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हिंदुस्तान कॉपर लिमिटेड (एचसीएल) ने सिंहभूम की बंद पड़ी खदानों को दोबारा शुरू करने की प्रक्रिया तेज कर दी है। फिलहाल सुरदा और केंदाडीह माइंस से उत्पादन शुरू हो चुका है, जबकि पांच अन्य खदानों को खोलने की प्रक्रिया अंतिम चरण में पहुंच गई है। अगर सभी प्रस्तावित खदानें चालू हो गईं तो सिंहभूम ताम्र पट्टी से हर साल करीब 1.5 टन सोना और 15 टन तक चांदी निकल सकती है। विशेषज्ञ इसे देश के लिए नया गोल्ड रिजर्व मान रहे हैं। एचसीएल प्रबंधन ने बंद खदानों को दोबारा शुरू करने के लिए झारखंड सरकार से प्रक्रिया तेज करने का आग्रह किया है। बीते शुक्रवार को कंपनी के सीएमडी संजीव कुमार सिंह ने मुख्य सचिव अविनाश कुमार से मुलाकात कर विभिन्न माइंस की लीज जल्द मंजूर करने की मांग की। राखा कॉपर माइंस में शुरू हुआ डेवलपमेंट कार्य राखा कॉपर प्रोजेक्ट में पानी निकासी और डेवलपमेंट का काम वेस्ट माइनिंग प्राइवेट लिमिटेड को सौंपा गया है। इसके अलावा धोबनी-किशनगढ़िया और पाथरगोड़ा लीज के लिए फिर से आवेदन दिया गया है। वहीं, रामचंद्रपुर-नांदूप और धातकीडीह-तिरिलडीह नई माइंस खोलने की कागजी प्रक्रिया जारी है। एचसीएल आईसीसी यूनिट के पूर्व जियोलॉजिस्ट और राखा कॉपर प्रोजेक्ट के पूर्व डीजीएम शिशिर पटनायक ने दैनिक भास्कर से कहा कि सिंहभूम ताम्र पट्टी की खदानें सोने की चिड़िया हैं। उनके मुताबिक यदि सभी खदानें चालू हो गईं तो यहां से हर साल करीब 1.5 टन तक सोना का उत्पादन संभव है। 50 लाख टन अयस्क उत्पादन का लक्ष्य: एचसीएल की योजना के अनुसार सुरदा और केंदाडीह माइंस से 11 लाख टन, जबकि राखा-सिद्धेश्वर-चापड़ी प्रोजेक्ट से 35 लाख टन ताम्र अयस्क उत्पादन का लक्ष्य रखा गया है। अन्य प्रस्तावित माइंस शुरू होने के बाद कुल उत्पादन 45 से 50 लाख टन प्रतिवर्ष तक पहुंच सकता है। फिलहाल सुरदा माइंस से प्रतिदिन 800 टन और केंदाडीह माइंस से 150 टन ताम्र अयस्क निकाला जा रहा है। मौजूदा उत्पादन के आधार पर रोजाना करीब 240 ग्राम सोना और एक किलो चांदी निकलने का अनुमान है।
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