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195 साल पुरानी है झारखंड की ऐतिहासिक जगन्नाथ रथ यात्रा, राजा की...


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विवेक भवानी सिंह पिछले करीब 23 वर्षों से इस आयोजन की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं. उन्होंने बताया कि वे अपने परिवार की 18वीं पीढ़ी के रूप में इस ऐतिहासिक परंपरा को आगे बढ़ा रहे हैं. हर साल भगवान जगन्नाथ के स्नान, विशेष पूजा, 56 भोग और रथ यात्रा सहित करीब 15 दिनों तक धार्मिक अनुष्ठान आयोजित किए जाते हैं.

जगन्नाथ रथ यात्रा को लेकर देश विदेश में तैयार चल रही है. वहीं ओडिशा के पुरी की तर्ज पर झारखंड के पलामू जिले में भी भगवान जगन्नाथ की रथ यात्रा सदियों से आस्था और परंपरा का प्रतीक बनी हुई है. चैनपुर गढ़ से निकलने वाली यह ऐतिहासिक रथ यात्रा लगभग 1831 से लगातार आयोजित की जा रही है. मान्यता है कि चैनपुर गढ़ के तत्कालीन राजा जयनाथ सिंह को संतान नहीं हो रही थी.

पलामू: देशभर में भगवान जगन्नाथ की रथ यात्रा की तैयारियां जोरों पर हैं. ओडिशा के पुरी की तरह झारखंड के पलामू जिले में भी सदियों पुरानी रथ यात्रा की परंपरा आज तक जीवित है. चैनपुर गढ़ से निकलने वाली भगवान जगन्नाथ की यह ऐतिहासिक रथ यात्रा वर्ष 1831 से लगातार आयोजित की जा रही है. यह यात्रा आज भी लोगों की आस्था, संस्कृति और परंपरा का प्रतीक बनी हुई है.

रथ यात्रा निकालने की परंपरा
मान्यता के अनुसार, चैनपुर गढ़ के तत्कालीन राजा जयनाथ सिंह को लंबे समय तक संतान की प्राप्ति नहीं हुई थी. इसके बाद वे पुरी गए और भगवान जगन्नाथ की रथ यात्रा में शामिल हुए. उन्होंने श्रद्धा से रथ खींचा और भगवान का प्रसाद ग्रहण किया. इसके कुछ समय बाद उन्हें पुत्र रत्न की प्राप्ति हुई. पुत्र का नाम जगन्नाथ दयाल सिंह रखा गया. इसी घटना के बाद चैनपुर गढ़ में भगवान जगन्नाथ की रथ यात्रा निकालने की परंपरा शुरू हुई. यह परंपरा आज भी पूरे श्रद्धा और भव्यता के साथ निभाई जा रही है.

56 भोग की विशेष सामग्री
चैनपुर गढ़ के वर्तमान संरक्षक और भाजपा प्रदेश मंत्री विवेक भवानी सिंह पिछले करीब 23 वर्षों से इस आयोजन की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं. उन्होंने बताया कि वे अपने परिवार की 18वीं पीढ़ी के रूप में इस ऐतिहासिक परंपरा को आगे बढ़ा रहे हैं. हर साल भगवान जगन्नाथ के स्नान, विशेष पूजा, 56 भोग और रथ यात्रा सहित करीब 15 दिनों तक धार्मिक अनुष्ठान आयोजित किए जाते हैं. पहले भगवान के लिए 56 भोग की विशेष सामग्री पुरी से मंगाई जाती थी.

यात्रा करीब डेढ़ किलोमीटर लंबी
विवेक भवानी सिंह ने बताया कि चैनपुर गढ़ स्थित भगवान जगन्नाथ मंदिर से रथ यात्रा कुसुमदाहा स्थित मौसी बाड़ी मंदिर तक निकाली जाती है. यह यात्रा करीब डेढ़ किलोमीटर लंबी होती है. पूरे रास्ते मेले जैसा माहौल रहता है. ढोल-नगाड़ों और पारंपरिक वाद्य यंत्रों की धुन पर हजारों श्रद्धालु रथ खींचते हैं. सांस्कृतिक कार्यक्रम भी आयोजित किए जाते हैं. पूरे मार्ग में प्रसाद के रूप में अनारसा की दुकानों की विशेष सजावट रहती है. श्रद्धालु भगवान को अनारसा अर्पित करते हैं और प्रसाद ग्रहण करते हैं.

प्रतिदिन विशेष पूजा और भोग
इस वर्ष 15 जुलाई को भगवान को 56 भोग अर्पित किए जाएंगे. इसके बाद 16 जुलाई की शाम विशेष पूजा-अर्चना के बाद भव्य रथ यात्रा निकाली जाएगी. इस आयोजन में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के शामिल होने की उम्मीद है. जगन्नाथ मंदिर के पुजारी उमेश मिश्रा ने बताया कि रथ यात्रा के बाद भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा को कुसुमदाहा स्थित मौसी बाड़ी मंदिर में आठ दिनों तक विराजमान कराया जाता है. इस दौरान प्रतिदिन विशेष पूजा और भोग लगाया जाता है. निर्धारित अवधि पूरी होने के बाद पूरे विधि-विधान के साथ भगवान की पुनः चैनपुर गढ़ स्थित मंदिर में वापसी कराई जाती है.

संस्कृति और परंपरा का भव्य संगम
इस बार रथ यात्रा के दौरान कुसुमदाहा में बन रहा भव्य राधा-कृष्ण मंदिर भी श्रद्धालुओं के आकर्षण का प्रमुख केंद्र रहेगा. विशाल परिसर में तैयार हो रहा यह मंदिर धार्मिक पर्यटन की दृष्टि से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है. हर वर्ष की तरह इस बार भी हजारों श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना है. ऐसे में चैनपुर गढ़ की यह ऐतिहासिक रथ यात्रा एक बार फिर आस्था, संस्कृति और परंपरा का भव्य संगम बनने जा रही है.

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Amita kishor

न्यूज़18इंडिया में कार्यरत हैं. आजतक से रिपोर्टर के तौर पर करियर की शुरुआत फिर सहारा समय, ज़ी मीडिया, न्यूज नेशन और टाइम्स इंटरनेट होते हुए नेटवर्क 18 से जुड़ी. टीवी और डिजिटल न्यूज़ दोनों विधाओं में काम करने क…और पढ़ें



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