुने पानी की मदद से अच्छी तरह गूंधकर मुलायम आटा तैयार करें. अब इसकी छोटी-छोटी लोइयां बनाकर उन्हें फरे का आकार दें. दूसरी तरफ एक पैन में दूध गर्म करें और उसमें इलायची पाउडर डालकर उबाल आने दें. दूध में उबाल आने के बाद तैयार फरे डालें और धीमी आंच पर पकाएं.जब फरे अच्छी तरह पककर नरम हो जाएं और दूध के साथ अच्छी तरह मिल जाएं, तब इसमें काजू, बादाम, किशमिश और बारीक कटे छुहारे डालें. अंत में स्वादानुसार गुड़ मिलाएं और कुछ मिनट तक धीमी आंच पर पकने दें. तैयार है छत्तीसगढ़ी अंदाज का स्वादिष्ट दूद फरा.
परंपरा और भक्ति का अनोखा संगम
छत्तीसगढ़ के पारंपरिक व्यंजनों की खासियत यही है कि इनमें स्थानीय स्वाद के साथ संस्कृति और परंपरा की झलक भी देखने को मिलती है. सावन में भोलेनाथ को भोग लगाने के लिए दूद फरा एक अलग और स्वादिष्ट विकल्प हो सकता है. दूध, चावल और मेवों से तैयार यह पकवान घर में भक्ति के साथ-साथ पारंपरिक स्वाद का माहौल भी बना देता है.