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सील तरंगनी लिकर्स का ताला मजिस्ट्रेट की मौजूदगी में खुला:राजद के पूर्व...




ओरमांझी स्थित मेसर्स तरंगनी लिकर्स प्राइवेट लिमिटेड (टाई-अप: मेसर्स रेडिको खेतान लि.) बॉटलिंग प्लांट में उत्पाद विभाग और पुलिस की नाक के नीचे कानून और व्यवस्था की धज्जियां उड़ाने वाला सनसनीखेज मामला सामने आया है। एक जुलाई को छापेमारी में भारी मात्रा में अवैध विदेशी शराब पकड़े जाने के बाद जिस बॉटलिंग प्लांट को सरकारी सील लगाकर बंद किया गया था, उसी सीलबंद प्लांट से निगरानी के बावजूद शराब व महत्वपूर्ण साक्ष्य चोरी हो गए हैं। डेढ़ माह के बाद सोमवार को जब लंबे इंतजार के बाद प्रतिनियुक्त दंडाधिकारी (मजिस्ट्रेट) की मौजूदगी में आगे की वैधानिक जांच व पुनः निरीक्षण के लिए सील तोड़ा गया, तो अंदर का नजारा देख अधिकारियों के होश उड़ गए। बॉटलिंग प्लांट के पीछे के दरवाजे का ताला टूटा हुआ मिला और अहम सामान गायब थे। विगत दिनों गुप्त सूचना के आधार पर ओरमांझी थाना और उत्पाद विभाग की संयुक्त टीम ने उक्रीद स्थित तरंगनी लिकर्स में औचक छापेमारी की थी। मौके से भारी मात्रा में अवैध शराब, बीयर और तस्करी में प्रयुक्त ट्रक जब्त करते हुए प्लांट को सील कर दिया गया था। इस मामले में अनुज्ञप्तिधारी (लाइसेंसी) व राजद के पूर्व एमएलसी सुबोध कुमार, देवेंद्र भगत, रविकांत राय की गिरफ्तारी हुई थी। इन्हें जेल भेजा गया था। ओरमांझी थाना प्रभारी ने कहा कि ताला तोड़ चोरी की जानकारी मिली है। प्राथमिकी दर्ज कर कार्रवाई की जाएगी। इधर, देर रात बॉटलिंग प्लांट को फिर से सील किया गया। सील करने के कुछ दिन बाद होनी चाहिए थी जांच, हुई नहीं नियमानुसार मामले की अग्रतर जांच, स्टॉक के डिजिटल मिलान व भौतिक सत्यापन के लिए प्रशासन द्वारा मजिस्ट्रेट की प्रतिनियुक्ति की गई थी। लेकिन मजिस्ट्रेट समय पर जांच करने नहीं पहुंचे। डेढ़ महीने के लंबे अंतराल का फायदा उठाते हुए सीलबंद परिसर में सुनियोजित तरीके से सेंधमारी की गई। सवाल उठता है कि जब प्लांट सील था और उसकी सुरक्षा व निगरानी की संयुक्त जिम्मेदारी स्थानीय पुलिस तथा उत्पाद विभाग पर थी, तो परिंदा भी पर नहीं मार सकता था। फिर शराब की पेटियां व अन्य साक्ष्य कैसे गायब हो गईं। केस को रफा-दफा करने की साजिश, साक्ष्य गायब कानूनी विशेषज्ञों और सूत्रों का मानना है कि यह शराब माफिया को कोर्ट में क्लीन चिट दिलाने के लिए रची गई सोची-समझी साजिश का हिस्सा है। अब अभियोजन पक्ष के लिए यह सिद्ध करना बेहद कठिन हो जाएगा कि अन्य राज्यों (यूपी/दिल्ली) के रैपर लगाकर बेची जा रही शराब इसी फैक्ट्री से निकली थी।
1 जुलाई की छापेमारी में बरामद सामान
बरामद की गई शराब/बीयर का विवरण:



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