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झारखंड हाईकोर्ट में गुरुवार को झारखंड स्टेट आउटडोर एडवरटाइजिंग एसोसिएशन और आरडीएस एडवरटाइजिंग एंड मार्केटिंग ग्रुप की याचिकाओं पर सुनवाई हुई। जस्टिस आनंद सेन की अदालत ने मामले की सुनवाई करते हुए कहा कि रांची में सड़क और डिवाइडर पर कम ऊंचाई में लगाए गए विज्ञापन बोर्ड हर हाल में हटाएं। अदालत ने रांची नगर निगम को निर्देश दिया है कि सड़क के डिवाइडर पर स्ट्रीट लाइट के खंभों से लगाए गए ऐसे सभी विज्ञापन बोर्ड, होर्डिंग और प्लेकार्ड हटाएं जो सड़क की सतह से 12 फीट से कम ऊंचाई पर हैं। अदालत ने कहा कि इस तरह लगाए गए बोर्ड राहगीरों और वाहन चालकों के लिए खतरा बन सकते हैं। अदालत ने सुनवाई के दौरान मामले से जुड़े दस्तावेज के साथ दी गई तस्वीरों का भी अवलोकन किया। इसमें एक बड़ा यूनीपोल सड़क की ओर निकला हुआ था और उसका एक हिस्सा सड़क के बीच तक पहुंच गया था। अदालत ने इसे राहगीरों के लिए खतरा बताया। जबकि, सड़क के डिवाइडर पर लगे स्ट्रीट लाइट के खंभों पर भी लगे कुछ विज्ञापन बोर्ड इतने नीचे थे कि वहां से गुजरने वाले बाइक और स्कूटर सवारों के सिर से टकराने का खतरा था। कोर्ट ने कहा कि सड़क के बीच बिजली या स्ट्रीट लाइट के खंभों पर कम ऊंचाई में लगाए गए विज्ञापन बोर्ड ब्लाइंड स्पॉट बनता है। इसलिए ऐसे सभी बोर्ड हटाए जाएं। नगर निगम ने होर्डिंग-मोनोपोल और यूनीपोल हटाने का दिया है निर्देश एडवरटाइजिंग एसोसिएशन ने होर्डिंग, मोनोपोल और यूनीपोल को हटाने के आदेश को हाईकोर्ट में चुनौती दी है। उनका कहना है कि सभी होर्डिंग को खतरनाक मानना उचित नहीं है। निगम को यह बताना चाहिए कि कौन-कौन से होर्डिंग खतरा पैदा कर रहे हैं। सुनवाई के दौरान निगम की ओर से कोर्ट को बताया गया कि मोनोपोल, यूनिपोल, विज्ञापन होर्डिंग, बिलबोर्ड और प्लेकार्ड वाहन चालकों का ध्यान भटका सकते हैं। इससे दुर्घटना की आशंका रहती है। निगम ने इस मामले में जवाब दाखिल करने के लिए कोर्ट से समय मांगा, जिसे स्वीकार कर लिया है। निगम ने ही मोनोपोल लगाने की स्वीकृति दी नगर निगम ने ही शहर में मोनोपोल और यूनीपोल लगाने की स्वीकृति दी है। इसके लिए विज्ञापन एजेंसियों को मनचाहा साइट देने के लिए निगम के पदाधिकारियों ने लाभ भी लिया। जब विज्ञापन एजेंसियों ने अनुमति लेकर मोनोपोल-यूनिपोल की संरचना बनाकर लगा लिया तब निगम ने उसे हटाने का निर्देश दे दिया। इससे विज्ञापन एजेंसियां सकते में हैं। निगम के इस आदेश को रद कराने की मांग को लेकर विज्ञापन एजेंसियों के एसोसिएशन की ओर से हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की गई है। जेबीवीएनएल के एमडी से पोल के झूलते केबल तारों पर मांगा जवाब झारखंड हाईकोर्ट में गुरुवार को शहर की प्रमुख सड़कों और गलियों में अव्यवस्थित तरीके से लगाए गए केबल और इंटरनेट तारों से लोगों को हो रही परेशानी पर स्वत: संज्ञान से दर्ज मामले की सुनवाई की। चीफ जस्टिस एमएस सोनक और जस्टिस राजेश शंकर की अदालत सुनवाई के दौरान मोबाइल नेटवर्क कंपनियों के रवैये पर सख्त रुख अपनाया है। अदालत ने जेबीवीएनएल के एमडी को विस्तृत जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया। अदालत ने जेबीवीएनएल के एमडी से पूछा है कि रांची शहर में कितनी टेलीकॉम कंपनियों को केबल और इंटरनेट तार लगाने की अनुमति दी गई है। साथ ही अनुमति के तहत कितने तार लगाए गए हैं। अदालत ने इससे संबंधित विस्तृत रिपोर्ट 10 सितंबर तक उपलब्ध कराने का निर्देश दिया है। अदालत ने मामले की अगली सुनवाई 15 सितंबर को निर्धारित की है। मालूम हो कि शहर के सभी प्रमुख मार्ग सहित गली-मुहल्लों में बिजली के पोल पर बेतरतीब तरीके से केबल और इंटरनेट के तार लगाए गए हैं। पुरुलिया रोड, डोरंडा, मेन रोड, कचहरी रोड सहित सैकड़ों मुहल्लों में सड़क पर लटके ये तार दुर्घटना को आमंत्रित कर रहे हैं।
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