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Ranchi student Protest: झारखंड की राजधानी रांची में छात्रों का आंदोलन जारी है. 14वीं JPSC परीक्षा रद्द करने समेत अन्य मांगों को लेकर चल रहे प्रदर्शन का 21 वां दिन है. इसी बीच गड़बड़ी के कथित मास्टर माइंड अभय तिवारी सीआईडी की कस्टडी में है. उसने नौकरी की भर्तियों में गड़बड़ी कर मोटी कमाई की है. इसी काली कमाई से आलीशान मकान भी बनवा रखा है.
अभय तिवारी JPSC एग्जाम गड़बड़ी का मास्टरमाइंड.
रांचीः झारखंड की भर्ती परीक्षाओं में कथित गड़बड़ी को लेकर जांच तेज है. एक तरफ 14वीं JPSC परीक्षा रद्द करने और JSSC CGL परीक्षा को लेकर छात्र रांची में लगातार आंदोलन कर रहे हैं. दूसरी तरफ झारखंड CID इस मामले में कार्रवाई कर रही है. अब तक 20 लोगों की गिरफ्तारी हो चुकी है. मामले का मास्टरमाइंड अभय तिवारी को बताया जा रहा है. CID की जांच में उसे कथित भर्ती गड़बड़ी के नेटवर्क का अहम किरदार बताया जा रहा है. पूछताछ में अभय ने कथित तौर पर कई लोगों के नाम लिए हैं. इंटरव्यू में नंबर बढ़ाने से जुड़े एक नेटवर्क का खुलासा किया. साथ ही रुपयों के लेन-देन का भी खुलासा किया. उसने काली कमाई से आलीशान मकान तक बनवा रखा है.
रांची के नामकुम इलाके में अभय तिवारी का आलीशान मकान भी अब चर्चा में है. जांच एजेंसियां उसकी संपत्ति और आय के स्रोतों से जुड़े पहलुओं की भी पड़ताल कर रही हैं. हालांकि, जांच अभी जारी है और अभय तिवारी के बयान में जिन लोगों के नाम आए हैं, उनके खिलाफ आरोपों की कानूनी और जांच प्रक्रिया अलग से तय होगी.
13 साल में 12 सरकारी परीक्षाएं पास करने का दावा
जांच में अभय तिवारी की अपनी नौकरी और परीक्षाओं का रिकॉर्ड भी चर्चा में है. जानकारी के मुताबिक, उसने करीब 13 साल के दौरान अलग-अलग सरकारी नौकरियों और पदों के लिए 12 परीक्षाएं पास की थीं. इनमें नेवी, BARC, IRB कॉन्स्टेबल, CRPF हेड कॉन्स्टेबल और नॉर्दर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड की परीक्षाएं शामिल हैं. इसके अलावा उसने JSSC की PGT शिक्षक और CGL परीक्षा भी पास की. JPSC की कई परीक्षाओं में भी उसके सफल होने का जिक्र है. इनमें सहायक वन संरक्षक (ACF), वन क्षेत्र पदाधिकारी (FRO), खाद्य सुरक्षा अधिकारी (FSO) और 11वीं झारखंड संयुक्त असैनिक सेवा परीक्षा शामिल हैं. अब CID इस बात की भी जांच कर रही है कि इन भर्तियों में कोई अनियमितता हुई थी या नहीं.
15 लाख रुपये में इंटरव्यू की कथित सेटिंग
अभय तिवारी ने पूछताछ में CID को कथित तौर पर बताया कि अभ्यर्थियों को एजेंट और बिचौलियों के जरिए इस नेटवर्क तक पहुंचाया जाता था. इसके बाद इंटरव्यू में नंबर बढ़ाने की व्यवस्था की जाती थी. उसके बयान के अनुसार, एक अभ्यर्थी के लिए कथित सेटिंग के बदले 15 लाख रुपये तक लिए जाते थे. अभय ने बताया कि आदित्य पांडे के जरिए अभ्यर्थियों को इस नेटवर्क तक पहुंचाया जाता था. इसके बाद कथित तौर पर रामवीर सिंह समेत अन्य लोगों से संपर्क कर इंटरव्यू बोर्ड में नंबर बढ़ाने की व्यवस्था की जाती थी.
कोड-डिकोड कर सही इंटरव्यू बोर्ड में भेजने का दावा
CID के सामने दिए बयान में अभय तिवारी ने कथित तौर पर एक और बड़ा दावा किया. उसके मुताबिक, जिस अभ्यर्थी की जिस सदस्य या अधिकारी के साथ सेटिंग होती थी, उसे उसी से जुड़े इंटरव्यू बोर्ड में भेजने की व्यवस्था की जाती थी. इसके लिए इंटरव्यू से पहले अभ्यर्थी का कोड डिकोड कराया जाता था. अभय के मुताबिक, इंटरव्यू से एक दिन पहले इस प्रक्रिया को पूरा किया जाता था. फिर संबंधित अभ्यर्थी को कथित तौर पर तय बोर्ड में भेजा जाता था.
कई अधिकारियों और चयनित अभ्यर्थियों के नाम का जिक्र
अभय तिवारी के बयान में JPSC के तत्कालीन अध्यक्ष एल. खियांग्ते समेत आयोग के कुछ तत्कालीन सदस्यों के नाम का भी उल्लेख किया गया है. इसके अलावा TDPL के निदेशक रामवीर सिंह, परीक्षा नियंत्रक श्वेता गुप्ता और अन्य लोगों के नाम भी जांच के दायरे में बताए गए हैं. उसने पुलिस अधीक्षक रोबिन कुमार, पुलिस उपाधीक्षक शैलेश सिंह और डिप्टी जेलर राजेश कुमार रजक के नाम का भी जिक्र किया है. अभय के अनुसार, इन अभ्यर्थियों के लिए एक एजेंट के माध्यम से कथित तौर पर इंटरव्यू सेटिंग कराई गई थी.
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