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सीएम फेलोशिप योजना में तकनीकी पेंच:स्थानीय निवासी होने के बाद भी सीयूजे-आईएसएम...




उच्च एवं तकनीकी शिक्षा विभाग से शिकायत के बाद भी नहीं निकल रहा हल झारखंड सरकार की सीएम फेलोशिप फॉर एकेडमिक फॉर एक्सीलेंस योजना तकनीकी पेंच में फंस गई है। इससे राज्य का मूल निवासी होने के बावजूद सीयूजे और आईएसएम जैसे नामी-गिरामी शिक्षण संस्थानों के छात्रों को इसका फायदा नहीं मिल रहा है। क्योंकि सरकारी कागजों में उनके संस्थान राजकीय या निजी यूनिवर्सिटी के बॉक्स में फिट नहीं बैठते हैं। नतीजा यह है कि इन संस्थानों के स्टूडेंट्स ऑनलाइन आवेदन करते हैं तो अर्हता पूरी न करने के नाम पर उसे रद्द कर दिया जाता है। छात्रों ने उच्च एवं तकनीकी शिक्षा विभाग से इसकी शिकायत की है, लेकिन अब तक कोई हल नहीं निकला है। इन संस्थानों के छात्रों को नही मिल रहा लाभ… सेंट्रल यूनिवर्सिटी ऑफ झारखंड, बीआईटी मेसरा, एनआईटी जमशेदपुर, एम्स देवघर,आईआईटी-आईएसएम धनबाद,नेशनल यूनिवर्सिटी ऑफ स्टडी एंड रिसर्च इन लॉ रांची, आईआईएम रांची, आईआईटी और अन्य बाहरी संस्थान। राजकीय और निजी विश्वविद्यालय के तहत ये शिक्षण संस्थान नहीं आते हैं। मुख्यमंत्री फेलोशिप योजना के ये हैं पांच कंपोनेंट पीएचडी रिसर्च फेलोशिप : झारखंड के पीएचडी शोधार्थियों को हर महीने 25 हजार रुपए स्टाइपेंड दिया जाता है। हर साल 1000 नए छात्रों को इसका लाभ देना है।
शोध-पत्र प्रस्तुत करने के लिए प्रोत्साहन: राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय सेमिनार या सम्मेलन में शोध-पत्र प्रस्तुत करने के लिए आर्थिक सहायता दी जाती है। यह राशि दो लाख रुपए तक है।
विदेशी विश्वविद्यालयों में पढ़ाई के लिए छात्रवृत्ति: इसमें चयनित विदेशी विश्वविद्यालयों में अध्ययन करने वाले पात्र छात्रों को पूरी ट्यूशन फीस और सालाना 6 लाख रुपए तक का जीवन-यापन भत्ता दिया जाता है।
टीचिंग असिस्टेंटशिप : इसमें उच्च शिक्षण संस्थानों के योग्य विद्यार्थियों को शिक्षण सहायक के रूप में काम करने का अवसर और सहायता दी जाती है। इसमें हर महीने दो हजार रुपए मिलते हैं।
शोध सहायकता: इसमें शोध परियोजनाओं में कार्य करने वाले शोध सहायकों को अनुदान-मानदेय दिया जाता है, जिससे वे शोध गतिविधियों में सक्रिय भागीदारी कर सकें। इसमें हर माह 2 हजार रुपए कर मिलता है। उच्चस्तरीय समिति के सामने रखा जाएगा प्रस्ताव
सीएम फेलोशिप योजना को लेकर विभाग का एक संकल्प है। उसी में प्रावधानों को उल्लेख है। अभी जो नियम है, उसी के अनुरूप लाभुकों का चयन होता है। इसमें बदलाव करने का अधिकार उच्चस्तरीय समिति को है। ये मामले समिति के समक्ष रखे जाएंगे। प्रस्ताव पर उच्चस्तरीय समिति का जो निर्णय होगा उसी अनुरूप कार्रवाई होगी। -सुधीर बाड़ा, उच्च शिक्षा निदेशक



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