Last Updated:
कोडरमा के 15 वर्षीय सागर कुमार गिरी अद्भुत मिसाल पेश कर रहे हैं. वह स्केटिंग के सहारे 1500 किलोमीटर दूर केदारनाथ धाम की यात्रा पर निकले हैं. 9वीं के छात्र सागर रोजाना 50 से 60 किलोमीटर का सफर तय करते हैं. इससे पहले वह स्केटिंग से वैष्णो देवी और देवघर की सफल यात्रा कर चुके हैं.
कोडरमा: जिले के डोमचांच प्रखंड अंतर्गत तेतरियाडीह निवासी 15 वर्षीय सागर कुमार गिरी अपने बुलंद हौसलों और अद्भुत जुनून के कारण इन दिनों चर्चा का विषय बने हुए हैं. कम उम्र में ही सागर स्केटिंग जूतों के सहारे करीब 1500 किलोमीटर की लंबी यात्रा तय कर उत्तराखंड स्थित प्रसिद्ध केदारनाथ धाम की ओर निकल पड़े हैं. उनका यह साहसिक और प्रेरणादायक सफर इलाके के युवाओं के लिए मिसाल बनता जा रहा है. विशेष बातचीत में सागर कुमार गिरी ने बताया कि वह फिलहाल 9वीं कक्षा के छात्र हैं और गर्मियों की छुट्टियों के दौरान इस यात्रा को पूरा करने का लक्ष्य लेकर निकले हैं. सागर के पिता दशरथ मेहता बिजली वायरिंग का काम करते हैं. साधारण परिवार से आने वाले सागर आज अपनी मेहनत और हौसले के दम पर कई लोगों के लिए प्रेरणा बन चुके हैं. इलाके के लोग भी उनकी इस यात्रा को लेकर गर्व महसूस कर रहे हैं और उनकी सफलता की कामना कर रहे हैं.
लोगों से आगे बढ़ने का मिल रहा हौसला
उन्होंने कहा कि करीब एक महीने में वह इस यात्रा को पूरा कर केदारनाथ धाम पहुंचेंगे. सागर का कहना है कि यह यात्रा केवल धार्मिक आस्था तक सीमित नहीं है. बल्कि यह आत्मविश्वास, साहस और सनातन धर्म के प्रचार-प्रसार का भी माध्यम है. सागर ने बताया कि रास्ते में लोगों का प्यार, सहयोग और आशीर्वाद उन्हें लगातार आगे बढ़ने की प्रेरणा दे रहा है. उन्होंने कहा कि इतनी गर्मी के बावजूद लोगों का स्नेह उन्हें थकान महसूस नहीं होने देता. यात्रा के दौरान कई जगहों पर लोग उन्हें रोककर हौसला बढ़ाते हैं. पानी और भोजन की व्यवस्था करते हैं. जिससे उनका आत्मविश्वास और मजबूत हो जाता है.
गांव की सड़कों पर सीखा स्केटिंग
उन्होंने बताया कि यह पहली बार नहीं है जब वह स्केटिंग के माध्यम से किसी धार्मिक यात्रा पर निकले हैं. इससे पहले भी वह कोडरमा से जम्मू-कश्मीर स्थित माता वैष्णो देवी धाम तक स्केटिंग यात्रा कर चुके हैं. इसके अलावा झारखंड के प्रसिद्ध बाबा बैद्यनाथ धाम, देवघर की यात्रा भी उन्होंने स्केटिंग के जरिए सफलतापूर्वक पूरी की है. उन्होंने गांव की सड़कों पर अभ्यास कर खुद ही स्केटिंग सीखी है. सीमित संसाधनों के बावजूद उनका आत्मविश्वास और मेहनत उन्हें नई ऊंचाइयों तक पहुंचा रहा है.
प्रतिदिन 50 से 60 किलोमीटर का सफर
यात्रा के दौरान सागर अपने कंधे पर एक बैग भी लेकर चल रहे हैं, जिसमें कैंपिंग टेंट समेत जरूरी सामान मौजूद है. उन्होंने बताया कि प्रतिदिन 50 से 60 किलोमीटर की दूरी तय करने का लक्ष्य रखा गया है. रात में जरूरत पड़ने पर वह रास्ते में टेंट लगाकर आराम भी करते हैं. सागर का कहना है कि स्केटिंग के माध्यम से धार्मिक स्थलों की यात्रा कर वह लोगों तक सनातन धर्म का संदेश पहुंचाने का प्रयास कर रहे हैं. उनका मानना है कि युवाओं को नशे और गलत रास्तों से दूर रहकर अपने लक्ष्य के लिए मेहनत करनी चाहिए.