भास्कर न्यूज | केतार ताली गांव में पंडा नदी के तट पर आयोजित नौ दिवसीय सप्तकुंडी श्री विष्णु महायज्ञ के तीसरे दिन रोहतास, बिहार से पहुंचे प्रवचनकर्ता सुरेश शास्त्री जी ने कहा कि भगवान विष्णु सृष्टि का संचालन करते हैं। उन्होंने ग्रहों की धार्मिक मान्यताओं का उल्लेख करते हुए कहा कि सूर्य आत्मतत्व, चंद्रमा मन, बुध वाणी, बृहस्पति ज्ञान और प्रज्ञा, शुक्र सुख व भौतिक संसाधनों तथा शनि मनुष्य के सुख-दुख से जुड़े माने जाते हैं। उन्होंने कहा कि मनुष्य को धर्म की मर्यादा में रहकर जीवन यापन करना चाहिए। इससे जीवन में सुख और अंत में मुक्ति का मार्ग प्रशस्त होता है।शास्त्री जी ने चंद्रमा और मन के संबंध का उदाहरण देते हुए कहा कि जिस प्रकार पूर्णिमा के समय समुद्र में ज्वार-भाटा आता है, उसी प्रकार मनुष्य का मन भी कभी-कभी अशांत हो जाता है। इसलिए मन पर नियंत्रण रखना जरूरी है। उन्होंने श्रद्धालुओं को सावधान करते हुए कहा कि मन पर आंख मूंदकर विश्वास नहीं करना चाहिए, क्योंकि अनियंत्रित मन मनुष्य को गलत रास्ते पर ले जा सकता है। जीवन में संयम, सदाचार और धर्म की मर्यादा का पालन करना जरूरी है।शिव परिवार से सीखें एकजुटता का संदेश: प्रवचन के दौरान सुरेश शास्त्री जी ने भगवान शिव के परिवार का उदाहरण देते हुए कहा कि शिव परिवार में अलग-अलग सदस्यों के वाहन एक-दूसरे के प्राकृतिक शत्रु माने जाते हैं। भगवान शिव का वाहन बैल और माता पार्वती का वाहन बाघ है। शिव के गले में सर्प है, जबकि भगवान गणेश का वाहन चूहा और कार्तिकेय का वाहन मोर है। इसके बावजूद शिव परिवार में सभी एक साथ रहते हैं। इससे मनुष्य को परिवार में आपसी प्रेम, सामंजस्य और एकजुटता बनाए रखने की प्रेरणा मिलती है। उन्होंने कहा कि परिवार के सदस्य आपसी मतभेद भुलाकर मिल-जुलकर रहें, तो जीवन सुखमय बन सकता है और समाज में भी अच्छा संदेश जाता है।इस दौरान काशी से पहुंचे भागवत आचार्य दीनदयाल मणि त्रिपाठी ने भगवान शिव की महिमा का वर्णन करते हुए कहा कि शिव की महिमा अपरंपार है और उनका संपूर्ण परिवार पूजनीय है। कार्यक्रम में यज्ञ समिति के पदाधिकारी, सदस्य और बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित थे। अंत में रामायण जी की आरती की गई। रासलीला और महायज्ञ में उमड़ रहे क्षेत्र के श्रद्धालु ताली में आयोजित श्री विष्णु महायज्ञ में धार्मिक अनुष्ठानों के साथ श्रद्धालुओं की सुविधा का भी ध्यान रखा जा रहा है। यज्ञ में अग्नि मंथन के बाद तीसरे दिन से यज्ञशाला की परिक्रमा शुरू कराई गई। इसमें बड़ी संख्या में महिला, पुरुष और बच्चे भाग ले रहे हैं। वहीं, प्रतिदिन रात 8 बजे प्रवचन के बाद वृंदावन से आए कलाकारों द्वारा रासलीला का मंचन किया जा रहा है, जिसे देखने के लिए श्रद्धालु जुट रहे हैं।यज्ञ समिति की ओर से आपात स्थिति से निपटने के लिए चिकित्सा व्यवस्था भी की गई है। दूर-दराज से आने वाले श्रद्धालुओं के ठहरने और भोजन की व्यवस्था के साथ 24 घंटे सेवा उपलब्ध कराई जा रही है, ताकि यज्ञ में शामिल होने वाले लोगों को किसी तरह की परेशानी न हो।
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