![]()
झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (जेएसएससी) की संयुक्त स्नातक स्तरीय (सीजीएल) परीक्षा और इसके माध्यम से हुई नियुक्तियों को रद्द करने के राज्य सरकार के फैसले पर हाईकोर्ट शुक्रवार को अपना फैसला सुनाएगा। जस्टिस दीपक रोशन की अदालत ने पिछले महीने दोनों पक्षों की लंबी बहस पूरी होने के बाद फैसला सुरक्षित रख लिया था। अदालत के निर्णय पर करीब सीजीएल में चयनित अभ्यर्थियों के साथ राज्य के लाखों युवाओं की नजरें टिकी हैं। सरकार ने अगस्त में अधिसूचना जारी की थी दरअसल, राज्य सरकार ने सीआईडी की जांच रिपोर्ट और व्यापक छात्र आंदोलनों का हवाला देते हुए अगस्त में सीजीएल परीक्षा प्रक्रिया और सफल अभ्यर्थियों की नियुक्तियां रद्द करने की अधिसूचना जारी की थी। सरकार के इस फैसले को चुनौती देते हुए सफल अभ्यर्थी आकाश गौरव और अन्य ने हाईकोर्ट में याचिकाएं दाखिल की हैं। याचिकाकर्ताओं ने सरकार के निर्णय को अनुचित बताते हुए रद्द करने की मांग की है। 465 संदिग्ध अभ्यर्थियों को नोटिस जारी किया गया अदालत में सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता इंद्रजीत सिन्हा और अमृतांश वत्स ने दलील दी थी कि गड़बड़ी के आरोपों के आधार पर पूरी परीक्षा और नियुक्ति प्रक्रिया रद्द करना उचित नहीं है। जांच के दौरान करीब 465 संदिग्ध अभ्यर्थियों को चिह्नित कर नोटिस जारी किया गया है। इससे स्पष्ट है कि जांच एजेंसियां संदिग्ध और निष्पक्ष तरीके से परीक्षा पास करने वाले अभ्यर्थियों की पहचान कर सकती है। यदि कुछ लोगों ने परीक्षा में गड़बड़ी की है, तो उनके खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए। लेकिन चंद लोगों की गलती की सजा मेहनत और योग्यता के आधार पर सफल हुए हजारों अभ्यर्थियों को नहीं दी जा सकती। बिना ठोस साक्ष्य पूरी परीक्षा और नियुक्तियां रद्द करना निर्दोष अभ्यर्थियों के साथ अन्याय होगा। प्रार्थियों और सरकार की दलील सुनने के बाद अदालत ने फैसला सुरक्षित रख लिया था।
Source link