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सीएम हेमंत ने प्रधानमंत्री मोदी को लिखा पत्र:झारखंड को छात्रवृत्ति का पूरा...




मुख्यमंत्री ने कम आवंटन का हवाला देकर केंद्र से छात्रवृत्ति मद में अधिक सहायता मांगी मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने गुरुवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर पिछड़ा वर्ग, अनुसूचित जनजाति (एसटी), अनुसूचित जाति (एससी) और अल्पसंख्यक समुदाय के विद्यार्थियों के लिए केंद्रीय छात्रवृत्ति सहायता बढ़ाने की मांग की। उन्होंने कहा कि झारखंड को वास्तविक जरूरत के मुकाबले बहुत कम राशि मिल रही है। इससे लाखों विद्यार्थियों का भविष्य प्रभावित हो रहा है। मुख्यमंत्री ने प्री-मैट्रिक और पोस्ट-मैट्रिक छात्रवृत्ति योजनाओं में केंद्रांश बढ़ाने का आग्रह किया।
मुख्यमंत्री ने लिखा कि झारखंड सामाजिक और आर्थिक रूप से विकासशील राज्य है, जहां आधी से अधिक आबादी पिछड़ा वर्ग, एसटी, एससी और अन्य वंचित समुदायों से आती है। राज्य सरकार सीमित संसाधनों और कठिन भौगोलिक परिस्थितियों के बावजूद हर वर्ग तक शिक्षा पहुंचाने का प्रयास कर रही है। लेकिन केंद्र से मांग के अनुरूप बजट नहीं मिलने के कारण लाखों विद्यार्थियों को समय पर छात्रवृत्ति नहीं मिल पा रही है। आंकड़ों का दिया हवाला…मांग और आवंटन में बड़ा अंतर
मुख्यमंत्री ने पत्र में वित्तीय वर्षवार आंकड़ों का हवाला देते हुए बताया कि पिछड़ा वर्ग प्री-मैट्रिक छात्रवृत्ति के लिए वर्ष 2024-25 में राज्य ने 66.14 करोड़ रुपए की मांग भेजी थी, जबकि केंद्र से केवल 12.61 करोड़ रुपए मिले। वर्ष 2025-26 में 45.91 करोड़ रुपए की मांग के मुकाबले सिर्फ 3.95 करोड़ रुपए जारी किए गए। पिछड़ा वर्ग पोस्ट-मैट्रिक छात्रवृत्ति में वर्ष 2024-25 के लिए 353.21 करोड़ रुपए की मांग के एवज में 33.57 करोड़ रुपए मिले। वहीं वर्ष 2025-26 में 370.87 करोड़ रुपए की मांग के मुकाबले केवल 58.22 करोड़ रुपए स्वीकृत किए गए। मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि वर्ष 2024-25 में 23.78 करोड़ रुपए और 2025-26 में 32.70 करोड़ रुपए का नोटेशनल एलोकेशन किया गया, जो राज्य की जरूरतों की तुलना में बेहद कम है। एसटी, एससी व अल्पसंख्यक छात्रवृत्ति पर भी चिंता: मुख्यमंत्री ने पत्र में कहा कि वित्तीय वर्ष 2025-26 में जनजातीय कार्य मंत्रालय ने एसटी विद्यार्थियों की प्री-मैट्रिक और पोस्ट-मैट्रिक छात्रवृत्ति के लिए कोई राशि जारी नहीं की। वर्ष 2024-25 में जारी 200 करोड़ रुपए वास्तव में वर्ष 2022-23 का बकाया और 2023-24 की पहली किस्त थी। वर्ष 2023-24 का 58% केंद्रांश तथा 2024-25 और 2025-26 का पूरा केंद्रांश अभी भी लंबित है। मुख्यमंत्री जल्द केंद्राश जारी करने का आग्रह किया है।



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