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झारखंड में जमीनों की खरीद-बिक्री और रजिस्ट्री को लेकर लंबे समय से जारी गतिरोध पर हाईकोर्ट ने ऐतिहासिक फैसला सुनाया। जस्टिस राजेश शंकर की कोर्ट ने राज्य सरकार को नेशनल जेनेरिक डॉक्यूमेंट रजिस्ट्रेशन सिस्टम (एनजीडीआरएस) पोर्टल पर दर्ज जमीनों की प्रतिबंधित सूची तत्काल हटाने का निर्देश दिया। कोर्ट के इस फैसले से राज्यभर में आठ साल से फंसी तीन लाख एकड़ से अधिक जमीन की खरीद-बिक्री का रास्ता साफ होगा। म्यूटेशन, लगान रसीद और बैंक लोन के लिए सरकारी दफ्तरों के चक्कर काटने और भ्रष्टाचार से लोगों को मुक्ति मिलेगी। हजारीबाग के अमित रंजन की रिट याचिका पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने स्पष्ट किया कि जमीन के मालिकाना हक या विवाद के आधार पर निबंधन अधिकारी किसी जमीन की रजिस्ट्री नहीं रोक सकते। निबंधन अधिकारियों का काम दस्तावेजों की कानूनी औपचारिकताएं पूरी होने पर उसका निबंधन करना है, न कि जमीन के स्वामित्व का फैसला करना। निबंधन अधिनियम 1908 और बिहार निबंधन नियमावली 1937 में ऐसा कोई प्रावधान नहीं है, जिसके तहत सब रजिस्ट्रार जमीन के मालिकाना हक तय करे। वह सबकुछ जो आपके लिए जानना जरूरी है सरकार का तर्क- एसएलपी सुप्रीम कोर्ट में लंबित, डीसी को दें आवेदन सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से महाधिवक्ता रोहितश्य रॉय ने दलील दी कि खंडपीठ के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में विशेष अनुमति याचिका (एसएलपी) दाखिल की गई है। यह अभी सुप्रीम कोर्ट में लंबित है। झारखंड सरकार इस संबंध में नया कानून लाने पर भी विचार कर रही है। सरकार की ओर से यह भी बताया गया कि जिन रैयतों की जमीन प्रतिबंधित सूची में है, वे संबंधित जिले के डीसी के पास व्यक्तिगत आवेदन देकर राहत मांग सकते हैं। डीसी मामले पर विचार करके इसकी अनुमति देंगे। 42 डिसमिल जमीन सूची से हटवाने के लिए कोर्ट पहुंचा था याचिकाकर्ता हजारीबाग जिले के इचाक अंचल के बोंगा मौजा निवासी अमित रंजन की 42 डिसमिल रैयती जमीन (खाता संख्या 154, प्लॉट संख्या 2606) को प्रतिबंधित सूची में रखा गया था। उन्होंने जमीन को सूची से बाहर करने के लिए डीसी को आवेदन दिया था। कार्रवाई नहीं हुई तो हाईकोर्ट गए थे। उनके अधिवक्ता हिमांशु हर्ष और श्रेष्ठ गौतम ने बताया कि हाईकोर्ट की खंडपीठ पहले ही निबंधन अधिनियम की धारा 22-ए और 26 अगस्त 2015 की अधिसूचना को असंवैधानिक करार दे चुकी है। इसके बावजूद जमीनों को प्रतिबंधित सूची में रखना और रजिस्ट्री रोकना उचित नहीं है। …8 साल से बंद है ऐसी जमीन की खरीद -बिक्री झारखंड में 3 लाख एकड़ से अधिक जमीन के खाता-प्लॉट को प्रतिबंधित सूची में डाल दिया गया है। एनजीडीआरएस पोर्टल शुरू होने के बाद मार्च 2018 से गैर मजरुआ सहित सभी तरह के गैर आबाद खातों की जमीन का निबंधन बंद हैं। अंचल कार्यालयों से रसीद भी ब्लॉक कर दिया गया हैं। 13 मई 2016 को झारखंड के मुख्य सचिव के स्तर से एक आदेश निकाला गया था। इसमें कहा गया था कि अवैध, संदेहास्पद जमाबंदी की जांच की जाए और अवैध जमाबंदी रद्द की जाए। इसके बाद गैर मजरुआ आम-खास सहित संदिग्ध खाता की जमीन को प्रतिबंधित करते हुए उसकी सूची निबंधन कार्यालय को सौंप दी।
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