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Super El Nino 2026: भारत में साल 2026 का मानसून सीजन बड़े खतरे की घंटी बजा रहा है. पैसिफिक महासागर में बन रहे सुपर अल नीनो के कारण इस बार उत्तर और मध्य भारत के कई शहरों में भीषण सूखे के आसार हैं. वहीं चेन्नई जैसे तटीय इलाकों में बाढ़ का खतरा है. मौसम विभाग (IMD) ने अगस्त और सितंबर में कम बारिश की चेतावनी दी है.
सुपर अल नीनो 2026: भारत के कई शहरों में मचेगी भारी तबाही, IMD का अलर्ट. (Photo made with AI)
नई दिल्ली: मौसम विभाग (IMD) ने साल 2026 के लिए अपना पहला लॉन्ग रेंज फोरकास्ट जारी कर दिया है. इस रिपोर्ट के मुताबिक जून से सितंबर के बीच होने वाली मानसून की बारिश इस बार सामान्य से काफी कम रहने वाली है. इसका सबसे बड़ा कारण प्रशांत महासागर में बन रहा ‘सुपर अल नीनो’ है जो इस वक्त तेजी से आकार ले रहा है. यह एक ऐसी समुद्री घटना है जो पूरी दुनिया के मौसम को अस्त-व्यस्त करने की ताकत रखती है. भारत के लिए अल नीनो हमेशा से बुरी खबर लेकर आता है. जब भी अल नीनो मजबूत होता है तो यह भारत की मानसूनी हवाओं को कमजोर कर देता है. इसकी वजह से देश के बड़े हिस्से में बारिश कम होती है और सूखे जैसे हालात बन जाते हैं. हालांकि इसका एक दूसरा पहलू भी है जो काफी डरावना है.
एक तरफ जहां उत्तर और मध्य भारत में पानी की बूंद-बूंद के लिए तरसना पड़ता है, वहीं तमिलनाडु और आंध्र प्रदेश के तटीय इलाकों में यह भारी तबाही वाली बारिश लाता है. जलवायु वैज्ञानिक डॉक्टर माधवन नायर का कहना है कि यह अल नीनो 1997 और 2015 की तरह ही बेहद गंभीर हो सकता है.
क्या कहता है मौसम विभाग का ताजा अनुमान?
- आईएमडी ने भविष्यवाणी की है कि इस साल मानसून की बारिश लॉन्ग पीरियड एवरेज (LPA) का केवल 92 परसेंट ही रहेगी. इसे ‘बिलो नॉर्मल’ यानी सामान्य से कम की कैटेगरी में रखा जाता है.
- साल 1971 से 2020 के डेटा के आधार पर भारत में औसत बारिश 870 मिलीमीटर होनी चाहिए. इस बार इसकी संभावना काफी कम है कि हम इस आंकड़े को छू पाएंगे.
- आंकड़ों की मानें तो इस बार सूखे की स्थिति बनने की संभावना 35 परसेंट है. यह सामान्य सालों के मुकाबले दोगुने से भी ज्यादा है.
- दुनिया भर के क्लाइमेट मॉडल इशारा कर रहे हैं कि जून या जुलाई तक अल नीनो पूरी तरह सक्रिय हो जाएगा. राहत की बात सिर्फ इतनी है कि जून और जुलाई की शुरुआत में मानसून स्थिर रह सकता है.
असली परेशानी अगस्त और सितंबर में शुरू होगी जब अल नीनो अपना असली रंग दिखाएगा.
किन राज्यों और शहरों में बढ़ेगा सूखे का खतरा?
- सुपर अल नीनो का सबसे घातक असर उत्तर, पश्चिम और मध्य भारत पर पड़ने वाला है. पंजाब, हरियाणा और राजस्थान जैसे कृषि प्रधान राज्यों के लिए अगस्त का महीना बेहद चुनौतीपूर्ण होगा. यहां मानसूनी बारिश में भारी कमी देखी जा सकती है जिससे फसलों को बड़ा नुकसान होने की आशंका है.
- मध्य प्रदेश के कई बड़े शहर इस रडार पर हैं. इंदौर, उज्जैन, ग्वालियर, जबलपुर, रीवा और सागर जैसे इलाकों में सामान्य से बहुत कम बारिश का अनुमान है. इसके अलावा चंबल और नर्मदापुरम के क्षेत्रों में भी पानी की किल्लत बढ़ सकती है.
- हालांकि लद्दाख, उत्तर-पूर्व भारत और तेलंगाना जैसे कुछ हिस्सों पर इसका असर शायद कम पड़े. लेकिन दिल्ली-एनसीआर के लिए गर्मी और सूखे का दोहरा अटैक मुसीबत बन सकता है.
क्यों चेन्नई जैसे शहरों में बाढ़ का डर है?
- अल नीनो का मतलब सिर्फ सूखा नहीं होता है. यह भारत के तटीय इलाकों के लिए जलप्रलय का संकेत भी है. जब देश का बाकी हिस्सा सूखे से जूझ रहा होगा, तब चेन्नई और आंध्र प्रदेश के तटों पर भारी बारिश हो सकती है.
- इतिहास गवाह है कि 2015 के सुपर अल नीनो के दौरान चेन्नई पानी में डूब गया था. उस समय वहां जान-माल का भारी नुकसान हुआ था. इस बार भी वैज्ञानिकों ने चेतावनी दी है कि तटीय शहरों को बाढ़ से निपटने के लिए अभी से तैयारी कर लेनी चाहिए.
- मराठवाड़ा जैसे क्षेत्रों में पिछली बार 40 परसेंट तक बारिश की कमी दर्ज की गई थी. साल 2023 में भी अल नीनो की वजह से अकेले अगस्त महीने में 36 परसेंट कम बारिश हुई थी. महाराष्ट्र के नासिक, रायगढ़ और सतारा जैसे जिले इसके गवाह रहे हैं.
इस साल भी अगर वही पैटर्न दोहराया गया तो ग्रामीण अर्थव्यवस्था पूरी तरह चरमरा सकती है.
क्या इस संकट में कोई उम्मीद बाकी है?
इतनी डरावनी खबरों के बीच एक उम्मीद की किरण ‘इंडियन ओशन डिपोल’ (IOD) है. क्लाइमेट मॉडल के अनुसार मानसून के आखिरी महीनों में आईओडी पॉजिटिव हो सकता है. अगर ऐसा होता है तो यह अल नीनो के नेगेटिव असर को कुछ हद तक कम कर सकता है. इससे मानसूनी हवाओं को थोड़ी मजबूती मिल सकती है जिससे कुछ इलाकों में बारिश की वापसी संभव है.
भारत के 60 परसेंट किसान आज भी पूरी तरह मानसून की बारिश पर निर्भर हैं. खरीफ की फसलों का भविष्य इन्हीं चार महीनों पर टिका होता है. आईएमडी मई के आखिरी हफ्ते में एक अपडेटेड फोरकास्ट जारी करेगा. उस रिपोर्ट से यह साफ हो जाएगा कि सुपर अल नीनो का प्रभाव कितना गहरा होने वाला है.
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दीपक वर्मा News18 हिंदी के डिजिटल न्यूजरूम में डिप्टी न्यूज़ एडिटर के रूप में कार्यरत हैं. पत्रकारिता के क्षेत्र में एक दशक से भी ज्यादा का अनुभव रखने वाले दीपक मुख्य रूप से विज्ञान, राजनीति और भारत के आंतरिक घ…और पढ़ें