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Gamla Gardening Tips: झारखंड के पारंपरिक तरीके में गमले को साफ कर धान की भूसी, वर्मी कंपोस्ट, गोबर खाद और उपजाऊ मिट्टी की परतें डानली चाहिए. इससे पौधे स्वस्थ बने रहते हैं. साथ ही साल भर हरियाली दिखाई देगी
जमशेदपुर: आजकल लगभग हर घर में लोग गमलों में पौधे लगाना पसंद करते हैं. कोई फूलों के पौधे लगाता है तो कोई सब्जियां और सजावटी पौधे, लेकिन अक्सर देखने को मिलता है कि कुछ दिनों तक हरे-भरे रहने के बाद पौधे सूखने लगते हैं. कई बार लोग इसे पौधे की कमजोरी समझ लेते हैं, जबकि असली वजह पौधा लगाने का गलत तरीका और उचित देखभाल का अभाव होता है. यदि शुरुआत से ही सही विधि अपनाई जाए तो पौधे लंबे समय तक स्वस्थ और हरे-भरे बने रह सकते हैं. पौधों के जानकार राजा बताते हैं कि गमले में पौधा लगाने से पहले सबसे जरूरी है कि गमले को अच्छी तरह साफ किया जाए.
पुराने गमले में मौजूद फंगस, कीड़े या खराब मिट्टी नए पौधे के विकास को प्रभावित कर सकती हैं. इसलिए पौधा लगाने से पहले गमले को धोकर और सुखाकर तैयार करना चाहिए. साफ गमला पौधे की जड़ों को स्वस्थ वातावरण प्रदान करता है और पौधे की बढ़वार बेहतर होती है. राजा के अनुसार झारखंड में पारंपरिक रूप से पौधे लगाने के लिए धान की भूसी का उपयोग किया जाता है.
गमले के नीचे डाल दें ये चीज
गमले के सबसे निचले हिस्से में सबसे पहले धान की भूसी की एक परत बिछानी चाहिए. यह परत अतिरिक्त पानी को नियंत्रित करने में मदद करती है और मिट्टी में नमी बनाए रखती है. इसके कारण पौधे की जड़ों को पर्याप्त हवा मिलती रहती है और पानी जमा होने से होने वाली सड़न की समस्या भी कम हो जाती है. धान की भूसी के ऊपर वर्मी कंपोस्ट, उपजाऊ मिट्टी और गोबर खाद की एक मिश्रित परत तैयार की जाती है.
यह परत पौधे के लिए पोषण का मुख्य स्रोत होती है. वर्मी कंपोस्ट में मौजूद प्राकृतिक पोषक तत्व पौधे की वृद्धि को बढ़ावा देते हैं, जबकि गोबर खाद मिट्टी की उर्वरता बढ़ाती है. इसके बाद पौधे को सावधानीपूर्वक गमले में लगाया जाता है. ताकि उसकी जड़ों को किसी प्रकार का नुकसान न पहुंचे. पौधा लगाने के बाद उसके ऊपर फिर से मिट्टी, गोबर खाद और कंपोस्ट की एक हल्की परत डालनी चाहिए.
पौधे के लिए जरूरी है धूप और छाया
इससे पौधे की जड़ें अच्छी तरह ढकी रहती हैं और उन्हें आवश्यक पोषण लगातार मिलता रहता है. साथ ही पौधे को नियमित रूप से जरूरत के अनुसार पानी देना भी जरूरी है. बहुत अधिक या बहुत कम पानी दोनों ही पौधों के लिए नुकसानदायक हो सकते हैं. राजा बताते हैं कि पौधे को ऐसी जगह रखना चाहिए, जहां हल्की धूप और छांव दोनों मिलती हो. लगातार तेज धूप या पूरी तरह छायादार स्थान पौधे के विकास को प्रभावित कर सकता है.
एक संतुलित वातावरण, सही मिट्टी, जैविक खाद और उचित देखभाल के साथ लगाया गया पौधा लंबे समय तक हरा-भरा और स्वस्थ बना रहता है. झारखंड का यह पारंपरिक तरीका न केवल पौधों की उम्र बढ़ाता है, बल्कि घर की हरियाली को भी लंबे समय तक बनाए रखने में मदद करता है.
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बृजेंद्र प्रताप सिंह डिजिटल-टीवी मीडिया में (2021) लगभग 5 सालों से सक्रिय हैं. मेट्रो न्यूज 24 टीवी चैनल मुंबई, ईटीवी भारत डेस्क, दैनिक भास्कर डिजिटल डेस्क के अनुभव के साथ 14 मई 2024 से News.in में सीनियर कंटें…और पढ़ें