हजारीबाग में लोक दस्तावेजों की प्रमाणित प्रतियां नहीं मिलने का मामला अब एसीबी तक पहुंच गया है। भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) ने इस संबंध में मंत्रिमंडल सचिवालय एवं निगरानी विभाग के अपर मुख्य सचिव को पत्र लिखकर हजारीबाग के उपायुक्त (डीसी) के खिलाफ शिकायत की है। इसमें आरोप लगाया गया है कि डीसी और संबंधित लोक सूचना पदाधिकारी (पीआईओ) लोक दस्तावेजों की प्रमाणित प्रतियां देने से इनकार कर रहे हैं। शिकायत में दस्तावेज छिपाने, भ्रष्टाचार और घोटालों से जुड़े साक्ष्य नष्ट करने तथा पद का दुरुपयोग करने जैसे आरोप भी लगाए गए हैं। एसीबी ने मामले में उचित कानूनी कार्रवाई का आग्रह किया है। एसीबी ने अपने पत्र के साथ हजारीबाग बार एसोसिएशन के अधिवक्ता पवन कुमार यादव की शिकायत भी संलग्न की है। हालांकि, ये सभी आरोप शिकायतकर्ता की ओर से लगाए गए हैं। आरटीआई और प्रथम अपील के बाद भी नहीं मिली जानकारी : अधिवक्ता पवन कुमार यादव के अनुसार, उन्होंने 13 अप्रैल 2026 को हजारीबाग डीसी कार्यालय में आरटीआई आवेदन देकर कुछ लोक दस्तावेजों के निरीक्षण और उनकी प्रमाणित प्रतियां मांगी थीं। इन दस्तावेजों का इस्तेमाल न्यायिक मंचों पर साक्ष्य के रूप में किया जाना था। आवेदन पर कार्रवाई नहीं होने पर उन्होंने 6 जून को डीसी के समक्ष प्रथम अपील दायर की। आरोप है कि अपील पर भी कोई आदेश जारी नहीं किया गया। इन छह मामलों के दस्तावेज मांगे गए थे 1. एनएच-522 भूमि अधिग्रहण: हजारीबाग-बगोदर फोरलेन निर्माण के लिए भूमि अधिग्रहण, अवार्ड और 2023 के सर्वे के अनुसार सड़क किनारे की जमीन की मापी व प्रकृति का विवरण। 2. अधिग्रहित परिसरों की सूची: फोरलेन निर्माण में चिह्नित आवासीय और व्यावसायिक परिसरों की अवार्ड सूची की प्रमाणित प्रति। 3. मुआवजा निर्धारण: जमीन, आवासीय और व्यावसायिक परिसरों का मुआवजा तय करने की प्रक्रिया से जुड़े दस्तावेज। 4. गोंदलपुरा कोल ब्लॉक: बड़कागांव स्थित कोल ब्लॉक के लिए प्रपत्र-1 प्रमाणपत्र जारी करने के संबंध में अडानी एंटरप्राइजेज के उपाध्यक्ष का पत्र और उसके संलग्नक। 5. ईमेल शिकायत पर कार्रवाई: 12 मार्च को आधिकारिक ईमेल से भेजी गई शिकायत पर हुई कार्रवाई, पत्राचार और जांच रिपोर्ट। 6. चंद्रगुप्त कोल परियोजना: केरेडारी में सीसीएल की इस परियोजना के लिए भूमि हस्तांतरण से संबंधित सरकारी आदेश की प्रमाणित प्रति।
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