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इस बार 13-14 जुलाई को आषाढ़ अमावस्या पर दुर्लभ संयोग बन रहा है. श्रद्धालुओं को एक ही अमावस्या में सोमवती और भौमवती दोनों का पुण्य मिलेगा. धार्मिक कार्यों के लिए 14 जुलाई की उदयातिथि मुख्य है. इस दिन मौन रहकर पूजा, दान और तर्पण करने से राहु व पितृ दोष शांत होते हैं.
देवघर: सनातन धर्म में अमावस्या तिथि का विशेष महत्व माना जाता है, लेकिन इस बार आषाढ़ मास की अमावस्या कई मायनों में बेहद खास और दुर्लभ रहने वाली है. वजह है इसका अनोखा संयोग, जो हर साल देखने को नहीं मिलता. इस बार अमावस्या तिथि सोमवार की शाम से शुरू होकर मंगलवार तक रहेगी. ऐसे में श्रद्धालुओं को एक ही अमावस्या में सोमवती अमावस्या और भौमवती अमावस्या, दोनों का पुण्य प्राप्त करने का अवसर मिलेगा. ज्योतिषाचार्यों का कहना है कि यह संयोग बहुत कम बनता है और धार्मिक दृष्टि से इसे अत्यंत शुभ माना जाता है. ऐसे में पूजा-पाठ, दान, तर्पण और पितरों की शांति के लिए किया गया कार्य कई गुना अधिक फलदायी माना जाएगा.
क्या कहते हैं देवघर के ज्योतिषाचार्य?
देवघर के ज्योतिषाचार्य बताते हैं कि इस बार का संयोग वास्तव में दुर्लभ है. आमतौर पर अमावस्या किसी एक वार के साथ ही पड़ती है, लेकिन इस बार तिथि सोमवार की शाम से शुरू होकर मंगलवार तक रहेगी. हालांकि सनातन धर्म में उदयातिथि को ही मान्यता दी जाती है. इसलिए धार्मिक दृष्टि से मंगलवार, 14 जुलाई को आषाढ़ अमावस्या का मुख्य पर्व माना जाएगा. इसी दिन स्नान, दान, पूजा और पितरों का तर्पण करना सबसे अधिक शुभ रहेगा. उनका कहना है कि ऐसे संयोग विरले ही बनते हैं और श्रद्धा के साथ किए गए धार्मिक कार्यों का विशेष फल मिलता है.
इस दिन मौन रहकर करें पूजा
ज्योतिषाचार्य के अनुसार, आषाढ़ अमावस्या के दिन सुबह स्नान करने के बाद भगवान विष्णु, भगवान शिव और अपने पितरों का स्मरण करना चाहिए. इसके बाद पीपल के वृक्ष की विधि-विधान से पूजा करें, जल अर्पित करें और उसकी परिक्रमा करें. यदि संभव हो तो पूरे दिन मौन व्रत रखें. मान्यता है कि मौन रहकर की गई पूजा मन को शांत करती है और व्यक्ति के जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है. साथ ही परिवार में सुख-शांति और समृद्धि का आशीर्वाद भी प्राप्त होता है.
पंचम भाव में राहु तो अमवास्या पर करे खास उपाय
उन्होंने आगे बताया कि जिन लोगों की कुंडली में राहु पंचम भाव में है, या जो राहु के अशुभ प्रभाव, पितृ दोष अथवा बार-बार आने वाली परेशानियों से जूझ रहे हैं, उनके लिए यह अमावस्या विशेष महत्व रखती है. ऐसे लोगों को इस दिन योग्य विद्वान से राहु शांति और पितृ दोष निवारण की पूजा करानी चाहिए. इसके अलावा अपने पूर्वजों के नाम से तर्पण और पिंडदान करने से पितरों का आशीर्वाद प्राप्त होता है और जीवन की कई बाधाएं दूर होने लगती हैं. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन श्रद्धापूर्वक किए गए उपाय व्यक्ति के दुखों को कम करने और जीवन में सुख-समृद्धि का मार्ग प्रशस्त करने वाले माने जाते हैं. इसलिए इस बार की आषाढ़ अमावस्या को लेकर श्रद्धालुओं में खास उत्साह देखा जा रहा है और बड़ी संख्या में लोग पूजा-पाठ और तर्पण की तैयारी में जुट गए हैं.
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मीडिया में 6 साल का अनुभव है. करियर की शुरुआत ETV Bharat (बिहार) से बतौर कंटेंट एडिटर की थी, जहां 3 साल तक काम किया. पिछले 3 सालों से Network 18 के साथ हूं. यहां बिहार और झारखंड से जुड़ी खबरें पब्लिश करता हूं.