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राजस्थान के जोधपुर निवासी आईएएस दिलीप प्रताप सिंह शेखावत ने कड़ी मेहनत और दृढ़ संकल्प से सफलता हासिल की. बचपन में क्रिकेटर बनने का सपना देखने वाले दिलीप ने असफलताओं के बावजूद हार नहीं मानी और तीसरे प्रयास में यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा में ऑल इंडिया रैंक 72 प्राप्त कर आईएएस बने. वर्तमान में पलामू के उपायुक्त के रूप में कार्यरत दिलीप ने बताया कि उनके प्रशासनिक करियर की शुरुआत इसी जिले से हुई थी.
पलामू: कहते हैं कि अगर इरादे मजबूत हों तो कठिन रास्ते भी मंजिल तक पहुंचा देते हैं. राजस्थान के जोधपुर निवासी आईएएस दिलीप प्रताप सिंह शेखावत ने इसे सच कर दिखाया है. बचपन में क्रिकेटर बनने का सपना देखने वाले दिलीप ने जीवन के उतार-चढ़ाव, असफलताओं और लोगों के तानों के बावजूद हार नहीं मानी. आखिरकार तीसरे प्रयास में उन्होंने यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा में ऑल इंडिया रैंक 72 हासिल कर आईएएस बनने का अपना सपना पूरा किया.
प्रशासनिक सफर की शुरुआत
पलामू जिले में 106वें उपायुक्त दिलीप प्रताप सिंह शेखावत ने लोकल18 से खास बातचीत की. दिलीप प्रताप सिंह शेखावत ने बताया कि उनके प्रशासनिक सफर की शुरुआत इसी जिले से हुई थी, जहां उन्हें प्रशिक्षण का अवसर मिला. अब उपायुक्त के रूप में यहां सेवा करने का मौका मिलना उनके लिए सौभाग्य की बात है. उन्होंने कहा कि जिले में पेयजल संकट, सुखाड़ और गिरते जलस्तर जैसी चुनौतियों से निपटने के लिए वाटर हार्वेस्टिंग, माइक्रो इरिगेशन और आधुनिक खेती को बढ़ावा दिया जाएगा, ताकि किसानों को राहत मिल सके.
बचपन में क्रिकेट का जुनून
दिलीप प्रताप सिंह शेखावत ने बताया कि बचपन से ही उनका सपना क्रिकेटर बनने का था. जब लोग उनसे पूछते थे कि बड़े होकर क्या बनोगे, तो वे डॉक्टर या इंजीनियर की बजाय क्रिकेटर बनने की बात कहते थे. उनका सपना भारत की टीम के लिए खेलने का था. हालांकि, समाज और आसपास के लोग उनकी इस चाहत का मजाक उड़ाते थे और कहते थे कि हर कोई सचिन तेंदुलकर नहीं बन सकता. इस दौरान उनकी जिंदगी में कई उतार-चढ़ाव भी आए.
पूरी तरह क्रिकेट को समर्पित
क्रिकेट को लेकर उन्होंने कहा कि स्कूल के दिनों में वे पूरी तरह क्रिकेट को समर्पित थे और उनके कोच ने भी उनमें प्रतिभा देखी थी. लेकिन 12वीं के दौरान परिवार के दबाव में उन्हें क्रिकेट छोड़ना पड़ा. इसके बाद उन्होंने पढ़ाई पर ध्यान केंद्रित किया और इंजीनियरिंग की राह चुनी. उन्होंने केमिकल इंजीनियरिंग से स्नातक किया. कॉलेज के दौरान समाजसेवा से जुड़ने पर उनके भीतर प्रशासनिक सेवा में जाने की प्रेरणा जगी. यहीं से उन्होंने यूपीएससी की तैयारी का फैसला लिया और दिल्ली जाकर संघर्ष शुरू किया.
तीन प्रयास, दो असफलताएं
दिलीप प्रताप सिंह शेखावत ने UPSC का सफर सांझा करते हुए बताया कि पहले प्रयास में वे प्रीलिम्स में बहुत कम अंतर से असफल हो गए. दूसरे प्रयास में उन्होंने प्रीलिम्स और मेन्स दोनों परीक्षाएं पास कीं, लेकिन इंटरव्यू में अंतिम सूची में जगह नहीं बना सके. यह झटका बड़ा था, लेकिन उन्होंने खुद को टूटने नहीं दिया. लगातार मेहनत, सही रणनीति और आत्मविश्वास के दम पर दिलीप ने तीसरे प्रयास में शानदार वापसी की. वर्ष 2018 में उन्होंने ऑल इंडिया रैंक 72 हासिल कर आईएएस अधिकारी बनने का सपना साकार किया.
सफलता का मंत्र
वहीं असफलताओं को लेकर उन्होंने ने कहा कि असफलता अंत नहीं होती, बल्कि सीखने का अवसर होती है. युवाओं को संदेश देते हुए उन्होंने कहा कि यदि लक्ष्य बड़ा है, तो मेहनत भी उसी स्तर की करनी होगी. अपने सपनों को दिल के करीब रखकर लगातार प्रयास करने से ही सफलता मिलती है. उन्होंने शिक्षा को अधिकार और बेहतर भविष्य की सबसे बड़ी कुंजी बताया.
युवाओं के लिए प्रेरणा
उन्होंने कहा कि किसी भी मंजिल को पाने के लिए बड़े सपने देखना जरूरी है. खासकर यदि आप आईएएस बनने का सपना देख रहे हैं, तो ताने, असफलताएं और परिस्थितियां आपके रास्ते में बाधा बन सकती हैं, लेकिन मजबूत इरादों को नहीं रोक सकतीं. इसलिए दृढ़ संकल्प और कठिन परिश्रम के बल पर सफलता हासिल की जा सकती है.
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न्यूज़18इंडिया में कार्यरत हैं. आजतक से रिपोर्टर के तौर पर करियर की शुरुआत फिर सहारा समय, ज़ी मीडिया, न्यूज नेशन और टाइम्स इंटरनेट होते हुए नेटवर्क 18 से जुड़ी. टीवी और डिजिटल न्यूज़ दोनों विधाओं में काम करने क…और पढ़ें