कानपुर: कानपुर के छत्रपति शाहू जी महाराज विश्वविद्यालय के 41वें दीक्षांत समारोह में गुरुवार को उपलब्धियों, सम्मान और नई सोच का शानदार संगम देखने को मिला. समारोह में उत्तर प्रदेश की राज्यपाल एवं कुलाधिपति आनंदीबेन पटेल ने विश्वविद्यालय की प्रगति की खुलकर सराहना की और कहा कि पिछले सात वर्षों में सीएसजेएमयू ने जो नई पहचान बनाई है, उसके पीछे शिक्षकों, छात्रों और कर्मचारियों की मेहनत, समर्पण और टीमवर्क है.
राज्यपाल ने कहा कि वर्ष 2019 के दौरान विश्वविद्यालय कई चुनौतियों से जूझ रहा था. उस समय छात्र संख्या में कमी समेत कई समस्याएं थीं, लेकिन आज विश्वविद्यालय की तस्वीर पूरी तरह बदल चुकी है. वर्तमान में यहां 15 हजार से अधिक छात्र पढ़ाई कर रहे हैं और उन्हें आधुनिक सुविधाओं का लाभ भी मिल रहा है. उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय ने जिस तरह तेजी से विकास किया है, वह दूसरे संस्थानों के लिए भी एक उदाहरण है.
नई सुविधाओं से छात्रों को हुई आसानी
राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने कहा कि विश्वविद्यालय ने छात्रों के लिए कई नई सुविधाएं शुरू की हैं. फेसलेस सेवाओं के जरिए छात्र अब कई काम बिना कार्यालय आए ही कर सकते हैं. डिग्रियां छात्रों के घर तक कोरियर के माध्यम से पहुंचाई जा रही हैं. हॉस्टल केयर एप के जरिए छात्र अपनी समस्याओं और शिकायतों को सीधे अधिकारियों तक पहुंचा सकते हैं. इसके अलावा सर्वाइकल वैक्सीनेशन, अंतरराष्ट्रीय स्तर के क्रिकेट स्टेडियम और मल्टीस्पेशियलिटी अस्पताल जैसी सुविधाएं विश्वविद्यालय को नई पहचान दे रही हैं.उन्होंने कहा कि अब सीएसजेएमयू को किसी विशेष मार्गदर्शन की जरूरत नहीं है, क्योंकि यहां की पूरी टीम लगातार बेहतर काम कर रही है और नई ऊंचाइयों को हासिल कर रही है.
डिजीलॉकर से उपल्ध हुई मार्कशीट
अपने संबोधन में राज्यपाल ने छात्रों को एक अहम सलाह भी दी. उन्होंने बताया कि विभिन्न विश्वविद्यालयों के तीन लाख से अधिक छात्रों को डिजीलॉकर के माध्यम से डिग्रियां उपलब्ध कराई गईं, लेकिन उनमें से केवल 68 हजार छात्रों ने ही अपनी डिग्री डाउनलोड की. उन्होंने कहा कि छात्र केवल डिजीलॉकर में डिग्री आने का इंतजार न करें, बल्कि उसे डाउनलोड कर सुरक्षित भी रखें ताकि भविष्य में किसी प्रकार की परेशानी न हो.इसके साथ ही उन्होंने जल संरक्षण का संदेश देते हुए सभी लोगों से पानी बचाने की अपील की. उन्होंने कहा कि हर व्यक्ति को पानी की एक-एक बूंद की कीमत समझनी चाहिए और इसके संरक्षण के लिए अपनी जिम्मेदारी निभानी चाहिए.
शिल्पाचार्य अंचल पी. बिजलानी को मिली डी.लिट की मानद उपाधि
दीक्षांत समारोह के दौरान परंपरागत कच्छ चर्म शिल्प के प्रसिद्ध शिल्पाचार्य और उद्यमी अंचल पी. बिजलानी को डॉक्टर ऑफ लेटर्स (डी.लिट्.) की मानद उपाधि से सम्मानित किया गया. सम्मान प्राप्त करने के बाद उन्होंने कहा कि यह सम्मान केवल उनका नहीं बल्कि उनकी उस विरासत का सम्मान है, जिसे उनके पूर्वजों ने वर्षों तक संजोकर रखा है.उन्होंने युवाओं और शोधार्थियों से अपील की कि पारंपरिक हस्तशिल्प और लेदर क्राफ्ट को केवल सजावट की वस्तु न समझें, बल्कि इसे भारत की सांस्कृतिक पहचान और ग्रामीण अर्थव्यवस्था की ताकत के रूप में आगे बढ़ाएं.
स्टार्टअप प्रदर्शित हुए, दो नए एप भी हुए लॉन्च
दीक्षांत समारोह के दौरान छात्रों ने अपने स्टार्टअप और नवाचारों का प्रदर्शन भी किया. इस मौके पर विश्वविद्यालय ने “नेवर एलोन एप” और “हॉस्टल केयर एप” को लॉन्च किया. कुलपति प्रो. विनय कुमार पाठक ने बताया कि नेवर एलोन एप मानसिक तनाव और अकेलेपन से जूझ रहे छात्रों की मदद करेगा, जबकि हॉस्टल केयर एप के जरिए छात्र अपनी समस्याओं को कुछ ही मिनटों में अधिकारियों तक पहुंचा सकेंगे.कार्यक्रम में एक लाख से अधिक छात्र-छात्राओं को डिग्रियां प्रदान की गईं. समारोह में दिल्ली विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. योगेश सिंह मुख्य अतिथि के रूप में मौजूद रहे. वहीं उच्च शिक्षा मंत्री योगेंद्र उपाध्याय, राज्यमंत्री रजनी तिवारी समेत कई गणमान्य लोग भी कार्यक्रम में शामिल हुए.