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Jharkhand News : झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को कथित 8.86 एकड़ जमीन फर्जीवाड़ा और उससे जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में बड़ा कानूनी झटका लगा है. पीएमएलए की विशेष अदालत ने उनकी डिस्चार्ज याचिका खारिज कर दी है. अदालत के इस फैसले के बाद अब मामले में आरोप गठन की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी. ईडी ने इस केस में हेमंत सोरेन समेत करीब डेढ़ दर्जन लोगों को आरोपी बनाते हुए चार्जशीट दाखिल की है.
हेमंत सोरेन की याचिका खारिज.
रांची. झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को कथित 8.86 एकड़ जमीन फर्जीवाड़ा से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में बड़ा झटका लगा है. पीएमएलए (प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट) की विशेष अदालत ने उनकी डिस्चार्ज याचिका खारिज कर दी है. अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद फैसला सुरक्षित रखा था, जिस पर अब आदेश सुनाया गया है. कोर्ट के इस फैसले के बाद मामले में आरोपियों के खिलाफ आरोप गठन (चार्ज फ्रेम) की प्रक्रिया का रास्ता साफ हो गया है. इस मामले में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन समेत करीब डेढ़ दर्जन लोगों को आरोपी बनाया गया है.
क्या थी हेमंत सोरेन की मांग?
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने 5 दिसंबर 2025 को पीएमएलए की विशेष अदालत में डिस्चार्ज पिटीशन दाखिल की थी. याचिका में उन्होंने खुद को निर्दोष बताते हुए मामले से आरोपमुक्त किए जाने की मांग की थी. उनका कहना था कि उनके खिलाफ लगाए गए आरोपों के समर्थन में पर्याप्त साक्ष्य नहीं हैं, इसलिए उन्हें मामले से मुक्त किया जाए. हालांकि, अदालत ने उनकी दलीलों को स्वीकार नहीं किया और डिस्चार्ज याचिका खारिज कर दी.
8.86 एकड़ जमीन फर्जीवाड़ा मामला क्या है?
यह मामला रांची में 8.86 एकड़ जमीन के कथित अवैध कब्जे और उससे जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग नेटवर्क से संबंधित है. आरोप है कि जमीन के स्वामित्व से जुड़े दस्तावेजों में हेरफेर कर जमीन पर अवैध तरीके से कब्जा करने की साजिश रची गई थी. इस मामले की जांच करते हुए प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने इसे मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़ा मामला माना और कई स्तरों पर जांच शुरू की. जांच के दौरान कई स्थानों पर छापेमारी की गई, दस्तावेज जब्त किए गए और कई लोगों को पूछताछ के लिए समन जारी किया गया.
ईडी ने दाखिल की है चार्जशीट
ईडी ने अपनी जांच पूरी करने के बाद मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन समेत करीब डेढ़ दर्जन आरोपियों के खिलाफ विशेष अदालत में चार्जशीट दाखिल की है. चार्जशीट में कई जमीन कारोबारियों और अन्य लोगों को भी आरोपी बनाया गया है. जांच एजेंसी का दावा है कि जमीन से जुड़े कथित फर्जीवाड़े और उससे अर्जित संपत्तियों के लेन-देन में मनी लॉन्ड्रिंग के तत्व पाए गए हैं.
हेमंत सोरेन की गिरफ्तारी और जमानत
इस बहुचर्चित मामले में ईडी ने 31 जनवरी 2024 को लंबी पूछताछ के बाद मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को गिरफ्तार किया था। गिरफ्तारी के बाद उन्हें न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया था. करीब पांच महीने जेल में रहने के बाद 28 जून 2024 को झारखंड से उन्हें जमानत मिली थी. हाईकोर्ट से राहत मिलने के बाद वे जेल से बाहर आए और बाद में दोबारा राज्य की सत्ता संभाली.
अब आगे क्या होगा?
विशेष अदालत द्वारा डिस्चार्ज याचिका खारिज किए जाने के बाद अब मामले में आरोप गठन की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी. अदालत यह तय करेगी कि आरोपियों के खिलाफ किन धाराओं में मुकदमा चलाया जाएगा. आरोप तय होने के बाद मामले की नियमित सुनवाई शुरू होगी और अभियोजन और बचाव पक्ष अपने-अपने साक्ष्य अदालत के सामने पेश करेंगे.
राजनीतिक रूप से भी अहम माना जा रहा फैसला
झारखंड की राजनीति में यह मामला लंबे समय से चर्चा का विषय रहा है. मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की गिरफ्तारी, जेल यात्रा और बाद में जमानत मिलने के बाद यह मामला लगातार राजनीतिक बहस के केंद्र में रहा है. ऐसे में पीएमएलए कोर्ट द्वारा डिस्चार्ज याचिका खारिज किए जाने को कानूनी के साथ-साथ राजनीतिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है. फिलहाल अदालत के इस आदेश के बाद सभी की नजरें अगली सुनवाई और आरोप गठन की प्रक्रिया पर टिकी हुई हैं.
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Utkarsh Kumar is currently working as a Chief Sub Editor with Network 18 Media & Investment Limited for the News18 Hindi website. (Bihar/Jharkhand). He is multimedia journalist with over 15 years of experience …और पढ़ें