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राजधानी में चल रहे 2000 से अधिक कोचिंग सेंटरों पर नगर निगम ने सख्ती करना शुरू कर दिया है। सुप्रीम कोर्ट के वर्ष 2024 के एक आदेश का हवाला देते हुए निगम ने कोचिंग सेंटरों में छात्रों की सुरक्षा की ऑडिट शुरू की है। मंगलवार को निगम टाउन प्लानिंग की टीम ने करीब 20 कोचिंग सेंटरों और लाइब्रेरी की जांच की। कोचिंग सेंटर के संचालकों से भवन का स्वीकृत नक्शा, ट्रेड लाइसेंस और अधिक संख्या वाले कोचिंग सेंटर व लाइब्रेरी संचालकों से फायर एनओसी की मांग की गई। टीम ने संबंधित संचालकों को संबंधित कागजात निगम में जमा करने का निर्देश दिया है। नगर आयुक्त सुशांत गौरव ने साफ कहा है कि अवैध रूप से चल रहे कोचिंग और लाइब्रेरी पर कार्रवाई होगी। छात्रों की सुरक्षा से खिलवाड़ नहीं होने देंगे। साफ है कि जिन कोचिंग के पास भवन का स्वीकृत नक्शा व ट्रेड लाइसेंस नहीं होगा, उसे सील किया जाएगा। वह सबकुछ जो आपके लिए जानना जरूरी है
सुप्रीम कोर्ट ने अवैध भवन में व्यवसाय करना बताया अवैध
सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में साफ किया है कि स्वीकृत भवन प्लान का उल्लंघन करके या अनुमति के बिना किया गया निर्माण अवैध निर्माण की श्रेणी में आता है। केवल लंबा समय बीत जाने से कोई भी अवैध निर्माण वैध नहीं हो सकता। अदालत ने साफ किया है कि अनधिकृत भवन में कोई भी व्यवसाय करने के लिए लाइसेंस नहीं दिया जाना चाहिए। आवासीय भवन का नक्शा मिला तो बंद होंगे कोचिंग सेंटर
निगम ने जिन कोचिंग सेंटर और लाइब्रेरी संचालकों को नोटिस दिया है अगर वे सेंटर आवासीय भवन में चलते पाए गए तो कोचिंग का सील होना तय है। साथ ही संबंधित भवन मालिक पर भी जुर्माना लगेगा। छात्र आंदोलन के बाद कार्रवाई
रांची में पिछले दिनों हुए छात्र आंदोलनों में पर्दे के पीछे से कोचिंग संचालकों की भूमिका भी मानी गई थी। इसके बाद ही निगम ने कोचिंग सेंटरों की जांच शुरू की। पहले फेज में निगम ने 25 कोचिंग सेंटरों की जांच की थी। इसके बाद संबंधित कोचिंग सेंटरों को नोटिस जारी किया था। अब बड़े पैमाने पर कोचिंग सेंटर और लाइब्रेरी की जांच शुरू कर दी गई है।
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